व्यापारी वोट से बनेगी यूपी में सरकार, 2027 चुनाव में निर्णायक भूमिका होगी: अनूप शुक्ला
रिपोर्ट- हनुमन्त सिंह पिन्टू
कानपुर: प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश की ओर से कानपुर मर्चेंट चेंबर, सिविल लाइंस में प्रादेशिक व्यापारी महासम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे व्यापारी नेताओं और पदाधिकारियों ने व्यापारियों की समस्याओं, राजनीतिक भागीदारी और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपनी बात प्रमुखता से रखी। कार्यक्रम में प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
सम्मेलन के दौरान डॉ. अनूप शुक्ला का व्यापारियों ने माला पहनाकर, प्रतीक चिन्ह, अंग वस्त्र और स्वर्ण मुकुट भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए व्यापारी नेताओं और पदाधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग अब अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर चुप नहीं बैठेगा, बल्कि संगठित होकर अपनी आवाज मजबूती से सरकार और राजनीतिक दलों तक पहुंचाएगा।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर व्यापारियों की रणनीति
डॉ. अनूप शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश में व्यापारी वर्ग की बड़ी आबादी है और चुनावी राजनीति में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि व्यापारी न केवल मतदान करता है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में राजनीतिक दलों को व्यापारी समाज की अपेक्षाओं और समस्याओं को गंभीरता से समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान लगभग सभी राजनीतिक दल व्यापारियों से समर्थन मांगते हैं। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के मामले में उन्हें अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिलती। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में व्यापारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने का आह्वान किया।
अनूप शुक्ला ने कहा कि व्यापारी किसी एक राजनीतिक दल से बंधा हुआ नहीं है। जो राजनीतिक दल व्यापारियों को उचित राजनीतिक हिस्सेदारी, सम्मान और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा देगा, व्यापारी वर्ग उसके साथ खड़ा होने पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में व्यापारी अपने मताधिकार का इस्तेमाल अपने हितों और क्षेत्र की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए करेगा।
व्यापारियों की समस्याओं पर सम्मेलन में हुई चर्चा
महासम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए व्यापारियों ने स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं को भी उठाया। व्यापारियों का कहना था कि कारोबार चलाने के दौरान उन्हें विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। कई बार नियमों की जटिलता और विभागीय स्तर पर होने वाली जांच से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को परेशानी होती है।
सम्मेलन में पुलिस विभाग, जीएसटी, खाद्य विभाग, नगर निगम और विभिन्न प्राधिकरणों से संबंधित शिकायतों पर भी चर्चा हुई। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में चेकिंग के नाम पर अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, शिकायतों पर समय से कार्रवाई नहीं होने की समस्या भी सामने रखी गई।
व्यापारी नेताओं ने मांग की कि प्रदेश के सभी थानों में अलग से व्यापारी सेल बनाई जाए। इस सेल के माध्यम से व्यापारियों से जुड़े मामलों की सुनवाई और समाधान के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जा सकती है। साथ ही व्यापारियों की शिकायतों पर किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव के बजाय नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई।
स्टार्टअप और युवाओं के लिए ठोस कदम उठाने की मांग
महासम्मेलन में युवाओं और नए उद्यमियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की ओर से स्टार्टअप और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा की जाती है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ धरातल पर युवाओं तक प्रभावी तरीके से पहुंचना जरूरी है।
व्यापारी नेताओं ने सरकार से मांग की कि शिक्षित युवाओं को उद्योग और व्यवसाय शुरू करने के लिए विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही नए उद्यमियों को वित्तीय सहायता देने के लिए आसान और कम ब्याज वाली ऋण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। संगठन ने युवाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देने पर जोर
