जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट: हाशिम मूसा के ठिकाने से बैग बरामद, जंगलों में छिपे आतंकियों की तलाश तेज
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जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है। बडगाम जिले के कवन जंगल इलाके में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप कमांडर हाशिम मूसा के मारे जाने के कुछ दिन बाद उसके संभावित ठिकाने के आसपास से दवाइयों और खाने-पीने की सामग्री से भरा एक बैग बरामद हुआ है। इस बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय स्तर पर आतंकियों को मिलने वाली मदद और उनके लॉजिस्टिक नेटवर्क की जांच में जुट गई हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला है कि पीर पंजाल क्षेत्र के जंगलों में करीब 35 से 40 विदेशी आतंकियों की मौजूदगी हो सकती है। ऐसे में हाशिम मूसा के ठिकाने से मिली सामग्री को सुरक्षा बल महत्वपूर्ण सुराग के तौर पर देख रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि जंगलों में छिपे आतंकियों तक भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर मदद का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
हाशिम मूसा के बाद बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता
बडगाम के कवन जंगलों में 29 सितंबर की रात सुरक्षा बलों ने एक संयुक्त अभियान के दौरान हाशिम मूसा को मार गिराया था। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG), सेना और CRPF ने संयुक्त रूप से की थी। अभियान के बाद इलाके में तलाशी ली गई और मूसा के पास से हथियार एवं अन्य सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई थी।
इसके बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के जंगल क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी रखा। इसी क्रम में पलमैदान के पास एक बैग बरामद किया गया, जिसमें दवाइयां और खाने-पीने का सामान मिला। इसके बाद जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की है कि यह सामग्री वहां तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हो सकते हैं।
LeT के चार सदस्यीय समूह का आखिरी कमांडर था मूसा
गृह मंत्रालय के अनुसार, हाशिम मूसा जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा के एक प्रमुख चार सदस्यीय कमांडर समूह का आखिरी जीवित सदस्य था। यह समूह वर्ष 2022 से क्षेत्र में सक्रिय बताया गया था और कई आतंकी घटनाओं से इसका संबंध सामने आया था।
इस समूह के अन्य सदस्यों को अलग-अलग अभियानों में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। जुनैद भट को 3 दिसंबर 2024 को दाचीगाम में ढेर किया गया था। इसके बाद सुलेमान को 28 जुलाई 2025 को मारा गया। वहीं, समूह के तीसरे सदस्य यासिर को 4 सितंबर 2026 को ऑपरेशन असधर के दौरान खत्म किए जाने की जानकारी दी गई थी। हाशिम मूसा की मौत के साथ इस समूह का पूरा नेटवर्क समाप्त होने का दावा किया गया है।
कई आतंकी घटनाओं से जुड़ा रहा नाम
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह आतंकी समूह जम्मू-कश्मीर में हुई कई बड़ी आतंकी घटनाओं से जुड़ा रहा है। इनमें कंडी, हालन, डेरा की गली, शिव खोरी, गगनगीर और बैसारन जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मामले में भी हाशिम मूसा का नाम सामने आया था।
यही वजह है कि मूसा के मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियां घाटी में सक्रिय लश्कर नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देख रही हैं। हालांकि, इसके बाद भी जंगलों में मौजूद अन्य आतंकियों और उन्हें मिलने वाली स्थानीय मदद को लेकर सुरक्षा बलों की चिंता बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है। प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा रात के समय जांच और गश्त भी तेज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि आतंकी संगठन अपने नेटवर्क को हुए नुकसान के बाद किसी तरह की प्रतिक्रिया देने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए सुरक्षा बल किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।
धार्मिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों पर भी नजर
सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद धार्मिक स्थलों, बाजारों, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, VVIP सुरक्षा और प्रवासी मजदूरों से जुड़े इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। सुरक्षा बलों का उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी गतिविधि को समय रहते रोकना है।
इसके साथ ही स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच समन्वय को भी मजबूत किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
स्थानीय नेटवर्क की भूमिका की जांच
हाशिम मूसा के ठिकाने से बैग मिलने के बाद अब जांच का एक प्रमुख केंद्र स्थानीय लॉजिस्टिक नेटवर्क बन गया है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जंगलों में छिपे आतंकियों को भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री किस माध्यम से उपलब्ध हो रही है।
यदि सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क तक पहुंचने में सफल होती हैं, तो जंगलों में छिपे आतंकियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सुरक्षा बलों का ध्यान आतंकियों की तलाश के साथ-साथ उन्हें मिलने वाली सहायता के स्रोतों का पता लगाने पर भी है।
कुल मिलाकर, हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई और निगरानी दोनों बढ़ा दी है। जंगलों में संभावित रूप से सक्रिय आतंकियों की तलाश जारी है। वहीं, स्थानीय मदद के नेटवर्क की जांच भी की जा रही है। सुरक्षा बलों का लक्ष्य घाटी में आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

