कानपुर देहात में सेवा संकल्प अभियान के तहत कानपुर देहात की गौशालाओं में हुआ गौशाला सेवा कार्यक्रम
रिपोर्ट – विशाल मिश्रा
कानपुर देहात। शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में जनपद कानपुर देहात में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत शनिवार को जिले के विभिन्न गौ आश्रय स्थलों में ‘गौशाला सेवा कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य गौ सेवा, गौ संरक्षण और जनसहभागिता की भावना को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने गौशालाओं में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा गौवंशों की देखभाल में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
गौरतलब है कि कानपुर देहात में 17 सितंबर 2026 से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत पशुपालन विभाग द्वारा ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में आयोजित गौशाला सेवा कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों ने गौ आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया।
गौशालाओं में किया गया श्रमदान
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने गौ आश्रय स्थलों में श्रमदान किया। इसके साथ ही वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई और गौवंशों की देखभाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने गौशालाओं में साफ-सफाई, चारा-पानी और पशुओं के लिए उपलब्ध अन्य सुविधाओं का जायजा लिया।
इस दौरान संबंधित कर्मचारियों से गौवंशों की संख्या, उनके रखरखाव और दैनिक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। अधिकारियों ने कहा कि गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ गौ पूजन
गौशाला सेवा कार्यक्रम के दौरान विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गौ पूजन भी किया गया। इसके बाद गौवंशों को केला, गुड़, चना सहित अन्य पौष्टिक आहार खिलाया गया। इस गतिविधि के माध्यम से गौ सेवा और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में गौ सेवा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए गौवंशों का संरक्षण और संवर्धन केवल एक विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने लोगों से गौ संरक्षण और पशु सेवा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
चारा-पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा
वहीं, अधिकारियों ने गौ आश्रय स्थलों में उपलब्ध हरे चारे, स्वच्छ पेयजल और पशु स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समीक्षा की। पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यकता पड़ने पर उपचार की व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी ली गई।
अधिकारियों ने निर्देश दिए कि गौ आश्रय स्थलों में गौवंशों के लिए पर्याप्त चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए। पशुओं के स्वास्थ्य पर भी लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही गौशालाओं में निर्धारित मानकों के अनुसार व्यवस्थाएं बनाए रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने संबंधित कार्मिकों को निर्देशित किया कि गौवंशों के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कार्यों में आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारी का निर्वहन करें।
जनसहभागिता को बढ़ावा देने पर जोर
‘गौशाला सेवा कार्यक्रम’ के माध्यम से प्रशासन ने गौ सेवा के साथ-साथ जनसहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों, पशुपालन विभाग के कर्मचारियों, गौसेवकों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।
दरअसल, ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य सरकारी व्यवस्थाओं के साथ समाज की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना है। इससे गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ-साथ लोगों में पशु संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने गौशालाओं की मौजूदा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और आवश्यक सुधार के संबंध में दिशा-निर्देश दिए। साथ ही गौवंशों की देखभाल, चारा-पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करने की बात कही गई।

