अमेठी में 2.20 करोड़ के नाला निर्माण की खुली पोल, रात में बना और सुबह ढह गया
रिपोर्ट: अंजनी मिश्रा
अमेठी। नगर पंचायत अमेठी में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कराए जा रहे नाला निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुल्तानपुर रोड पर बीती रात बनाया गया नाला सुबह होते ही ढह गया। निर्माण कार्य पूरा होने के करीब 12 घंटे के भीतर नाला धराशायी होने की घटना से स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में व्यापारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर विरोध जताया।
मामला सामने आने के बाद व्यापारियों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया होता तो इतनी जल्दी नाला नहीं ढहता। वहीं, घटना ने नगर पंचायत में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
2.20 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा नाला निर्माण
दरअसल, अमेठी नगर पंचायत क्षेत्र में जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से जल निकासी योजना के तहत नाला निर्माण कराया जा रहा है। दुर्गापुर रोड और सुल्तानपुर रोड पर प्रस्तावित इस कार्य पर करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य बारिश के दौरान होने वाले जलभराव और जल निकासी की समस्या को दूर करना बताया जा रहा है।
हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान ही इसकी गुणवत्ता को लेकर स्थानीय व्यापारियों की ओर से सवाल उठाए जाने लगे थे। व्यापारियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की पर्याप्त जांच नहीं की। परिणामस्वरूप सुल्तानपुर रोड पर बना नाला कुछ ही घंटों में ढह गया।
निर्माण की गुणवत्ता पर व्यापारियों ने उठाए सवाल
नाला ढहने की जानकारी मिलते ही व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेश सोनी समेत कई व्यापारी मौके पर पहुंचे। व्यापारियों ने मौके पर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य में मानकों के पालन की जांच कराने की मांग की।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं भाजपा नेता महेश सोनी ने आरोप लगाया कि नाला निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी की जा रही है। उनके अनुसार, निर्माण शुरू होने के बाद से ही गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा रही थीं। उन्होंने दावा किया कि मामले की शिकायत नगर पंचायत से लेकर एसडीएम और जिलाधिकारी तक की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
महेश सोनी का आरोप है कि नाले में निर्धारित संख्या में सरिया इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि जहां 16 सरियों का इस्तेमाल होना चाहिए था, वहां कथित तौर पर केवल दो सरियों का प्रयोग किया गया। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक तकनीकी जांच अभी आवश्यक है। यही कारण है कि व्यापारियों ने निर्माण सामग्री और संरचना की विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है।
निर्माण के बाद मिट्टी डालने को लेकर भी शिकायत
व्यापारियों ने नाला निर्माण के बाद आसपास की स्थिति को लेकर भी शिकायत की। उनका कहना है कि कई स्थानों पर नाला निर्माण के बाद आवश्यक मिट्टी नहीं डाली गई, जिससे दुकानदारों और स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। व्यापारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर उन्होंने अपने स्तर से मिट्टी डलवाकर रास्ते को सुचारु कराया।
व्यापारियों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्य में गुणवत्ता और उपयोगिता दोनों का ध्यान रखा जाना जरूरी है। यदि निर्माण कार्य में कमी रह जाती है तो उसका सीधा असर स्थानीय लोगों और व्यापारियों पर पड़ता है। इसलिए नाले के निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराना आवश्यक है।
दोबारा मानकों के अनुरूप निर्माण की मांग
महेश सोनी ने मांग की कि ढह चुके नाले को केवल मरम्मत करने के बजाय आवश्यक होने पर संबंधित हिस्से को तोड़कर निर्धारित मानकों के अनुसार दोबारा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की भी जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कार्य के दौरान किस स्तर पर निगरानी की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वहीं, व्यापारी सुशील जायसवाल ने भी निर्माण कार्य की निगरानी पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि व्यापारियों की ओर से शिकायत किए जाने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता की जांच नहीं की गई। ऐसे में नाला ढहने की घटना ने स्थानीय प्रशासन और निर्माण एजेंसी की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तकनीकी जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
नाला निर्माण के कुछ ही घंटों बाद ढहने की घटना के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इसकी वास्तविक वजह को लेकर है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सरिया, सीमेंट, निर्माण की तकनीक, नींव और अन्य तकनीकी मानकों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नाला किन कारणों से ढहा।
ऐसे में व्यापारियों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की कमी सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
फिलहाल, अमेठी में 2.20 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे नाला निर्माण का एक हिस्सा ढहने के बाद स्थानीय स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या जांच कराता है और निर्माण कार्य को आगे किस तरह मानकों के अनुरूप पूरा किया जाता है।

