धाता में पट्टे की जमीन की हाईकोर्ट के आदेश पर पैमाइश, पुलिस-पीएसी और ड्रोन की निगरानी में हुई कार्रवाई

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रिपोर्ट- अशोक सिंह

फतेहपुर/धाता। धाता कस्बे में पट्टे की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में शनिवार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश कराई। इस दौरान राजस्व विभाग की टीम ने संबंधित अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति का मौके पर सत्यापन किया। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। करीब दस थानों की पुलिस के साथ पीएसी के जवान तैनात रहे। इसके अलावा ड्रोन कैमरे और वीडियोग्राफी के जरिए पूरी कार्रवाई की निगरानी की गई।

मौके पर जिलाधिकारी निधि गुप्ता, उपजिलाधिकारी अश्विनी कुमार, तहसीलदार पीयूष कुमार, नायब तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में लेखपालों और कानूनगो की टीम ने जमीन की पैमाइश की। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर धाता कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में दिनभर चर्चा बनी रही।

निर्माण ध्वस्त किए जाने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला

जानकारी के अनुसार, भानुप्रताप सिंह, अभय प्रताप सिंह और इंद्र कुमार सिंह ने संबंधित जमीन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट, प्रयागराज में वाद दाखिल किया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संबंधित जमीन उन्हें पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। उनका दावा है कि वर्ष 1994 में जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष चले मामले में पट्टे को सही पाया गया था।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इसके बावजूद करीब तीन महीने पहले तहसील प्रशासन ने संबंधित जमीन पर किए गए निर्माण को ध्वस्त करा दिया। उनका आरोप था कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त नोटिस नहीं दिया गया। इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा और जमीन से संबंधित दस्तावेज तथा प्रशासनिक कार्रवाई न्यायिक जांच के दायरे में आ गई।

हालांकि, प्रशासन की ओर से भूमि और निर्माण से संबंधित कार्रवाई के अपने अभिलेख एवं पक्ष हैं। ऐसे में जमीन के वास्तविक स्वरूप और पट्टे की स्थिति को राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने कराई पैमाइश

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित दस्तावेजों और मामले की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। न्यायालय के निर्देश के क्रम में वरिष्ठ सिविल जज आकांक्षा मिश्रा, फतेहपुर की देखरेख में मौके पर जाकर जमीन की स्थिति का सत्यापन कराने और पैमाइश रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

इसी क्रम में शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे प्रशासनिक अमला धाता पहुंचा। मौके पर राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ एक दर्जन से अधिक लेखपाल और कानूनगो की टीम मौजूद रही। इसके अलावा नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी और अन्य संबंधित कर्मचारी भी कार्रवाई में शामिल रहे।

राजस्व अभिलेखों को आधार बनाकर टीम ने जमीन की सीमाओं और स्थिति की नाप-जोख शुरू की। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध भूमि और अभिलेखों के बीच स्थिति का मिलान किया। करीब दो घंटे तक चली इस कार्रवाई के बाद शाम लगभग साढ़े सात बजे पैमाइश पूरी कर ली गई।

सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल रहा तैनात

जमीन की पैमाइश के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती। मौके पर करीब दस थानों की पुलिस के अलावा पीएसी की तैनाती की गई थी। इसका उद्देश्य कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की अव्यवस्था की स्थिति को रोकना था।

इसके साथ ही ड्रोन कैमरे से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। मौके पर वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।

कार्रवाई के दौरान हाईकोर्ट, तहसील और जिला स्तर से जुड़े अधिवक्ता भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर पैमाइश की प्रक्रिया पूरी कराई और संबंधित तथ्यों को रिकॉर्ड में दर्ज किया।

हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी पैमाइश रिपोर्ट

पैमाइश पूरी होने के बाद अब प्रशासन की ओर से संबंधित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, जमीन की पैमाइश से संबंधित रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जानी है। रिपोर्ट में मौके पर की गई नाप-जोख, राजस्व अभिलेखों में दर्ज विवरण और भूमि की वास्तविक स्थिति से संबंधित जानकारी शामिल किए जाने की संभावना है।

इस प्रक्रिया के बाद न्यायालय के समक्ष मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रशासन ने न्यायालय के निर्देश के अनुसार पैमाइश की कार्रवाई पूरी कर ली है।

गौरतलब है कि पट्टे की जमीन से जुड़ा यह मामला निर्माण ध्वस्त किए जाने के बाद न्यायालय तक पहुंचा था। इसलिए शनिवार को हुई पैमाइश को मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट और हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर रहेगी।

प्रशासन की ओर से पूरी कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई। वहीं, संबंधित पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे और दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने हैं। ऐसे में जमीन के स्वामित्व अथवा पट्टे की वैधता से जुड़े अंतिम निष्कर्ष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

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