प्रेमानंद महाराज के शिष्य की संदिग्ध मौत पर संतों ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग
रिपोर्ट – यतेंद्र भारद्वाज
वृंदावन: प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब लगातार चर्चा में है। घटना को लेकर वृंदावन के साधु-संत समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संतों ने मृतक की मौत को आत्महत्या मानने पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संतों का कहना है कि घटना की परिस्थितियों को देखते हुए हर पहलू की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इस मामले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र भूमि है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संत साधना और तपस्या के लिए आते हैं। ऐसे में किसी संत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होना गंभीर विषय है।
संतों ने मौत की परिस्थितियों पर उठाए सवाल
दिनेश फलाहारी महाराज के अनुसार, मृतक साधु के शरीर पर मिले कुछ परिस्थितिजन्य संकेतों को देखते हुए घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि मृतक के शरीर पर गंभीर चोट के निशान और कपड़ों पर खून के निशान पाए गए। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर उन्होंने इसे आत्महत्या मानने पर सवाल उठाया और मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की।
हालांकि, मौत के वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए मामले में सामने आ रहे दावों और बयानों को जांच के निष्कर्ष से अलग देखना जरूरी है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि घटना ने वृंदावन के संत समाज को झकझोर कर रख दिया है। उनका कहना है कि मामले की जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए, जिससे घटना की प्रत्येक कड़ी को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जा सके। इसी क्रम में उन्होंने सीबीआई जांच की मांग रखी है।
महामंडलेश्वर राधा नंद गिरी ने भी जताई चिंता
वहीं, महामंडलेश्वर राधा नंद गिरी ने भी प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि साधु के साथ किसी तरह की अनहोनी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और पुलिस को सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच करनी चाहिए।
महामंडलेश्वर ने कहा कि प्रथम दृष्टया घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों को घटनास्थल, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अन्य संबंधित तथ्यों की बारीकी से जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
इसके साथ ही उन्होंने साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि वृंदावन में बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु आते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
महंत पवन गिरी ने भी की उच्चस्तरीय जांच की मांग
महंत पवन गिरी जी महाराज ने भी घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए इसे केवल आत्महत्या मानकर जांच को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मामले की पूरी जांच आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित पहलू की अनदेखी न हो।महंत पवन गिरी ने शासन और प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सीबीआई जांच की मांग से बढ़ा मामला
संत समाज की ओर से लगातार सीबीआई जांच की मांग किए जाने के बाद यह मामला और गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। संतों का कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच होने से ही मौत को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है।हालांकि, फिलहाल मौत के कारण और घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य तथ्यों के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जा सकता है।
संत समाज ने प्रशासन से मांगा स्पष्ट जवाब
वृंदावन के संतों का कहना है कि धार्मिक नगरी में साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। संत समाज चाहता है कि जांच पारदर्शी तरीके से हो और पूरे मामले की सच्चाई सामने आए।फिलहाल, संत समाज की ओर से सीबीआई जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है। दूसरी ओर, मामले की जांच से सामने आने वाले तथ्यों का इंतजार है। यदि जांच में किसी आपराधिक साजिश या अन्य अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

