कानपुर: CSJMU के छात्र प्रतिनिधि हर्ष सोनकर ने कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक पर लगाए गंभीर आरोप, जांच की मांग

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह 

कानपुर: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। छात्र प्रतिनिधि हर्ष सोनकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर वित्तीय अनियमितताओं, नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी, शुल्क वृद्धि और छात्रों व शिक्षकों के उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हर्ष सोनकर ने कानपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में इन आरोपों को उठाते हुए मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, हाल ही में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की ओर से भी हर्ष सोनकर के खिलाफ कल्याणपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार, कुलपति ने आरोप लगाया है कि हर्ष सोनकर सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय और उनके खिलाफ भ्रामक तथा तथ्यहीन पोस्ट प्रसारित कर रहे थे। ऐसे में पूरे मामले में दोनों पक्षों के आरोप और संबंधित दस्तावेज जांच का विषय हैं।

छात्र प्रतिनिधि ने पत्रकार वार्ता में क्या कहा?

हर्ष सोनकर का दावा है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से 30 दिवसीय अभियान शुरू किया था। उनके अनुसार, अभियान शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद उनकी डिग्री जारी कर दी गई, जबकि इससे पहले करीब दो वर्षों तक डिग्री रोके जाने का आरोप उन्होंने लगाया।

हर्ष सोनकर का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सवाल सार्वजनिक किए थे। इसके बाद उन पर दबाव बनाने और उनकी आवाज को रोकने का प्रयास किए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया। उनके अनुसार, बाद में उनके खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66E समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया।

इन दावों के समर्थन में छात्र प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और संबंधित जांच एजेंसियों को भेजे गए शिकायत पत्र का भी हवाला दिया है।

फीस वृद्धि को लेकर उठाए सवाल

हर्ष सोनकर की शिकायत में विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों से संबंधित शुल्क में बढ़ोतरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। उनका आरोप है कि मार्कशीट की फीस 400 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और डिग्री की फीस 200 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दी गई।

उनका कहना है कि इस तरह की शुल्क व्यवस्था से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। उन्होंने संबंधित शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया और उसके आधार की जांच कराने की मांग की है।

गौरतलब है कि CSJMU से जुड़े शुल्क को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2022 में संबद्ध महाविद्यालयों के कुछ प्रबंधकों ने परीक्षा और अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त धनराशि लिए जाने के आरोप लगाए थे।

नियुक्तियों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी आरोप

छात्र प्रतिनिधि ने विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और पदस्थापन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति या तैनाती में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और आरक्षण रोस्टर की अनदेखी की गई।

हर्ष सोनकर ने कथित तौर पर कुछ अधिकारियों को उच्च पदों पर चयन प्रक्रिया के बिना तैनात किए जाने और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को संविदा व्यवस्था में शामिल करने में नियमों का पालन नहीं किए जाने की जांच की मांग की है।

इन आरोपों की सत्यता संबंधित नियुक्ति रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया और विश्वविद्यालय के नियमों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को फिलहाल जांच के विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

टेंडर और निर्माण कार्यों पर भी सवाल

शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले टेंडर और निर्माण कार्यों को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। हर्ष सोनकर ने सोलर पैनल सहित कुछ टेंडरों में चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाने की आशंका जताते हुए प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

इसके अलावा उन्होंने परिसर में निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों की कटाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में पेड़ों को आवश्यक अनुमति के बिना काटा गया। इस मामले में भी संबंधित विभागों की अनुमति, टेंडर दस्तावेज और पर्यावरणीय प्रावधानों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

छात्रों और शिक्षकों से जुड़े मामलों का मुद्दा

हर्ष सोनकर ने अपनी शिकायत में दलित छात्रों और विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों से जुड़े कथित भेदभाव और उत्पीड़न के मामलों का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि शिकायत करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने मांग की है कि ऐसे सभी मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

कुलपति की ओर से छात्र पर प्राथमिकी

दूसरी ओर, इस विवाद में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की ओर से भी कार्रवाई की गई है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुलपति ने हर्ष सोनकर के खिलाफ कल्याणपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय और कुलपति के खिलाफ कथित तौर पर भ्रामक व तथ्यहीन सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

CSJMU की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रो. विनय कुमार पाठक को विश्वविद्यालय का कुलपति बताया गया है और उनके अनुसार उन्होंने 12 अप्रैल 2021 को कुलपति पद का कार्यभार संभाला था।

स्वतंत्र जांच की मांग

हर्ष सोनकर ने कहा कि वे इस मामले को कानूनी स्तर पर भी आगे ले जाएंगे। उन्होंने कानपुर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं से समर्थन मिलने का दावा करते हुए कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

उन्होंने शिकायतकर्ताओं और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की भी मांग रखी है। उनका कहना है कि जांच किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए, जिससे शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो सके और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।

कुल मिलाकर, CSJMU से जुड़ा यह विवाद फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप और पुलिस जांच के स्तर पर है। हर्ष सोनकर द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। वहीं, कुलपति की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में लगाए गए आरोप भी पुलिस जांच का विषय हैं। ऐसे में मामले की आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर सभी की नजर बनी हुई है।

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