गांधी जयंती पर सोनभद्र के विद्यालयों में विशेष विधिक जागरूकता शिविर, POCSO कानून की दी जानकारी

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रिपोर्ट- ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी

सोनभद्र। गांधी जयंती के अवसर पर सोनभद्र जनपद के विभिन्न विद्यालयों में विशेष विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों, विशेषकर किशोरों, बालकों और बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, बाल संरक्षण तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 के महत्वपूर्ण प्रावधानों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को कानून की जानकारी सरल और सहज भाषा में दी गई, ताकि वे किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों और उपलब्ध सहायता के साधनों को समझ सकें।

यह विशेष विधिक जागरूकता अभियान उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेश पर आयोजित किया गया। इसके तहत जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित किया गया। साथ ही, उन्हें बाल सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और हेल्पलाइन सेवाओं से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।

कई विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने किया विद्यार्थियों से संवाद

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राहुल ने बताया कि जनपद के कई विद्यालयों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें आदर्श इंटर कॉलेज राबर्ट्सगंज, संत जेवियर्स उच्च माध्यमिक विद्यालय राबर्ट्सगंज, गुरुनानक बालिका इंटर कॉलेज, विंध्य सोन इंटर कॉलेज सजौर, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज दुद्धी और राजकीय इंटर कॉलेज घोरावल शामिल रहे।

इन विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्हें बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। विशेष रूप से POCSO Act के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया गया, ताकि विद्यार्थी कानून के उद्देश्य और अपनी सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों को बेहतर तरीके से समझ सकें।

इसके अलावा, विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की परेशानी या अनुचित व्यवहार की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय वयस्क, शिक्षक, परिजन या संबंधित सरकारी संस्था से सहायता लेना महत्वपूर्ण है।

POCSO कानून के बारे में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

जागरूकता शिविर के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बालक या बालिका की सहमति को कानून में वैधानिक सहमति के रूप में मान्यता नहीं दी जाती। इसलिए बच्चों से जुड़े मामलों में कानून विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।

कार्यक्रम में यह भी समझाया गया कि यदि किसी बच्चे के साथ लैंगिक अपराध होता है या ऐसी किसी घटना की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति या संस्था को तत्काल दी जानी चाहिए। विद्यार्थियों को परिजनों, शिक्षकों, पुलिस अथवा विशेष किशोर पुलिस इकाई से संपर्क करने के लिए जागरूक किया गया।

इसके साथ ही, बच्चों और विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। इनमें चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 और नालसा हेल्पलाइन 15100 प्रमुख रहे। विद्यार्थियों को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर इन सेवाओं का उपयोग सहायता प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।

चित्रकला प्रतियोगिता और नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता संदेश

विधिक जागरूकता शिविरों को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और संवादात्मक बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। इसी क्रम में विद्यालयों में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने बाल सुरक्षा, अधिकारों और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। इससे विद्यार्थियों में न केवल उत्साह बढ़ा, बल्कि उन्हें सामाजिक और विधिक विषयों को रचनात्मक तरीके से समझने का अवसर भी मिला।

वहीं, किशोर विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बाल सुरक्षा, कानूनी जागरूकता और जरूरत के समय सहायता लेने का संदेश दिया गया। इस तरह मनोरंजक और संवादात्मक माध्यम से विद्यार्थियों तक महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी पहुंचाई गई।

विधिक सहायता और सरकारी योजनाओं की भी दी जानकारी

शिविरों के दौरान केवल POCSO कानून तक ही जानकारी सीमित नहीं रही। विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को विधिक सहायता से संबंधित सुविधाओं तथा विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रमों में एलएडीसी, मध्यस्थ अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता और पराविधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया। उन्होंने लोगों को उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में जानकारी देते हुए जरूरतमंद व्यक्तियों को संबंधित सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

इसके अलावा, जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से भी जिले के विद्यालयों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराए गए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालय स्तर पर बाल अधिकारों और कानून के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।

बाल सुरक्षा के लिए जागरूकता को बताया महत्वपूर्ण

गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि कानून की जानकारी समाज में जागरूकता और सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को उनके अधिकारों तथा उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी होने से वे जरूरत के समय उचित कदम उठा सकते हैं।

इस प्रकार, सोनभद्र के विद्यालयों में आयोजित विशेष विधिक जागरूकता शिविरों ने विद्यार्थियों को POCSO Act सहित बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों से परिचित कराया। चित्रकला प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से कानूनी जानकारी को सरल एवं प्रभावी तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया। साथ ही, हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देकर उन्हें आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने के लिए भी प्रेरित किया गया।

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