गाजियाबाद में 12वीं की छात्रा की मौत का मामला: सहपाठी पर बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना का आरोप, 4 पर केस
Digital UP News Desk
गाजियाबाद: वैशाली इलाके में रहने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा की मौत के मामले में पुलिस ने एक सहपाठी छात्र समेत उसके परिवार के चार लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया है। छात्रा के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को स्कूल में लंबे समय से बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। पुलिस अब मोबाइल फोन में मिले फोटो, वीडियो और वॉट्सऐप चैट समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
परिजनों के अनुसार, छात्रा आनंद विहार स्थित एक निजी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। 24 अगस्त को घर में उसकी मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की। शुरुआत में परिवार को घटना के पीछे किसी अन्य कारण की जानकारी नहीं थी। हालांकि, बाद में छात्रा के मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध सामग्री की जांच की गई तो परिजनों को उसके सहपाठी छात्र के साथ हुई बातचीत और कुछ वीडियो के बारे में जानकारी मिली।
परिवार का आरोप है कि संबंधित छात्र उनकी बेटी को काफी समय से परेशान कर रहा था। इसके अलावा, उसे कक्षा के दूसरे विद्यार्थियों के सामने कथित तौर पर अपमानित किया जाता था। परिजनों का कहना है कि यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा, जिससे छात्रा मानसिक दबाव में थी।
सहपाठी पर बुलिंग करने का आरोप
पीड़ित पिता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी बेटी ने कुछ समय पहले आरोपी छात्र से दूरी बना ली थी और वह दूसरे विद्यार्थियों के समूह के साथ रहने लगी थी। आरोप है कि इसी बात को लेकर आरोपी छात्र नाराज था। इसके बाद कथित तौर पर छात्रा को कक्षा में अन्य बच्चों के सामने परेशान और अपमानित किया जाने लगा।
परिवार का कहना है कि जब स्कूल प्रबंधन को इस बारे में जानकारी मिली तो प्रधानाचार्य ने संबंधित छात्र को बुलाकर फटकार भी लगाई थी। इसके बावजूद परिजनों के आरोप के मुताबिक छात्रा को परेशान करने का सिलसिला पूरी तरह बंद नहीं हुआ।
मामले की जांच के दौरान छात्रा के मोबाइल फोन में मिली सामग्री को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। परिवार का दावा है कि मोबाइल में मौजूद चैट और वीडियो से यह पता चलता है कि छात्रा को स्कूल में अन्य विद्यार्थियों के सामने मानसिक रूप से परेशान किया जाता था।
घटना से कुछ दिन पहले स्कूल जाना बंद किया
परिवार के अनुसार, छात्रा ने घटना से करीब तीन दिन पहले स्कूल जाना बंद कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि घटना वाले दिन भी आरोपी छात्र ने किशोरी से फोन पर बातचीत की और उसे कथित तौर पर धमकाया।
इन घटनाओं के बाद छात्रा के पिता ने चार सितंबर को पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत में उन्होंने कुछ छात्रों और उनके समूह पर बेटी को परेशान करने का आरोप लगाया और पूरे मामले की जांच की मांग की।
पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद नौ सितंबर को मामला दर्ज किया। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्रा को कथित रूप से किस तरह परेशान किया गया और इस पूरे मामले में आरोपी छात्र के अलावा उसके परिवार के सदस्यों की क्या भूमिका रही।
पेन ड्राइव में मिला वीडियो भी जांच का हिस्सा
पीड़ित पिता ने बताया कि स्कूल के प्रधानाचार्य ने उन्हें एक पेन ड्राइव उपलब्ध कराई थी। परिवार के अनुसार, इस पेन ड्राइव में एक वीडियो मौजूद है, जिसमें आरोपी छात्र और उसके माता-पिता के बीच बातचीत दिखाई देती है।
परिजनों का दावा है कि वीडियो में आरोपी छात्र छात्रा पर उसके माता-पिता से माफी मांगने का दबाव डालता नजर आता है। परिवार ने पुलिस से इस वीडियो की भी जांच कराने और इसमें दिखाई देने वाले लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।
पिता का कहना है कि यदि छात्रा को लगातार मानसिक दबाव और बुलिंग का सामना करना पड़ रहा था, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से आरोपी छात्र के माता-पिता की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है।
चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने इस मामले में आरोपी छात्र समेत उसके परिवार के चार लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। मोबाइल फोन में मौजूद चैट, वीडियो और अन्य सामग्री की जांच के साथ-साथ स्कूल से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई जाएगी।
इसके अलावा, पुलिस छात्रा के सहपाठियों से बातचीत कर यह जानने का प्रयास करेगी कि स्कूल में उसके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता था। इस दौरान शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन के बयान भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
सहपाठियों और शिक्षकों से होगी पूछताछ
एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य के अनुसार, मामले में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। पुलिस जल्द ही छात्रा के सहपाठियों से बातचीत करेगी। इसके साथ ही शिक्षक समेत मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि छात्रा के साथ कथित बुलिंग की जानकारी स्कूल प्रबंधन को कब हुई और उस समय स्कूल की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी। यदि किसी स्तर पर शिकायत मिलने के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई, तो उस पहलू को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका अहम
इस मामले में मोबाइल फोन और पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री जांच के लिए अहम हो सकती है। चैट, वीडियो और कॉल से संबंधित उपलब्ध जानकारी से घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में पुलिस को मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी भी डिजिटल सामग्री को अंतिम साक्ष्य मानने से पहले उसकी सत्यता और संदर्भ की जांच जरूरी होगी।
वहीं, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच की जा रही है।
यह मामला स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच होने वाली बुलिंग और मानसिक दबाव को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यार्थियों में व्यवहार में अचानक बदलाव, स्कूल जाने से बचना, सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना या लगातार तनाव में रहना जैसे संकेत दिखाई दें तो अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ ध्यान देना चाहिए।
फिलहाल गाजियाबाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है। छात्रा के परिवार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, सहपाठियों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा की मौत के पीछे कथित बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना की कितनी भूमिका थी और मामले में नामजद लोगों की वास्तविक जिम्मेदारी क्या है।

