बदायूं में कथित अवैध प्रसव केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी, जच्चा-बच्चा को कराया भर्ती
रिपोर्टर -विपिन य़ादव
बदायूं/दातागंज। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के दातागंज कस्बे में कथित तौर पर बिना वैध डिग्री और पंजीकरण के प्रसव कराए जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की। कार्रवाई के दौरान एक महिला प्रसव के बाद मौके पर मिली, जिसके बाद जच्चा और नवजात को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में बिना वैध अनुमति संचालित बताए जा रहे प्रसव केंद्रों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, दातागंज कस्बे की एक बिल्डिंग में महिलाओं का प्रसव कराए जाने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिली थी। शिकायत मिलने के बाद दातागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक रिदेश भसीन स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप की स्थिति बन गई।
बिना वैध डिग्री प्रसव कराने का आरोप
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान मौके पर रेणु नाम की एक महिला के मौजूद होने की बात सामने आई। आरोप है कि संबंधित महिला के पास प्रसव कराने के लिए आवश्यक वैध चिकित्सा डिग्री या पंजीकरण नहीं था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को एक महिला प्रसव के बाद मिली। इसके बाद स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जच्चा-बच्चा को दातागंज स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्यकर्मियों ने दोनों की स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई।
बिल्डिंग पर नहीं मिला अस्पताल का बोर्ड
जांच के दौरान जिस बिल्डिंग में प्रसव कराए जाने की बात सामने आई, वहां किसी अस्पताल, नर्सिंग होम या प्रसव केंद्र से संबंधित बोर्ड दिखाई नहीं दिया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने यह सवाल भी खड़ा हुआ कि आखिर किस अनुमति या पंजीकरण के आधार पर वहां प्रसव संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
हालांकि, किसी चिकित्सा संस्थान का बोर्ड न होना अपने आप में अवैध संचालन का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों, पंजीकरण और स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यही वजह है कि विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई को जांच रिपोर्ट से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुलिस को बुलाकर संबंधित महिला को सौंपा
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा अधीक्षक ने पुलिस को मौके पर बुलाया। इसके बाद मौके पर मौजूद संबंधित महिला को पुलिस के सुपुर्द किया गया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बिल्डिंग स्वामी और संबंधित महिला के खिलाफ थाने में तहरीर दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब इस मामले में पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। तहरीर के आधार पर पुलिस पूरे मामले की जांच कर सकती है और उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जा सकती है।
दातागंज में कथित अवैध प्रसव केंद्रों पर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद दातागंज क्षेत्र में कथित तौर पर संचालित हो रहे अन्य प्रसव केंद्रों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि बिना आवश्यक डिग्री, पंजीकरण या अनुमति के कहीं प्रसव जैसी चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं, तो ऐसे मामलों की व्यापक स्तर पर जांच जरूरी है।
दरअसल, प्रसव एक संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित चिकित्सकीय स्टाफ, आवश्यक उपकरण, साफ-सफाई और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में किसी भी स्थान पर प्रसव संबंधी सेवाएं संचालित करने से पहले निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन किया जाना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी नजर
दातागंज में सामने आए इस मामले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग पूरे क्षेत्र में संचालित निजी क्लीनिकों, नर्सिंग होम और प्रसव केंद्रों की व्यापक जांच करेगा। यदि जांच के दौरान कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्थान या व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और पुलिस को दी गई तहरीर के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराए जाने के बाद उनकी चिकित्सा देखभाल की जा रही है। वहीं, संबंधित महिला और बिल्डिंग स्वामी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने दातागंज क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी स्तर पर संचालित चिकित्सा केंद्रों के पंजीकरण की जांच की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस एक मामले तक कार्रवाई सीमित रखता है या फिर क्षेत्र में ऐसे कथित अवैध प्रसव केंद्रों की व्यापक जांच शुरू करता है।

