कानपुर कचहरी में अधिवक्ताओं की हड़ताल, सात सूत्रीय मांगों को लेकर हर बुधवार कामकाज रहेगा बंद

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर: प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की सात सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को प्रस्तावित हड़ताल का असर कानपुर कचहरी में भी देखने को मिला। कानपुर बार एसोसिएशन और दि लायर्स एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए विरोध दर्ज कराया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में नारेबाजी की और कामकाज बंद कराया। हड़ताल के चलते न्यायिक कार्य प्रभावित रहा और कई वादकारियों को बिना सुनवाई के वापस लौटना पड़ा।

अधिवक्ताओं का कहना है कि उनकी सात सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार और संबंधित स्तर पर ध्यान आकर्षित कराया जा रहा है। मांगें पूरी नहीं होने के कारण प्रदेश के अधिवक्ता संगठनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में अब प्रत्येक बुधवार को प्रदेश की विभिन्न कचहरियों में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।

प्रांतीय सम्मेलन में लिया गया था निर्णय

दरअसल, कानपुर बार एसोसिएशन एवं दि लायर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 10 और 11 सितंबर को प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में अधिवक्ता और बार संघों के पदाधिकारी शामिल हुए थे। सम्मेलन के दौरान अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में बार संघों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों और अधिवक्ताओं से संबंधित समस्याओं को सामने रखा। इसके बाद सात सूत्रीय मांगों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। चर्चा के बाद मांगों को लेकर प्रदेश स्तर पर आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया।

अधिवक्ता संगठनों के अनुसार, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रत्येक बुधवार को हड़ताल जारी रखने का फैसला किया गया है। इसी निर्णय के तहत 23 सितंबर को कानपुर कचहरी में भी अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग प्रमुख

अधिवक्ताओं की सात सूत्रीय मांगों में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना प्रमुख मुद्दों में शामिल है। अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि अधिवक्ताओं के कार्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं।

इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना लागू करने की मांग भी उठाई गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक न्यायिक क्षेत्र में सेवाएं देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था होनी चाहिए।

वहीं, हड़ताल न करने के संबंध में अधिवक्ताओं से अंडरटेकिंग लिए जाने के दबाव को समाप्त करने की मांग भी सात सूत्रीय मांगों में शामिल है। अधिवक्ता संगठनों ने इस व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

ब्लैक बोर्ड पर चस्पा की गई हड़ताल की सूचना

कानपुर कचहरी में बुधवार को हड़ताल को लेकर बार एसोसिएशन की ओर से परिसर में ब्लैक बोर्ड पर सूचना चस्पा की गई। इसके माध्यम से अधिवक्ताओं और कचहरी आने वाले लोगों को हड़ताल की जानकारी दी गई।

सुबह से ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता कचहरी परिसर में मौजूद रहे। इसके बाद अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लागू किया। इस दौरान नारेबाजी भी की गई और विभिन्न न्यायालयों में होने वाले कार्य को रोक दिया गया।

हड़ताल के कारण कचहरी में सामान्य दिनों की तुलना में कामकाज प्रभावित रहा। अपने मुकदमों की सुनवाई और अन्य कानूनी कार्यों के लिए कचहरी पहुंचे वादकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वादकारी अधिवक्ताओं से जानकारी लेने के बाद वापस लौट गए।

हर बुधवार हड़ताल का ऐलान

अधिवक्ता संगठनों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह आंदोलन केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। सात सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई होने तक प्रत्येक बुधवार को प्रदेश की कचहरियों में हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

कानपुर में भी इसी क्रम में अधिवक्ताओं ने बुधवार को कार्य बहिष्कार किया। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगें अधिवक्ताओं के हितों से जुड़ी हैं और इन्हें लेकर प्रदेश स्तर पर संगठन एकजुट हैं।

इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों और सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने के बाद ही आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

वादकारियों को हुई परेशानी

कचहरी में होने वाली हड़ताल का सीधा असर न्यायिक कार्य पर पड़ता है। बुधवार को भी बड़ी संख्या में वादकारी अपने मुकदमों की सुनवाई और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए कचहरी पहुंचे थे। हालांकि, अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण उन्हें अपने काम के लिए इंतजार करना पड़ा।

कई वादकारियों को हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद वापस लौटना पड़ा। ऐसे में अधिवक्ताओं की मांगों के साथ-साथ कचहरी आने वाले लोगों की सुविधा भी एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई है।

फिलहाल कानपुर कचहरी में सात सूत्रीय मांगों को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध जारी है। प्रदेश स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुसार आने वाले बुधवार को भी कार्य बहिष्कार किया जाएगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अधिवक्ताओं की मांगों को लेकर संबंधित स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

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