कानपुर में सड़क सुरक्षा मित्रों को ब्लैक स्पॉट्स पर दिया गया प्रशिक्षण, हादसे रोकने के बताए उपाय

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रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा 

कानपुर: शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क हादसों की रोकथाम के उद्देश्य से संभागीय परिवहन विभाग (आरटीओ) और यातायात पुलिस की ओर से सोमवार को विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान चलाया गया। अभियान के तहत मरियमपुर चौराहे पर सड़क सुरक्षा मित्रों को एकत्र कर उन्हें सड़क सुरक्षा से जुड़े सामाजिक और नागरिक दायित्वों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही उन्हें शहर के दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट्स का ऑन-ग्राउंड निरीक्षण कराया गया, ताकि वे सड़क हादसों के कारणों को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी तक सीमित न रखते हुए आम नागरिकों को भी इससे जोड़ना रहा। अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा मित्रों को बताया कि जागरूक नागरिक यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा देने के साथ जरूरत के समय दुर्घटना पीड़ितों की सहायता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मरियमपुर चौराहे पर हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

प्रशिक्षण कार्यक्रम मरियमपुर चौराहे पर आयोजित किया गया। इस दौरान सड़क सुरक्षा मित्रों को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यात्री कर अधिकारी दीपक सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा मित्र यातायात पुलिस और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ वाहन चालकों को सुरक्षित यातायात व्यवहार के लिए प्रेरित करना भी इनकी जिम्मेदारी का हिस्सा होगा। इसके अलावा सड़क पर किसी आपात स्थिति के दौरान उचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी उन्हें प्रशिक्षित किया गया।

गोल्डन आवर में सहायता पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय की महत्ता के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में घायल व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना और आवश्यकता पड़ने पर जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण होता है।

सड़क सुरक्षा मित्रों को बताया गया कि ऐसी स्थिति में वे मौके पर मौजूद लोगों के सहयोग से पीड़ित को आवश्यक सहायता दिलाने और संबंधित सेवाओं तक सूचना पहुंचाने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, सहायता करते समय अपनी सुरक्षा और प्रशिक्षित प्रक्रिया का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

पीक आवर्स में यातायात व्यवस्था में करेंगे सहयोग

शहर के व्यस्त चौराहों पर पीक आवर्स के दौरान यातायात का दबाव बढ़ जाता है। ऐसे समय में जाम और अव्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सड़क सुरक्षा मित्र यातायात पुलिस का सहयोग करेंगे।

अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वाहन चालकों को लेन अनुशासन, निर्धारित दिशा और यातायात संकेतों का पालन करने के लिए जागरूक करना जरूरी है। इसके साथ ही भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लोगों को यातायात नियमों के प्रति संवेदनशील बनाकर सड़क व्यवस्था को सुचारु रखने में मदद की जा सकती है।

हेलमेट और सीट बेल्ट के लिए करेंगे जागरूक

प्रशिक्षण के दौरान सड़क सुरक्षा मित्रों को वाहन चालकों को हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी भी समझाई गई। अधिकारियों ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित यात्रा के लिए किया जाना चाहिए।

इसके अलावा ओवरस्पीडिंग, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और अन्य जोखिमपूर्ण यातायात व्यवहार से बचने के लिए भी वाहन चालकों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। सड़क सुरक्षा मित्र अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से संवाद कर इन नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगे।

ब्लैक स्पॉट्स का कराया गया ऑन-ग्राउंड निरीक्षण

प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शहर के दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट्स का निरीक्षण रहा। सड़क सुरक्षा मित्रों को मरियमपुर चौराहे और आसपास के चिन्हित स्थानों पर ले जाकर दुर्घटनाओं के संभावित कारणों को मौके पर समझाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि किसी सड़क पर हादसों का खतरा केवल वाहन चालक की गलती से ही नहीं बढ़ता, बल्कि सड़क की बनावट, अवैध कट, प्रकाश व्यवस्था की कमी और स्पष्ट साइन बोर्ड का अभाव भी इसमें भूमिका निभा सकता है।

इस दौरान सुरक्षा मित्रों को यह समझाया गया कि सड़क की स्थिति और यातायात व्यवस्था से जुड़े छोटे-छोटे पहलुओं की पहचान करना क्यों जरूरी है। इससे वे अपने क्षेत्रों में लोगों को अधिक प्रभावी तरीके से जागरूक कर सकेंगे।

केवल चालान से नहीं रुकेगा सड़क हादसों का सिलसिला

संभागीय परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के अधिकारियों ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए केवल चालान की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।

दरअसल, यातायात नियमों का पालन कराने के साथ लोगों के व्यवहार में सुरक्षित यातायात की आदत विकसित करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से सड़क सुरक्षा मित्रों को अभियान से जोड़ा जा रहा है।

नागरिक भागीदारी से मजबूत होगी सड़क सुरक्षा

सड़क सुरक्षा मित्रों के माध्यम से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में यातायात नियमों और सुरक्षित सड़क व्यवहार को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाने की योजना है। इसके तहत वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को सड़क सुरक्षा के सामान्य नियमों की जानकारी दी जाएगी।

वहीं, ब्लैक स्पॉट्स के व्यावहारिक निरीक्षण से सुरक्षा मित्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन परिस्थितियों में सड़क पर जोखिम बढ़ सकता है। इसके आधार पर वे लोगों को अधिक प्रभावी ढंग से सावधान कर सकेंगे।

कुल मिलाकर, कानपुर में आरटीओ और यातायात पुलिस का यह प्रशिक्षण अभियान सड़क सुरक्षा के लिए नागरिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक पहल है। सड़क सुरक्षा मित्रों को नियमों की जानकारी देने के साथ उन्हें ब्लैक स्पॉट्स का व्यावहारिक निरीक्षण भी कराया गया। अब इन प्रशिक्षित स्वयंसेवकों के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

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