दिल्ली SIR विवाद पर खरगे का चुनाव आयोग पर निशाना, बोले- वर्षों से उठाते रहे सवाल
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नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल कई वर्षों से चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन उस समय उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेने के बजाय उनका मजाक उड़ाया गया।
खरगे ने अपने पोस्ट में हालिया घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अब चुनाव आयोग के भीतर से ही कुछ ऐसे सवाल और आपत्तियां सामने आई हैं, जिनसे विपक्ष की ओर से पहले उठाई गई चिंताओं पर चर्चा फिर शुरू हो गई है। उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब दो चुनाव आयुक्तों की ओर से चुनावी सूची के पुनरीक्षण से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
वर्षों से सवाल उठाने का खरगे ने किया जिक्र
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस और कई विपक्षी दल लंबे समय से देश में चुनावों की निष्पक्षता तथा चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि जब विपक्ष की ओर से इन मुद्दों को उठाया गया, तब उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
खरगे ने अपने पोस्ट में इसी पुराने घटनाक्रम को मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि आज चुनाव आयोग के अंदर से सामने आई जानकारियां उन्हीं सवालों को फिर चर्चा में ला रही हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण विषय बताया और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों को लेकर अपनी चिंता जताई।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर बहस
दरअसल, दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। इसी बीच रिपोर्टों में सामने आया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान चुनावी सूची से संबंधित कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां या सुझाव दर्ज कराए थे। रिपोर्टों के मुताबिक ऐसी आपत्तियां करीब 14 मौकों पर सामने आईं।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने भी इस मुद्दे को अपने पुराने आरोपों और चिंताओं से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव सामने आना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, ऐसे विचार-विमर्श का उद्देश्य अंतिम निर्णय से पहले प्रक्रिया को बेहतर बनाना और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दिल्ली SIR को लेकर पहले भी मुखर रहे हैं खरगे
यह पहली बार नहीं है जब मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी उन्होंने दिल्ली में कई प्रमुख लोगों को SIR के तहत नोटिस जारी किए जाने के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी।
खरगे ने उस समय सवाल उठाया था कि अगर प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों के नाम भी जांच के दायरे में आ रहे हैं, तो आम मतदाताओं के सामने इस प्रक्रिया को लेकर क्या स्थिति बन रही है। उन्होंने SIR की प्रक्रिया को लेकर अपनी पार्टी की पुरानी आपत्तियों का उल्लेख करते हुए इसे मतदाता अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण विषय बताया था।
दिल्ली SIR के दौरान कई मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। चुनाव अधिकारियों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का अर्थ नहीं है।
लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों का मुद्दा
खरगे ने अपने ताजा बयान में इस पूरे मामले को लोकतंत्र से जोड़ते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है और चुनाव से जुड़ी संस्थाओं के कामकाज को लेकर उठने वाले सवालों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि आंतरिक स्तर पर अधिकारियों या चुनाव आयुक्तों की ओर से सुझाव और सवाल उठना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा है कि अंतिम निर्णय निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
इस तरह दिल्ली की SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है। फिलहाल, खरगे ने अपने पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि विपक्ष की ओर से लंबे समय से उठाए जा रहे सवालों को मौजूदा घटनाक्रम के संदर्भ में फिर से देखा जाना चाहिए।

