कानपुर देहात में साइबर ठगी के पीड़ित को 91,675 रुपये वापस, .apk फाइल खोलते ही खाते से निकले थे 5.84 लाख

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा

कानपुर देहात। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच कानपुर देहात पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने एक शिकायतकर्ता को राहत दिलाते हुए उसके खाते से निकाली गई धनराशि में से 91,675.98 रुपये वापस करा दिए हैं। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने आरटीओ चालान के नाम पर भेजी गई एक संदिग्ध .apk फाइल के जरिए शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन को हैक किया था। इसके बाद उसके बैंक खाते से कुल 5 लाख 84 हजार रुपये की साइबर धोखाधड़ी की गई थी।

यह मामला थाना शिवली क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, ग्राम शेखूपुर निवासी मोहम्मद मोबिस पुत्र मोहम्मद रफीक ने साइबर धोखाधड़ी के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर थाना शिवली की साइबर हेल्प डेस्क ने मामले में कार्रवाई शुरू की।

आरटीओ चालान के नाम पर भेजी गई थी .apk फाइल

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता के एक मित्र के माध्यम से उसके मोबाइल फोन पर आरटीओ चालान से संबंधित एक .apk फाइल भेजी गई थी। शिकायतकर्ता ने उक्त फाइल को अपने मोबाइल फोन में खोल दिया। इसके बाद साइबर ठगों ने कथित तौर पर उसके मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच बना ली।

इसके बाद शिकायतकर्ता के बैंक खाते से अलग-अलग माध्यमों से कुल 5,84,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई। खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उपलब्ध बैंकिंग और साइबर लेनदेन से संबंधित जानकारी के आधार पर कार्रवाई शुरू की। परिणामस्वरूप, पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क टीम ने 91,675.98 रुपये की धनराशि वापस कराने में सफलता हासिल की।

साइबर हेल्प डेस्क की कार्रवाई से मिली राहत

थाना शिवली पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता के खाते में 2 अक्टूबर 2026 को 91,675.98 रुपये वापस कराए गए। वहीं, पुलिस की ओर से शेष धनराशि की बरामदगी के लिए भी आगे की कार्रवाई की जा रही है।

धनराशि वापस मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने थाना शिवली पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की टीम का धन्यवाद किया। पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराध के पीड़ित को आर्थिक राहत मिली है।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों की रोकथाम और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के खुलासे के लिए जनपद में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

.apk फाइल डाउनलोड करने से पहले रहें सावधान

साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को अलग-अलग बहानों से मोबाइल पर संदिग्ध लिंक या फाइल भेजी जाती हैं। इनमें आरटीओ चालान, बैंक अपडेट, केवाईसी, बिजली बिल, सरकारी योजना या अन्य सेवाओं से संबंधित संदेश शामिल हो सकते हैं। कई बार ऐसी फाइलें .apk फॉर्मेट में होती हैं।

ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एप्लीकेशन फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल या ओपन करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसी भी संदिग्ध लिंक या फाइल पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। साथ ही, मोबाइल में अनजान स्रोतों से एप्लीकेशन इंस्टॉल करने की अनुमति को बंद रखना भी उपयोगी सुरक्षा उपाय हो सकता है।

इसके अलावा, बैंक खाते से संबंधित जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम कार्ड की जानकारी या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने चाहिए।

साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते से ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए धनराशि निकल जाती है तो बिना समय गंवाए 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। इसके साथ ही पीड़ित राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करा सकता है।

समय पर शिकायत मिलने से संबंधित बैंकिंग लेनदेन को रोकने और धोखाधड़ी की रकम को होल्ड कराने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए साइबर ठगी की घटना होने पर घबराने के बजाय तत्काल संबंधित माध्यमों से शिकायत करना जरूरी है।

मोबाइल फोन खोने पर भी करें शिकायत

पुलिस ने मोबाइल फोन खो जाने की स्थिति में CEIR पोर्टल और संचार साथी एप्लीकेशन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। मोबाइल फोन में बैंकिंग, यूपीआई और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से संबंधित जानकारी होने के कारण उसके खोने पर तत्काल आवश्यक सुरक्षा कदम उठाना चाहिए।

कानपुर देहात पुलिस की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने का संदेश मिला है। खासतौर पर अनजान .apk फाइलों और संदिग्ध लिंक से दूरी बनाए रखना जरूरी है। वहीं, साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल शिकायत करना पीड़ित की रकम को सुरक्षित