यूपी में अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़े, 31 साल बाद सीमा में बदलाव
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 15 सितंबर 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विभिन्न अभियांत्रिकी विभागों में कार्यरत अभियंताओं को दिए गए वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य विकास और निर्माण से जुड़े कार्यों को अधिक तेजी तथा प्रभावी तरीके से पूरा करना है।
इस निर्णय का लाभ लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग समेत अन्य अभियांत्रिकी विभागों के अभियंताओं को मिलेगा। हालांकि, सभी अभियंताओं के लिए एक समान वित्तीय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। विभाग और अभियंताओं की श्रेणी के अनुसार वित्तीय अधिकारों की अलग-अलग सीमाएं तय की जाएंगी। इससे संबंधित विभागों में कार्यों के अनुमोदन और निष्पादन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
31 साल से लागू थी पुरानी व्यवस्था
सरकार के अनुसार, अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों से संबंधित मौजूदा व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही थी। वित्त नियम संग्रह खंड-1 में अभियांत्रिकी विभागों के अभियंताओं को दिए गए वित्तीय अधिकारों में समय-समय पर शासनादेशों के माध्यम से संशोधन या वृद्धि की जाती रही है। वर्तमान में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के 1 जून 1995 के शासनादेश के आधार पर वित्तीय अधिकार निर्धारित थे। यह व्यवस्था 31 वर्षों से अधिक समय से लागू थी।
इस अवधि में निर्माण सामग्री, श्रम और विभिन्न सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में पुराने वित्तीय अधिकारों की सीमा के कारण कई कार्यों के लिए उच्च स्तर से स्वीकृति लेने की जरूरत पड़ती थी। विशेष रूप से छोटे और अपेक्षाकृत कम लागत वाले कार्यों में भी अनुमोदन की प्रक्रिया लंबी होने से कार्यों के निष्पादन में समय लगने की बात सरकार के कैबिनेट निर्णय में कही गई है।
छोटे कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से लेना पड़ता था अनुमोदन
पुरानी वित्तीय व्यवस्था के कारण अभियंताओं के स्तर पर उपलब्ध अधिकार सीमित रहने से कई मामलों में छोटी परियोजनाओं और निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए उच्च स्तर से स्वीकृति की आवश्यकता होती थी। परिणामस्वरूप, कार्यों की प्रशासनिक प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता था।
अब वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ने के बाद संबंधित अभियंताओं को उनके निर्धारित स्तर तक अधिक वित्तीय स्वीकृति अधिकार मिलेंगे। इससे परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अनावश्यक देरी कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी अधिक विकेंद्रीकृत किया जा सकेगा।
विभाग और श्रेणी के हिसाब से तय होगी सीमा
नई व्यवस्था में सभी अभियंताओं के वित्तीय अधिकार समान नहीं होंगे। सरकार ने विभाग तथा अभियंताओं की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग वित्तीय सीमाएं निर्धारित करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब है कि जिस स्तर के अभियंता को जितनी वित्तीय स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा, वह संबंधित विभाग और पद की श्रेणी के अनुरूप होगा।
इस व्यवस्था से वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल में जिम्मेदारी और प्रशासनिक नियंत्रण दोनों बनाए रखने का प्रयास किया गया है। वहीं, जिन कार्यों को निर्धारित सीमा के भीतर पूरा किया जा सकता है, उनके लिए बार-बार उच्च स्तर पर फाइल भेजने की आवश्यकता कम हो सकती है।
आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में सड़क, पुल, सिंचाई व्यवस्था, ग्रामीण क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं और अन्य निर्माण कार्यों की बड़ी संख्या विभिन्न अभियांत्रिकी विभागों के माध्यम से संचालित होती है। ऐसे में अभियंताओं के वित्तीय अधिकार बढ़ाने का असर इन कार्यों की प्रशासनिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
सरकार के मुताबिक, वित्तीय अधिकारों के विकेंद्रीकरण से आधारभूत संरचना, अनुरक्षण और निर्माण कार्यों का निष्पादन तेज और सुगम होगा। इससे विभागीय अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर आवश्यक निर्णय लेने में सुविधा मिल सकती है। साथ ही, परियोजनाओं से जुड़ी स्वीकृति प्रक्रिया में लगने वाले समय को भी कम किया जा सकेगा।
निर्माण लागत बढ़ने के बीच लिया गया फैसला
पिछले तीन दशकों में निर्माण क्षेत्र से जुड़े विभिन्न खर्चों में बदलाव हुआ है। निर्माण सामग्री के साथ-साथ श्रम और सेवाओं की लागत भी बढ़ी है। ऐसे में वर्ष 1995 में तय की गई वित्तीय सीमाओं को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की जरूरत महसूस की गई।
सरकार के कैबिनेट निर्णय में भी कहा गया है कि निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण कार्यों में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा, छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से अनुमोदन लेने के कारण उनके निष्पादन में विलंब हो रहा था।
विकास कार्यों की निगरानी और जवाबदेही पर भी जोर
वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी के साथ विभागीय जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। अभियंताओं को निर्धारित सीमा के भीतर ही वित्तीय अधिकारों का उपयोग करना होगा और संबंधित नियमों के अनुसार कार्यों को आगे बढ़ाना होगा। इस तरह नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अधिकार बढ़ाना नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया को संबंधित स्तर के अधिक करीब लाना भी है।
दरअसल, बड़े राज्यों में विकास परियोजनाओं की संख्या अधिक होने के कारण प्रत्येक छोटे निर्णय के लिए उच्च स्तर पर निर्भरता से प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसलिए वित्तीय अधिकारों का उचित विकेंद्रीकरण प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का एक माध्यम माना जाता है।
15 सितंबर की कैबिनेट बैठक में मिली मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से जारी कैबिनेट निर्णय के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया। आधिकारिक निर्णय में इसे प्रदेश के अभियांत्रिकी विभागों में कार्यों के त्वरित और प्रभावी निष्पादन से जोड़कर देखा गया है।
कुल मिलाकर, 1995 से चली आ रही वित्तीय अधिकारों की व्यवस्था में बदलाव का यह निर्णय अभियंताओं के स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव है। अब विभाग और अभियंताओं की श्रेणी के अनुसार निर्धारित नई वित्तीय सीमाओं के तहत निर्माण, अनुरक्षण और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में प्रक्रियागत तेजी आने की संभावना है।

