बागपत में राकेश टिकैत का बड़ा बयान, 2027 चुनाव में बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्ट- हैदर मलिक
बागपत। किसान नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बागपत में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में बीजेपी कथित तौर पर बेईमानी कर सकती है। उन्होंने कहा कि जो लोग चुनाव लड़ेंगे, उनके नामांकन पत्रों को लेकर दबाव बनाया जा सकता है और पुलिस तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी जांच एजेंसियों के इस्तेमाल की आशंका है।
राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से हटाने के लिए उन पर नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि, ये आरोप राकेश टिकैत के बयान पर आधारित हैं और इनके समर्थन में इस बातचीत के दौरान कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
2027 के चुनाव को लेकर राकेश टिकैत का दावा
राकेश टिकैत ने कहा कि यदि विपक्षी दलों के मजबूत उम्मीदवारों पर दबाव बनाया गया और उन्हें चुनाव लड़ने से रोका गया, तो इसका असर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियों में निर्दलीय उम्मीदवारों को फायदा मिल सकता है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि चुनाव में जो भी व्यक्ति मैदान में उतरेगा, उसका पर्चा उठाने की कोशिश की जा सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और ईडी का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किए जाने की आशंका है।
टिकैत ने विशेष रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किए जाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में किसी संबंधित राजनीतिक दल, निर्वाचन आयोग या सरकारी एजेंसी की ओर से प्रतिक्रिया इस समाचार सामग्री में उपलब्ध नहीं है।
पुराने वाहनों पर कार्रवाई को लेकर भी बोले टिकैत
बागपत में बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने वाहनों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक, यदि प्रशासन बड़ी संख्या में पुराने वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई करता है तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है।
टिकैत ने दावा किया कि गांवों में कुछ लोग वाहनों को जलाने जैसी प्रतिक्रिया की बात कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्वयं ऐसी कार्रवाई का समर्थन करने के बजाय लोगों को रोकने का प्रयास करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के बीच इस तरह की चर्चा है कि यदि प्रशासन वाहन पकड़ने की कार्रवाई करता है तो वे इसके विरोध में वाहन जला सकते हैं। टिकैत ने स्पष्ट किया कि वह लोगों को ऐसा कदम उठाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
वाहन नीति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी का दावा
पुराने वाहनों पर कार्रवाई का मुद्दा NCR क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में राकेश टिकैत के बयान ने इस विषय को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है। किसान नेता ने संकेत दिया कि ग्रामीण इलाकों में पुराने वाहनों पर कार्रवाई को लेकर असंतोष बढ़ सकता है।
हालांकि, वाहन जलाने जैसी किसी भी कार्रवाई को कानून के दायरे में गंभीर मामला माना जाएगा। इसलिए टिकैत का यह कहना महत्वपूर्ण है कि वह ग्रामीणों को ऐसी प्रतिक्रिया से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि वह विरोध को हिंसक रूप लेने से रोकने की अपील कर रहे हैं।
चुनाव और किसान मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं टिकैत
राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन से जुड़े प्रमुख किसान नेताओं में शामिल हैं और समय-समय पर किसानों, कृषि नीतियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। बागपत में दिए गए इस बयान में उन्होंने एक ओर 2027 के विधानसभा चुनाव की संभावित राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी चिंता व्यक्त की, वहीं दूसरी ओर NCR में पुराने वाहनों को लेकर ग्रामीणों की कथित नाराजगी का मुद्दा उठाया।
इस बयान के बाद राजनीतिक दलों और प्रशासन की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं। विशेष रूप से चुनाव को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद स्थिति को अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।
बयान के बाद प्रतिक्रिया पर नजर
राकेश टिकैत के बयान में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। पहला, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों पर कथित दबाव को लेकर उनका दावा और दूसरा, NCR में पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों की संभावित प्रतिक्रिया।
फिलहाल, उनके इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। इसलिए इन्हें राकेश टिकैत के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। चुनावी प्रक्रिया से संबंधित किसी भी शिकायत या आरोप की वास्तविक स्थिति निर्वाचन आयोग और संबंधित आधिकारिक संस्थाओं की जानकारी तथा कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
वहीं, पुराने वाहनों के मामले में भी प्रशासन की ओर से जारी नियमों और कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही ग्रामीणों से अपेक्षा की जाती है कि किसी भी विरोध के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी प्रकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचें।

