लखीमपुर खीरी में रात की बिजली कटौती से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी, बाढ़ के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता
Digital UP News Desk
लखीमपुर खीरी: जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों बाढ़ के साथ-साथ बिजली कटौती भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह बाढ़ का पानी घरों, रास्तों और आसपास के इलाकों में जमा है। ऐसे में रात के समय होने वाली बिजली कटौती से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। लोगों का कहना है कि बाढ़ जैसी स्थिति के बीच रात में अंधेरा होने से घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक इन दिनों रात में लगातार बिजली कटौती हो रही है और कई क्षेत्रों में करीब दो से तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पा रही है। इसके कारण लोगों को उमस और अंधेरे के बीच रात गुजारनी पड़ रही है। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य दिनों से अलग है। पानी भरे रास्तों और घरों के आसपास अंधेरा रहने से ग्रामीणों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
बाढ़ के बीच बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी
लखीमपुर खीरी के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहले से ही लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई गांवों और संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने के कारण आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में रात के समय बिजली कटौती होने पर स्थिति और कठिन हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान सबसे जरूरी चीजों में सुरक्षा और रोशनी शामिल है। घरों के आसपास पानी भरा होने के कारण लोग रात में विशेष सतर्कता बरतते हैं। यदि इसी दौरान बिजली चली जाती है तो आसपास की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं देती। इससे लोगों को अनावश्यक जोखिम उठाना पड़ सकता है।
इसके अलावा, पानी भरे इलाकों में जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी के साथ सांप समेत अन्य जीव-जंतु आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। इसलिए रात में पर्याप्त रोशनी होना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अंधेरे में बाहर निकलना हो रहा मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में बिजली कटौती का सामना किसी तरह किया जा सकता है, लेकिन बाढ़ के दौरान परिस्थितियां अलग हैं। कई स्थानों पर सड़क और गलियों में पानी जमा है। ऐसे में रात के समय किसी जरूरी काम से बाहर निकलने पर रास्ते की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि घर के आसपास भी पानी होने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। बिजली गुल होने के बाद टॉर्च या मोबाइल की रोशनी के सहारे काम चलाना पड़ता है। हालांकि, हर समय मोबाइल की रोशनी पर निर्भर रहना व्यावहारिक समाधान नहीं है।
इसी वजह से ग्रामीण बिजली विभाग और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम से कम रात के समय बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि दिन के समय यदि बिजली कटौती की जरूरत हो तो उस समय कटौती की जा सकती है, लेकिन रात में आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने बताई अपनी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि वे बिजली विभाग की जरूरतों और तकनीकी कारणों को समझते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में रात्रिकालीन बिजली कटौती से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। बाढ़ के कारण पहले ही जनजीवन प्रभावित है। रास्तों पर पानी जमा होने और आवागमन की समस्या के बीच बिजली का न होना अतिरिक्त चिंता पैदा कर रहा है।
लोगों का कहना है कि बिजली की रोशनी से घरों और आसपास के क्षेत्र पर नजर रखना आसान होता है। खासकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में रात के समय किसी भी तरह की अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए रोशनी महत्वपूर्ण है। इसलिए बिजली कटौती के समय और अवधि की समीक्षा की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक यदि दिन में बिजली आपूर्ति के दौरान कुछ समय की कटौती की जाती है तो वे उसे सहन कर सकते हैं। लेकिन रात के समय लगातार दो से तीन घंटे बिजली नहीं रहने से समस्या गंभीर हो जाती है।
प्रशासन और बिजली विभाग से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए बिजली आपूर्ति का अलग से आकलन किया जाना चाहिए। जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचा है, वहां रात्रिकालीन बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता देने से लोगों को राहत मिल सकती है।
इसके साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को स्थानीय स्तर पर यह भी देखना चाहिए कि कहीं तकनीकी समस्या या अन्य कारणों से आपूर्ति प्रभावित तो नहीं हो रही है। यदि कटौती किसी निर्धारित व्यवस्था के तहत हो रही है तो बाढ़ की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उसमें अस्थायी बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रोशनी का महत्व
बाढ़ के दौरान सिर्फ बिजली की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि सुरक्षित रोशनी की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पानी से घिरे गांवों में रात के समय रास्तों, गलियों और घरों के आसपास पर्याप्त रोशनी रहने से लोगों को आवागमन में मदद मिल सकती है। साथ ही संभावित खतरे की पहचान करना भी आसान हो जाता है।
हालांकि, ग्रामीणों की समस्या सिर्फ बिजली कटौती तक सीमित नहीं है। बाढ़ के कारण पहले से ही कई परिवारों को आवागमन, पशुओं की सुरक्षा और दैनिक जरूरतों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यदि रात के समय बिजली आपूर्ति नियमित रहे तो कम से कम अंधेरे से जुड़ी समस्या को कम किया जा सकता है।
ग्रामीण बोले- दिन में कटौती मंजूर, रात में नहीं
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है कि यदि बिजली विभाग को आपूर्ति प्रबंधन के लिए कटौती करनी ही है तो उसका समय दिन में रखा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी रहती है और उस समय बिजली कटौती का असर अपेक्षाकृत कम महसूस होता है। इसके विपरीत रात में बिजली जाने पर घरों और आसपास के इलाकों में अंधेरा छा जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के बीच रात में अंधेरा उनके लिए सुरक्षा से जुड़ा विषय बन गया है। इसलिए उनकी प्राथमिक मांग रात्रिकालीन बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने की है।
फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन और बिजली विभाग बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उनकी समस्या पर ध्यान देंगे और रात्रि के समय बिजली कटौती कम करने या समाप्त करने के संबंध में आवश्यक कदम उठाएंगे। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने और परिस्थितियां सामान्य होने तक विशेष व्यवस्था की जरूरत है।

