कालपी में जमीन विवाद को लेकर महिला की शिकायत, राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने का दावा

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रिपोर्ट – मोहम्मद अकरम 

जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी क्षेत्र में जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। भट्टीपुरा निवासी माया देवी पत्नी राकेश चंद्र ने प्रशासन और पुलिस के विभिन्न अधिकारियों को शिकायत देकर जमीन पर कथित कब्जे और फसल काटे जाने के आरोप लगाए हैं। माया देवी का दावा है कि संबंधित जमीन उन्होंने राजकुमार चौरसिया पुत्र रामनारायण चौरसिया से खरीदी थी और जमीन के राजस्व अभिलेखों तथा खतौनी में उनका नाम दर्ज है।

पीड़िता के अनुसार, जमीन मैनूपुर मौजा में स्थित है। उनका कहना है कि जमीन खरीदने के बाद से संबंधित राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज है। इसके बावजूद मौके पर जमीन को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। माया देवी ने अपनी शिकायत में शंकर पुत्र देवीदयाल और उनके परिजनों पर जमीन पर कथित रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया है।

राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने का दावा

माया देवी का कहना है कि जमीन के संबंध में उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज है। ऐसे में उनका आरोप है कि जमीन पर दूसरे पक्ष की ओर से हस्तक्षेप किए जाने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, जमीन के स्वामित्व और मौके पर कब्जे की वास्तविक स्थिति को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित राजस्व अभिलेखों, दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर दूसरे पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।

फसल काटे जाने का भी लगाया आरोप

शिकायत में माया देवी ने जमीन पर खड़ी फसल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जमीन पर पहले बाजरा की फसल थी, जिसे कथित तौर पर काट लिया गया। इसके बाद गेहूं की फसल को लेकर भी इसी तरह का आरोप सामने आया है।

पीड़िता का कहना है कि यदि जमीन के राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज है, तो फसल पर भी उनका अधिकार बनता है। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कराने और मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

हालांकि, फसल वास्तव में किसने काटी और किन परिस्थितियों में काटी गई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में इस आरोप की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

कई स्तरों पर शिकायत देने का दावा

माया देवी के अनुसार, उन्होंने जमीन विवाद को लेकर कई स्तरों पर शिकायतें की हैं। शिकायत में जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारियों और कालपी कोतवाली सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रार्थना पत्र दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

शिकायत में 25 नवंबर 2025, 14 अप्रैल 2026 और 18 अप्रैल 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्रों का भी जिक्र किया गया है। पीड़िता का कहना है कि अलग-अलग स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद अभी तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

माया देवी का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बाद भी उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसलिए उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

मौके की जांच से स्पष्ट हो सकती है स्थिति

जमीन से जुड़े विवादों में केवल दस्तावेज ही नहीं, बल्कि मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस मामले में यह जांच अहम होगी कि मैनूपुर मौजा स्थित संबंधित जमीन के राजस्व अभिलेखों में वर्तमान में किसका नाम दर्ज है और मौके पर वास्तविक कब्जा किसके पास है।

इसके साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि जमीन की खरीद से जुड़े दस्तावेज क्या हैं और उनका राजस्व रिकॉर्ड से कितना मिलान होता है। यदि दोनों पक्षों के बीच जमीन के स्वामित्व या कब्जे को लेकर कोई विवाद है, तो संबंधित विभाग द्वारा अभिलेखों की जांच के साथ स्थल निरीक्षण भी किया जा सकता है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

माया देवी ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के साथ मौके पर स्थिति का सत्यापन कराया जाए, ताकि विवाद की वास्तविक वजह सामने आ सके।

पीड़िता ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में उनके आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जमीन की स्थिति स्पष्ट की जाए। वहीं, फसल काटे जाने के आरोपों की भी जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाने की मांग की गई है।

फिलहाल यह मामला जमीन के दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड, कब्जे और फसल से जुड़े आरोपों के इर्द-गिर्द है। इसलिए प्रशासनिक और राजस्व स्तर पर होने वाली जांच इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के अभिलेखों में किसका अधिकार दर्ज है, मौके पर कब्जे की वास्तविक स्थिति क्या है और फसल को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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