लखीमपुर खीरी: कस्ता चौराहे पर छुट्टी के समय ऑटो चालकों की मनमानी, छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल
रिपोर्ट- शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी। कस्ता चौराहे पर स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। राधे रमण सोना देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज और दूसरी ओर जिला पंचायत इंटर कॉलेज में छुट्टी के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एक साथ सड़क पर निकलते हैं। ऐसे समय में चौराहे पर ऑटो चालकों के बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े करने और सवारियां बैठाने के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छुट्टी के समय चौराहे पर विद्यार्थियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इसके साथ ही राहगीरों, दोपहिया वाहनों और अन्य वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है। ऐसे में यदि सड़क के किनारे या चौराहे के आसपास ऑटो अनियोजित तरीके से खड़े हो जाएं तो वाहनों के निकलने के लिए जगह कम हो जाती है। परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
स्कूल की छुट्टी के समय बढ़ जाती है भीड़
कस्ता चौराहे की स्थिति सामान्य समय में भले ही नियंत्रित दिखाई दे, लेकिन स्कूलों की छुट्टी के समय यहां यातायात का दबाव बढ़ जाता है। दोनों शिक्षण संस्थानों से छात्र-छात्राएं बाहर निकलते हैं और अपने घर जाने के लिए अलग-अलग साधनों का इस्तेमाल करते हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थी पैदल भी चौराहे की ओर आते हैं।
इसी दौरान ऑटो चालक सवारियां लेने के लिए चौराहे और सड़क के आसपास वाहन खड़े कर देते हैं। कुछ वाहन एक-दूसरे के पीछे या आसपास खड़े होने से सड़क पर उपलब्ध स्थान कम हो जाता है। इससे पैदल चल रहे विद्यार्थियों और राहगीरों को भी आगे बढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल की छुट्टी के समय कुछ मिनटों के लिए यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है। इसलिए इस अवधि में थोड़ी सी भी लापरवाही व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
पुलिस की निगरानी के बावजूद समस्या बरकरार
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों की छुट्टी के समय पुलिसकर्मी चौराहे पर निगरानी रखते हैं। पुलिस की मौजूदगी का उद्देश्य छात्र-छात्राओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है। इसके बावजूद कुछ ऑटो चालक नियमों का पालन करने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार वाहन खड़े करते हैं।
लोगों का कहना है कि यदि निर्धारित स्थान पर ऑटो खड़े किए जाएं और चौराहे के आसपास अनावश्यक रूप से वाहन न रोके जाएं तो काफी हद तक समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा ऑटो चालकों को यह भी समझाने की जरूरत है कि स्कूल की छुट्टी के समय सड़क पर वाहन खड़ा करने से केवल यातायात ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि पैदल चलने वाले विद्यार्थियों के लिए भी परेशानी पैदा होती है।
छात्र-छात्राओं की आवाजाही के दौरान विशेष व्यवस्था की मांग
स्थानीय नागरिकों ने स्कूल की छुट्टी के समय यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस समय दोनों स्कूलों से एक साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी बाहर निकलते हैं, उस दौरान पुलिस की निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
इसके अलावा ऑटो चालकों के लिए एक निर्धारित स्थान तय किया जाना भी उपयोगी हो सकता है। यदि ऑटो को चौराहे से कुछ दूरी पर व्यवस्थित तरीके से खड़ा कराया जाए तो मुख्य सड़क पर अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ अन्य वाहन चालकों और राहगीरों को भी सुविधा मिलेगी।
बेतरतीब पार्किंग से राहगीरों को भी परेशानी
कस्ता चौराहे की समस्या केवल स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। छुट्टी के समय सड़क पर बढ़ने वाली भीड़ का असर आम राहगीरों पर भी पड़ता है। पैदल यात्रियों को सड़क के किनारे चलने में परेशानी होती है, जबकि दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
विशेष रूप से चौराहे पर यदि कई ऑटो एक साथ खड़े हो जाएं तो यातायात का प्रवाह प्रभावित होता है। ऐसे में वाहन चालकों को धीमी गति से निकलना पड़ता है और कुछ समय के लिए वाहनों की कतार भी लग सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है। इसके लिए वाहन चालकों को भी नियमों का पालन करना होगा। साथ ही संबंधित विभाग को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे नियमों का पालन कराना आसान हो।
नियमों का पालन कराने की जरूरत
नागरिकों का मानना है कि ऑटो चालकों को निर्धारित स्थान पर वाहन खड़ा करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाने चाहिए। इसके बाद भी यदि कोई चालक सड़क या चौराहे पर अनावश्यक रूप से वाहन खड़ा करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, कार्रवाई के साथ जागरूकता भी जरूरी है। ऑटो चालकों को यह बताया जाना चाहिए कि स्कूल की छुट्टी के समय यातायात का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहता है। इसलिए उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और सड़क पर ऐसा कोई स्थान नहीं घेरना चाहिए जिससे विद्यार्थियों या अन्य राहगीरों को रास्ता बदलना पड़े।
स्कूल प्रबंधन और प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी
कस्ता चौराहे की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए स्कूल प्रबंधन, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी महत्वपूर्ण हो सकता है। स्कूलों की छुट्टी के समय विद्यार्थियों के बाहर निकलने का समय पहले से निर्धारित होता है। ऐसे में उस समय के अनुसार यातायात प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है।
इसके अलावा स्कूल के आसपास वाहनों की आवाजाही और ऑटो के ठहराव के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती है। यदि जरूरत हो तो छुट्टी के समय कुछ स्थानों पर अस्थायी बैरिकेडिंग या यातायात नियंत्रण की व्यवस्था की जा सकती है। इससे वाहनों और पैदल विद्यार्थियों के बीच बेहतर दूरी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से की मांग
स्थानीय नागरिकों ने पुलिस और संबंधित विभाग से मांग की है कि कस्ता चौराहे पर स्कूलों की छुट्टी के समय यातायात व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया जाए। उनका कहना है कि चौराहे पर ऑटो चालकों की मनमानी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
लोगों ने यह भी मांग की है कि ऑटो के लिए निर्धारित पार्किंग या ठहराव स्थल तय किया जाए और स्कूलों के सामने सड़क पर अनावश्यक रूप से वाहन खड़े करने पर रोक लगाई जाए। साथ ही, छुट्टी के समय पुलिस निगरानी को प्रभावी बनाकर यातायात का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए।
व्यवस्था सुधरी तो विद्यार्थियों और राहगीरों को मिलेगी राहत
कस्ता चौराहे पर स्कूल की छुट्टी के समय यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने से सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों और आम राहगीरों को मिलेगा। इसके साथ ही वाहन चालकों को भी जाम और अनावश्यक रुकावट से राहत मिल सकती है।
दरअसल, सड़क पर यातायात व्यवस्था तभी बेहतर हो सकती है, जब सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी समझें। ऑटो चालकों को निर्धारित स्थान पर वाहन खड़ा करना होगा, जबकि पुलिस और प्रशासन को नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना होगा। वहीं, स्कूल प्रबंधन भी विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक सहयोग कर सकता है।

