लखीमपुर खीरी में 1.80 करोड़ की डिक्री वसूली के लिए सरकारी संपत्तियों की कुर्की के आदेश

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी 

लखीमपुर खीरी। करीब दो दशक पुराने वसूली विवाद में लखीमपुर खीरी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। पंजाब टेंट हाउस बनाम उपजिला निर्वाचन अधिकारी आदि मामले में अदालत ने करीब 1.80 करोड़ रुपये की डिक्री राशि की वसूली के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय से संबंधित कुर्क योग्य चल संपत्तियों की पहचान और कुर्की की कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही दो सरकारी वाहनों के स्वामित्व का सत्यापन कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

न्यायालय का यह आदेश 9 सितंबर 2026 को पारित किया गया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। करीब 22 वर्ष पहले शुरू हुआ यह विवाद अब निष्पादन की प्रक्रिया के उस चरण में पहुंच गया है, जहां अदालत डिक्री की रकम की वसूली के लिए उपलब्ध संपत्तियों की पहचान और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर आगे बढ़ रही है।

2004 में शुरू हुआ था मूल विवाद

पत्रावली के अनुसार, इस मामले की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। मूल वाद संख्या 40/2004 में पंजाब टेंट हाउस की ओर से करीब 74,99,120 रुपये की वसूली के लिए वाद दाखिल किया गया था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 19 फरवरी 2016 को अदालत ने मामले में निर्णय पारित किया।

फैसले के तहत प्रतिवादियों को 74,99,120 रुपये की मूल धनराशि के साथ उस पर छह प्रतिशत सामान्य वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया गया था। हालांकि, निर्णय के बाद भी डिक्री की पूरी रकम का भुगतान नहीं हो सका। परिणामस्वरूप डिक्रीदार यानी पंजाब टेंट हाउस की ओर से वर्ष 2017 में निष्पादन वाद दाखिल किया गया।

इस तरह मूल वाद के फैसले के बाद भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ और डिक्री की रकम की वास्तविक वसूली के लिए न्यायालय के समक्ष लगातार कार्रवाई चलती रही।

बैंक खातों की कुर्की के बाद भी नहीं हुई पूरी वसूली

निष्पादन वाद की कार्यवाही के दौरान डिक्री की रकम की वसूली के लिए अलग-अलग स्तरों पर प्रयास किए गए। उपलब्ध पत्रावली के अनुसार, डिक्रीदार की ओर से उपलब्ध कराए गए बैंक खातों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद डिक्री की पूरी धनराशि की संतुष्टि नहीं हो सकी।

ऐसे में डिक्रीदार की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि संबंधित चल और अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार कुर्क किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर नीलामी के माध्यम से डिक्री की रकम की वसूली की जाए।

इसके बाद अदालत ने उपलब्ध विवरणों और मामले की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कुर्की योग्य संपत्तियों की पहचान करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

जिला निर्वाचन कार्यालय की चल संपत्तियों का होगा मूल्यांकन

अदालत के ताजा आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जिला निर्वाचन कार्यालय से संबंधित चल संपत्तियों को लेकर है। आदेश के अनुसार डिक्रीदार की ओर से बताई गई संपत्तियों में से ऐसी वस्तुओं को चिन्हित किया जाना है, जिन्हें कानून के अनुसार कुर्क किया जा सकता है।

इनमें कार्यालय का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य चल वस्तुएं शामिल हैं। संबंधित संपत्तियों की पहचान के बाद उनका मूल्यांकन कराया जाएगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उनकी कीमत डिक्री की बकाया राशि की वसूली में किस सीमा तक उपयोगी हो सकती है।

अदालत ने इस प्रक्रिया के लिए डिक्रीदार को आवश्यक धनराशि जमा कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसके बाद संपत्तियों की पहचान और मूल्यांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

दो सरकारी वाहनों के स्वामित्व की भी होगी जांच

न्यायालय के आदेश में दो सरकारी वाहनों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इनमें UP31 G 0682 और UP31 G 0644 नंबर के वाहन शामिल हैं।

अदालत ने संबंधित अधिकारी को दोनों वाहनों के स्वामित्व का सत्यापन कराने और उसकी रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख तक न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि संबंधित वाहन किस विभाग या प्राधिकरण के स्वामित्व में हैं और वे निष्पादन की कार्यवाही के दायरे में आते हैं या नहीं।

स्वामित्व संबंधी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अदालत इन वाहनों को लेकर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।

अचल संपत्तियों का भी रिकॉर्ड मांगा गया

मामले में केवल चल संपत्तियों की ही बात नहीं है। पत्रावली में कुछ अचल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें विकास भवन, खीरी रोड स्थित भवन और जिला निर्वाचन कार्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर का जिक्र सामने आया है।

हालांकि, अदालत के 9 सितंबर के आदेश को तत्काल अचल संपत्तियों की नीलामी का अंतिम आदेश नहीं माना जा सकता। फिलहाल न्यायालय ने संबंधित संपत्तियों के बारे में आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है।

अर्थात पहले यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन-सी संपत्ति कानूनी रूप से कुर्क किए जाने योग्य है, उसका स्वामित्व किसके पास है और उससे संबंधित अन्य आवश्यक तथ्य क्या हैं। इसके बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

करीब 1.80 करोड़ रुपये तक पहुंची देय राशि

मूल वाद में मांगी गई राशि 74,99,120 रुपये थी। वर्ष 2016 में अदालत ने इस रकम पर छह प्रतिशत सामान्य वार्षिक ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया था। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज और अन्य देयताओं के चलते अब वसूली की कुल राशि करीब 1.80 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

यही वजह है कि डिक्रीदार की ओर से अदालत में डिक्री की पूरी रकम की संतुष्टि के लिए उपलब्ध संपत्तियों की कुर्की और आवश्यकता के अनुसार नीलामी की मांग की गई है।

यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि अदालत से फैसला मिलने के बाद भी यदि डिक्री की रकम का भुगतान नहीं होता है तो संबंधित पक्ष को उसकी वसूली के लिए अलग से निष्पादन कार्यवाही करनी पड़ सकती है।

19 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक संबंधित अधिकारियों को वाहनों के स्वामित्व से जुड़ी रिपोर्ट और संपत्तियों के संबंध में आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने होंगे।

साथ ही, चल संपत्तियों की पहचान और उनके मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। इसके आधार पर अदालत यह तय करेगी कि डिक्री की रकम की वसूली के लिए आगे कौन-से कानूनी कदम उठाए जाने हैं।

गौरतलब है कि यह विवाद वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। वर्ष 2016 में पंजाब टेंट हाउस के पक्ष में डिक्री पारित होने के बावजूद करीब एक दशक बाद भी पूरी धनराशि की वसूली नहीं हो सकी है। अब अदालत द्वारा संपत्तियों की पहचान, मूल्यांकन और स्वामित्व सत्यापन के निर्देश दिए जाने के बाद मामले में वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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