सम्मेलन में महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष प्रोत्साहन की मांग की गई। व्यापारियों का कहना था कि महिलाएं छोटे कारोबार से लेकर उद्योग और सेवा क्षेत्र तक लगातार आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में उन्हें कारोबार शुरू करने और उसका विस्तार करने के लिए वित्तीय तथा प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
संगठन ने महिला उद्यमियों को जीएसटी में विशेष छूट देने की मांग रखी। इसके अलावा, शिक्षित युवाओं और नए कारोबारियों के लिए निशुल्क विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था किए जाने की मांग भी की गई।
ऑनलाइन कारोबार के बढ़ते प्रभाव पर नई नीति की मांग
महासम्मेलन में ऑनलाइन शॉपिंग और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव का मुद्दा भी उठाया गया। व्यापारी नेताओं ने कहा कि छोटे और मध्यम कारोबारियों को ऑनलाइन बाजार से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नई नीति और बेहतर सहायता पैकेज की जरूरत है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग तथा ऑनलाइन बिक्री से जोड़ने के लिए प्रभावी योजनाएं बनाई जाएं। इससे पारंपरिक कारोबारियों को बदलते बाजार के अनुरूप अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में छोटे व्यापारियों के पुनर्वास की मांग
व्यापारियों ने अतिक्रमण के नाम पर हटाए गए छोटे दुकानदारों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया। संगठन की मांग है कि जिन छोटे व्यापारियों की दुकानें कार्रवाई के दौरान हटाई गई हैं, उनके लिए वैकल्पिक दुकान या उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए।
इसके अलावा, नए उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सस्ती दरों पर भूमि आवंटित करने की मांग भी की गई। व्यापारियों का कहना था कि यदि नए उद्यमियों को उचित भूमि और वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
जीएसटी और विभागीय जांच को लेकर व्यापारियों की मांग
महासम्मेलन में जीएसटी से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। व्यापारियों का कहना था कि छोटे कारोबारियों के लिए कर संबंधी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
साथ ही जीएसटी एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा जांच के दौरान व्यापारियों को होने वाली परेशानियों को दूर करने की मांग की गई। व्यापारियों ने कहा कि जांच व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके साथ कारोबारियों के सम्मान और निर्धारित नियमों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
व्यापारी पेंशन और सुरक्षा आयोग की मांग
व्यापारियों ने अपने सामाजिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापारी पेंशन लागू करने की मांग की। इसके अलावा व्यापारी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग भी सम्मेलन में रखी गई। संगठन का कहना है कि व्यापारियों की समस्याओं और सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।
व्यापारियों ने सरकारी समितियों में व्यापारियों को शामिल करने, सस्ता लाइसेंस उपलब्ध कराने और समस्याओं के समाधान के लिए सिंगल विंडो सिस्टम विकसित करने की मांग भी की।
सम्मेलन में रखी गईं 20 प्रमुख मांगें
महासम्मेलन में व्यापारियों की ओर से सरकार के सामने कुल 20 प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें व्यापारी सुरक्षा आयोग का गठन, राजनीतिक हिस्सेदारी, ऑनलाइन शॉपिंग के लिए नई नीति, युवाओं को 25 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण, निशुल्क प्रशिक्षण, अतिक्रमण से प्रभावित छोटे व्यापारियों को दुकानें, महिला उद्यमियों को जीएसटी में विशेष छूट, मंडी शुल्क समाप्त करना और सरकारी समितियों में व्यापारियों को प्रतिनिधित्व देना शामिल है।
इसके साथ ही व्यापारी पेंशन, सिंगल विंडो सिस्टम, कम ब्याज पर बैंक ऋण, जीएसटी की जटिलताओं को दूर करना, सभी थानों में व्यापारी सेल, सस्ता लाइसेंस, ब्रांडेड गल्ले को टैक्स फ्री करना और डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की गई।
व्यापारियों ने जीएसटी एवं खाद्य विभाग की चेकिंग के दौरान उत्पीड़न रोकने, उद्योग एवं व्यापार से जुड़ी बैठकों में व्यापारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने तथा नए उद्योगों के लिए सस्ती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
पदाधिकारियों ने संभाली जिम्मेदारियां
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बृजेन्द्र गुप्ता ने की। कार्यक्रम का संचालन लखनऊ जिला अध्यक्ष राहुल गुप्ता ने किया, जबकि स्वागत भाषण कानपुर जिला अध्यक्ष जेपी यादव ने दिया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में व्यापारी नेता और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

