गाजियाबाद में नकली काली मिर्च बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा, 13.5 लाख का माल बरामद
Digital UP News Desk
गाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर ऐसी फैक्ट्री का खुलासा किया है, जहां छोटे और घटिया दाने वाली काली मिर्च को प्रोसेस करके बड़े आकार की ए-ग्रेड काली मिर्च के रूप में तैयार किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक को गिरफ्तार किया गया है। मौके से करीब 13.5 लाख रुपये का सामान बरामद किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी सस्ती काली मिर्च की गुणवत्ता और आकार बढ़ाने के लिए गोंद के चूर्ण, मैदा और रिफाइंड सोयाबीन तेल का इस्तेमाल करता था। इसके बाद तैयार उत्पाद को बाजार में बेहतर गुणवत्ता वाली काली मिर्च के रूप में बेचे जाने की तैयारी की जाती थी। फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग ने बरामद सामग्री के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
फैक्ट्री पर संयुक्त टीम ने की छापेमारी
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त सर्वेश मिश्रा के अनुसार, 17 सितंबर की रात लोनी बॉर्डर थाना पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने केहर फार्म हाउस, सेवाधाम, बेहटा हाजीपुर स्थित एक फैक्ट्री पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान टीम को फैक्ट्री के अंदर काली मिर्च को प्रोसेस करने का काम चलता मिला। मौके पर दिल्ली के बुद्ध विहार निवासी लोकेश गुप्ता को पकड़ा गया। विभाग के अनुसार, यहां छोटे आकार की काली मिर्च को अलग प्रक्रिया से तैयार करके उसका आकार और वजन बढ़ाया जा रहा था।
इसके बाद पुलिस ने फैक्ट्री संचालक को गिरफ्तार कर लिया और वहां मौजूद कच्चे माल तथा तैयार उत्पाद को अपने कब्जे में ले लिया।
सस्ती काली मिर्च को महंगे उत्पाद में बदलने का तरीका
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह बाजार से कम कीमत वाली छोटी और घटिया किस्म की काली मिर्च खरीदता था। इसके बाद इस काली मिर्च को बड़े आकार का दिखाने के लिए एक विशेष पेस्ट तैयार किया जाता था।
इस प्रक्रिया में गोंद के चूर्ण और मैदा को मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता था। छोटे दानों वाली काली मिर्च को इस पेस्ट में डुबोया जाता था। पेस्ट की परत चढ़ने के बाद दानों को बाहर निकालकर सुखाने के लिए फैला दिया जाता था।
सूखने के बाद इन दानों को जूट के बोरों पर रगड़कर उनकी फिनिशिंग की जाती थी। अंत में दानों पर रिफाइंड सोयाबीन तेल की पॉलिश की जाती थी। इससे काली मिर्च का बाहरी स्वरूप चमकदार दिखाई देता था और उसका आकार भी पहले की तुलना में बड़ा नजर आता था।
इस तरह तैयार की गई काली मिर्च को कथित तौर पर ए-ग्रेड और बेहतर गुणवत्ता वाली काली मिर्च के रूप में बाजार में भेजने की तैयारी की जाती थी।
फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद
छापेमारी के दौरान टीम को फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में कच्चा माल और तैयार उत्पाद मिला। विभाग के अनुसार मौके से 60 बोरे मैदा और 18 बोरे गोंद का चूर्ण बरामद किया गया।
इसके अलावा करीब 40 बोरे छोटी दाने वाली कच्ची काली मिर्च मिली, जिसका कुल वजन लगभग 1,200 किलोग्राम बताया गया है। वहीं करीब 65 बोरे तैयार मिलावटी काली मिर्च भी बरामद की गई, जिसका वजन लगभग 975 किलोग्राम है।
इसके साथ ही टीम ने 37 टिन रिफाइंड सोयाबीन तेल भी बरामद किया। विभाग के मुताबिक बरामद किए गए पूरे माल की अनुमानित कीमत करीब 13.5 लाख रुपये है।
इस बरामदगी के बाद विभाग ने फैक्ट्री में मौजूद सामग्री को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच के लिए पांच नमूने भेजे गए
खाद्य सुरक्षा विभाग ने बरामद सामग्री की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल किए गए पदार्थों की जांच के लिए कुल पांच नमूने सील किए हैं। इन नमूनों को फास्ट ट्रैक प्रयोगशाला भेजा गया है।
अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि तैयार काली मिर्च में इस्तेमाल की गई सामग्री खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी या नहीं। साथ ही, विभाग यह भी जांच कर रहा है कि इस प्रक्रिया से तैयार काली मिर्च की बिक्री कहां और किस माध्यम से की जाती थी।
सप्लाई नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
फैक्ट्री संचालक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच का दायरा बढ़ गया है। अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि तैयार उत्पाद की सप्लाई किन बाजारों, दुकानों या कारोबारियों तक की जाती थी।
इसके अलावा जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस कारोबार में आरोपी के साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। कच्ची काली मिर्च कहां से खरीदी जाती थी और तैयार माल को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था कैसे की जाती थी, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट पर विभाग की नजर
गाजियाबाद में हुई यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर विभाग की निगरानी को भी सामने लाती है। काली मिर्च जैसे रोजमर्रा के मसाले का इस्तेमाल घरों के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबार में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग प्रयोगशाला रिपोर्ट तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं, यह भी पता लगाया जा रहा है कि फैक्ट्री में तैयार की गई काली मिर्च बाजार में पहले से कितनी मात्रा में पहुंच चुकी थी।
अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। इस मामले में आगे की जांच के दौरान सप्लाई नेटवर्क और अन्य संभावित लोगों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।

