डेयरी लोन के नाम पर हस्ताक्षर कराने का आरोप, दो साल बाद पहुंचा बैंक का नोटिस
रिपोर्ट-शुभम साहू
कानपुर: नर्वल तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत लाखनखेड़ा के मजरा निबिया निवासी एक युवक के नाम कथित डेयरी लोन का बकाया सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। युवक का आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले उसे मवेशी पालन के लिए बैंक से ऋण दिलाने का भरोसा देकर कुछ कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। हालांकि, इसके बाद उसे न तो ऋण स्वीकृत होने की जानकारी दी गई और न ही उसके खाते में किसी ऋण राशि के आने की जानकारी मिली। अब करीब दो साल बाद बैंक की ओर से ऋण भुगतान का नोटिस मिलने के बाद उसने मामले की जांच की मांग की है।
पीड़ित महेश कुमार पुत्र प्यारे लाल, निवासी निबिया, भीतरगांव, कानपुर ने इस संबंध में तहसील दिवस और आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है। उसने अपने शिकायती पत्र में ग्राम प्रधान शोभा देवी के पति अरुण कुमार और बैंक प्रबंधन से संबंधित गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति बैंक के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मवेशी पालन के लिए लोन दिलाने का दिया गया भरोसा
महेश कुमार के मुताबिक, ग्राम प्रधान शोभा देवी के पति अरुण कुमार उसे मवेशी पालने के लिए बैंक से ऋण दिलाने की बात कहकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की भीतरगांव शाखा ले गए थे। युवक का कहना है कि वहां उससे विभिन्न कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए।
महेश के अनुसार, बैंक प्रबंधन की ओर से खेती और मवेशी नहीं होने का हवाला देते हुए उसका लोन स्वीकृत करने से मना कर दिया गया था। इसके बाद उसने यह मान लिया कि ऋण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। उसका कहना है कि इसके बाद उसे बैंक से किसी ऋण स्वीकृति या धनराशि के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
युवक का दावा है कि उसे लंबे समय तक यह जानकारी नहीं थी कि उसके नाम पर किसी प्रकार का डेयरी ऋण दर्ज है।
दो साल बाद घर पहुंचा बैंक का नोटिस
मामले में नया मोड़ तब आया, जब 1 जुलाई 2026 को महेश कुमार के घर उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, भीतरगांव शाखा की ओर से ऋण भुगतान संबंधी नोटिस पहुंचा। नोटिस में उसके नाम से लिए गए कथित ऋण की बकाया राशि का उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बैंक के नोटिस में 27 मार्च 2024 को ₹1,03,740 का KCC Dairy (AH) ऋण दिए जाने का उल्लेख है। वहीं, नोटिस के मुताबिक 30 मार्च 2026 तक इस ऋण पर ₹1,10,379 की बकाया राशि बताई गई है। इसमें ब्याज और अन्य प्रभार शामिल होने की बात कही गई है।
नोटिस मिलने के बाद महेश कुमार के लिए यह सवाल खड़ा हो गया कि जिस ऋण के बारे में उसे जानकारी नहीं थी, वह उसके नाम पर कैसे स्वीकृत हुआ और उसकी धनराशि का इस्तेमाल किसने किया।
खाते के खुलने और रकम निकासी पर भी उठाए सवाल
महेश कुमार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके नाम से एक नया बैंक खाता भी खोला गया। उसका दावा है कि कथित डेयरी ऋण की राशि इस खाते में भेजी गई और बाद में वहां से रकम की निकासी भी हुई।
युवक के अनुसार, उसे इस खाते की जानकारी पहले नहीं थी। उसका कहना है कि खाते में लेनदेन होने की बात सामने आने के बावजूद उसके पास उस खाते की पासबुक नहीं है और न ही उसने स्वयं इन लेनदेन के संबंध में कोई जानकारी दी थी।
ऐसे में शिकायतकर्ता ने मांग की है कि बैंक रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जाए कि उसके नाम से कौन-सा खाता खोला गया था, उसमें ऋण की रकम कब जमा हुई और उसके बाद धनराशि किस माध्यम से निकाली गई।
ऋण आवेदन और हस्ताक्षरित दस्तावेजों की जांच की मांग
नोटिस मिलने के बाद महेश कुमार ने मामले की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। उसने अधिकारियों से मांग की है कि उसके नाम से तैयार किए गए ऋण आवेदन, केवाईसी दस्तावेज, बैंक खाते, हस्ताक्षरित कागजात और ऋण स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
इसके अलावा वह यह भी जानना चाहता है कि कथित ऋण के लिए बैंक में कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए थे और उन दस्तावेजों पर किस परिस्थिति में उसके हस्ताक्षर लिए गए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तव में उसके नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ था, तो ऋण की पूरी प्रक्रिया और धनराशि के उपयोग की जानकारी उसे उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, यदि उसके नाम से किसी खाते में राशि जमा हुई और निकाली गई, तो उसके लेनदेन का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आना चाहिए।
तहसील दिवस और आईजीआरएस में दर्ज कराई शिकायत
मामले को लेकर महेश कुमार ने नर्वल तहसील दिवस में शिकायत की है। इसके साथ ही उसने आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी अधिकारियों को शिकायत भेजी है। शिकायत में उसने पूरे मामले की जांच कराने और कथित ऋण से संबंधित वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने की मांग की है।
उसकी मांग है कि बैंक के रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जाए कि ऋण आवेदन किस तारीख को किया गया, ऋण किस आधार पर स्वीकृत हुआ, खाते में कितनी धनराशि भेजी गई और उसके बाद उस राशि का क्या हुआ।
इसके अलावा, वह यह भी चाहता है कि संबंधित दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों और केवाईसी रिकॉर्ड की जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
बैंक और प्रधान पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी
इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से ग्राम प्रधान पति और बैंक प्रबंधन पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, ग्राम प्रधान पक्ष और बैंक प्रबंधन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति का दूसरा पक्ष भी स्पष्ट हो सकेगा।
ऐसे मामलों में बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं। ऋण आवेदन, केवाईसी दस्तावेज, खाता खोलने की प्रक्रिया, ऋण स्वीकृति पत्र, बैंक खाते का स्टेटमेंट और धनराशि निकासी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि ऋण की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल यह मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों के स्तर पर है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी मानने से पहले संबंधित दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी। अधिकारियों की जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, यदि बैंक रिकॉर्ड में ऋण स्वीकृति और धनराशि के लेनदेन की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार पाई जाती है, तो उस स्थिति में भी शिकायतकर्ता को संबंधित दस्तावेजों और खाते की जानकारी उपलब्ध कराकर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
इस पूरे मामले में अब जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खासतौर पर 27 मार्च 2024 को कथित रूप से स्वीकृत ₹1,03,740 के KCC Dairy (AH) ऋण से जुड़े दस्तावेज, खाते की जानकारी और लेनदेन की जांच से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। फिलहाल शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उसके नाम पर ऋण की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई और ऋण की धनराशि का वास्तविक उपयोग किसने किया।

