लखीमपुर खीरी में परिवार परामर्श केन्द्र की पहल, सुलह के बाद 11 दंपतियों की कराई गई विदाई

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लखीमपुर-खीरी। पारिवारिक विवादों को आपसी समझ और संवाद के माध्यम से सुलझाने की दिशा में लखीमपुर-खीरी महिला थाना स्थित परिवार परामर्श केन्द्र ने महत्वपूर्ण पहल की है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के निर्देशन में आयोजित परामर्श प्रक्रिया के दौरान पारिवारिक विवाद से जुड़े कुल 22 मामलों में सुलह-समझौते का प्रयास किया गया। इनमें से 11 मामलों में पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति बनने के बाद उनकी विदाई कराई गई।

परिवारों में उत्पन्न होने वाले विवाद कई बार आपसी संवाद की कमी के कारण गंभीर रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में परिवार परामर्श केन्द्र का उद्देश्य दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर उनकी समस्याओं को समझना और आपसी सहमति से समाधान का रास्ता तलाशना होता है। इसी क्रम में महिला थाना परिसर में काउंसलरों द्वारा संबंधित पक्षों की काउंसलिंग की गई।

22 मामलों में कराया गया सुलह-समझौते का प्रयास

जानकारी के अनुसार, महिला थाने के परिवार परामर्श केन्द्र पर थानाध्यक्ष बबिता पटेल के नेतृत्व में काउंसलर नीति गुप्ता, कुसुम गुप्ता और कय्यूम जरवानी ने विभिन्न पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई की। इन मामलों में दहेज उत्पीड़न, घरेलू विवाद और साझा गृहस्थी में निवास को लेकर उत्पन्न समस्याओं सहित अन्य पारिवारिक मतभेद शामिल रहे।

परामर्श के दौरान पति-पत्नी और उनके परिवार के सदस्यों से बातचीत की गई। दोनों पक्षों की समस्याओं और उनके मतभेदों को समझने के बाद आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया गया। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 22 में से 11 मामलों में सुलह सफल रही और पति-पत्नी को साथ रहने के लिए विदा किया गया।

यह पहल उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां विवाद के बावजूद दोनों पक्ष आपसी बातचीत के जरिए रिश्ते को बनाए रखना चाहते हैं।

8 मामलों में पक्षकारों को दिया गया समय

परिवार परामर्श केन्द्र में पहुंचे सभी मामलों में तत्काल निर्णय संभव नहीं हो सका। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 8 मामलों में पति-पत्नी के बीच अत्यधिक मनमुटाव पाया गया। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को तत्काल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विचार करने के लिए समय दिया गया।

परामर्श केन्द्र की ओर से ऐसे पक्षकारों को समय देकर स्थिति पर दोबारा विचार करने का अवसर प्रदान किया गया है। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि पति-पत्नी बिना किसी दबाव के अपने वैवाहिक जीवन और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर उचित निर्णय ले सकें।

इस तरह परिवार परामर्श की प्रक्रिया केवल तत्काल समझौता कराने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पक्षकारों को शांतिपूर्वक अपनी परिस्थितियों पर विचार करने का अवसर भी देती है।

3 मामलों में नहीं बन सकी सहमति

वहीं, परिवार परामर्श केन्द्र में आए 3 मामलों में सुलह का प्रयास सफल नहीं हो सका। दोनों पक्षों के बीच मौजूद मतभेदों को देखते हुए आपसी सहमति नहीं बन पाई। इन मामलों में काउंसलरों द्वारा दोनों पक्षों की बात सुनी गई और उपलब्ध प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई।

परिवार परामर्श केन्द्र का मूल उद्देश्य विवादों का समाधान संवाद और समझ के माध्यम से करना है। इसलिए प्रत्येक मामले में पक्षकारों की परिस्थितियों और उनकी सहमति को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में हुई काउंसलिंग

परामर्श प्रक्रिया के दौरान संबंधित पक्षकारों के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में पति-पत्नी के बीच उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। काउंसलरों ने दोनों पक्षों की बात सुनने के साथ ही परिवार के सदस्यों से भी आवश्यक जानकारी ली।

इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया में महिला थाने की उपनिरीक्षक दिनेश मणि पाण्डेय, महिला आरक्षी सुमन लता और रेखा गौड़ का भी सहयोग रहा। पुलिसकर्मियों और काउंसलरों के समन्वय से मामलों की सुनवाई और सुलह-समझौते की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

आपसी संवाद से समाधान पर जोर

परिवार परामर्श केन्द्र की इस पहल में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि विवादित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। पारिवारिक मामलों में कई बार छोटी-छोटी गलतफहमियां समय के साथ बड़े मतभेद का रूप ले लेती हैं। ऐसे में संवाद और काउंसलिंग के माध्यम से समस्या की वास्तविक वजह समझने का प्रयास किया जाता है।

इसी क्रम में 22 मामलों में की गई काउंसलिंग के बाद 11 दंपतियों का साथ वापस होना इस प्रक्रिया के परिणाम के रूप में सामने आया है। हालांकि, शेष मामलों में भी संबंधित पक्षों की परिस्थितियों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

महिला थाना स्थित परिवार परामर्श केन्द्र की यह पहल पारिवारिक विवादों के मामलों में संवाद, समझ और आपसी सहमति के महत्व को सामने लाती है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि विवाद की स्थिति में संबंधित पक्षों को अपनी समस्याओं को बातचीत के माध्यम से रखने का अवसर मिलने से समाधान की संभावनाएं बन सकती हैं।

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