लखीमपुर खीरी के कस्ता में बेलगाम ई-रिक्शा और ऑटो संचालन से बढ़ी परेशानी, कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट – शरद अवस्थी

लखीमपुर खीरी। कस्ता कस्बे में ई-रिक्शा और ऑटो के अनियमित संचालन को लेकर वाहन संचालकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मोटर ऑपरेटरों का आरोप है कि कस्बे में ई-रिक्शा और ऑटो बिना स्पष्ट रूट सीमा के संचालित हो रहे हैं। इसके चलते जहां यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने और कम उम्र के चालकों द्वारा वाहन चलाए जाने की शिकायतों ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय वाहन संचालकों का कहना है कि ई-रिक्शा का संचालन सामान्य तौर पर छोटे स्थानीय रूट तक सीमित होना चाहिए, लेकिन कस्ता में कई ई-रिक्शा दूर-दराज के क्षेत्रों तक सवारियां लेकर जाते दिखाई देते हैं। आरोप है कि गोला गोकर्णनाथ, सीतापुर, लखीमपुर, सिकंदराबाद और काजी कमालपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से ई-रिक्शा और ऑटो कस्ता तक आ-जा रहे हैं। इससे कस्बे में वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण जाम और यातायात संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं।

रूट सीमा तय करने की मांग

मोटर ऑपरेटरों के अनुसार ई-रिक्शा के संचालन को लेकर स्पष्ट रूट व्यवस्था नहीं होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उनका कहना है कि जिन मार्गों पर बस और अन्य यात्री वाहन पहले से संचालित होते हैं, वहां भी ई-रिक्शा और ऑटो लंबी दूरी की सवारियां बैठा रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

वाहन संचालकों ने परिवहन विभाग से मांग की है कि कस्ता क्षेत्र में ई-रिक्शा और ऑटो के लिए निर्धारित रूट की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वाहन निर्धारित क्षेत्र और नियमों के अनुसार ही संचालित हों।

क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने की शिकायत

स्थानीय लोगों की ओर से ई-रिक्शा और ऑटो में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने की शिकायत भी सामने आई है। लोगों का कहना है कि अधिक यात्रियों को बैठाने के कारण वाहन का संतुलन प्रभावित हो सकता है और सड़क पर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, कुछ वाहन संचालकों का आरोप है कि अधिक सवारियां बैठाने की होड़ में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है।

इसके अलावा कम उम्र के चालकों द्वारा ई-रिक्शा और ऑटो चलाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे वाहनों की नियमित जांच हो तो नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों की पहचान की जा सकती है।

बसों के संचालन में भी परेशानी का आरोप

मोटर ऑपरेटरों ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर ई-रिक्शा और ऑटो बसों के आगे-पीछे खड़े हो जाते हैं। इससे बसों को यात्रियों को उतारने और बैठाने में परेशानी होती है। उनका कहना है कि सड़क पर अनावश्यक रूप से वाहनों के खड़े रहने से यातायात व्यवस्था बाधित होती है।

वाहन संचालकों के मुताबिक, जब बस स्टाफ द्वारा दूर की सवारियां बैठाने को लेकर सवाल किया जाता है तो कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वाहन संचालकों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बे में ई-रिक्शा और ऑटो की बढ़ती संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था की नियमित निगरानी जरूरी है। उनका आरोप है कि छोटे और कम उम्र के चालक भी कई बार वाहन चलाते नजर आते हैं, लेकिन इनकी जांच को लेकर पर्याप्त कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

लोगों का कहना है कि यदि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और वाहनों की नियमित चेकिंग हो तो व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है। विशेष रूप से ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के कागजात, फिटनेस, बीमा और निर्धारित क्षमता से संबंधित नियमों की जांच किए जाने की मांग की जा रही है।

परिवहन विभाग से कार्रवाई की गुहार

मोटर ऑपरेटरों ने परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ई-रिक्शा और ऑटो के संचालन के लिए स्पष्ट नियम और रूट निर्धारित किए जाएं। इसके साथ ही ओवरलोडिंग, नाबालिग या बिना वैध दस्तावेजों के वाहन चलाने जैसे मामलों की जांच की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात नियमों का पालन केवल चालकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संबंधित विभागों की नियमित निगरानी भी जरूरी है। यदि समय रहते नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है तो सड़क पर अनावश्यक भीड़ और दुर्घटना के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

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