औरैया में UGC के प्रस्तावित प्रावधानों के विरोध में सड़क पर उतरा राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा
रिपोर्ट- अंजुमन तिवारी
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में UGC के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शहर की सड़कों पर उतरे और सरकार तथा UGC के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में “UGC रोलबैक” और “काला कानून वापस लो” जैसे संदेश लिखी तख्तियां लेकर प्रस्तावित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन की शुरुआत शहर के मंडी गेट से हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी विरोध मार्च के रूप में जेसीबी चौराहे से होते हुए सदर तहसील पहुंचे। इस दौरान रास्ते में लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और UGC के प्रस्तावित प्रावधानों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस मुद्दे पर उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को संबंधित पक्षों के साथ संवाद कर समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
UGC के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर विरोध
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि UGC के प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर उनके बीच असंतोष है। संगठन का दावा है कि इन प्रावधानों का प्रभाव सामाजिक और शैक्षणिक अवसरों से जुड़े विभिन्न वर्गों पर पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन की ओर से विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और UGC से प्रस्तावित प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की। साथ ही उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की भी मांग उठाई। उनका कहना है कि सभी वर्गों को न्याय, समान अवसर और निष्पक्ष व्यवस्था मिलनी चाहिए।
हालांकि, UGC से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय हो सकती है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोप और उनकी मांगें उनके पक्ष के रूप में ही देखी जानी चाहिए।
जिलाध्यक्ष विमल पांडे ने आंदोलन जारी रखने की बात कही
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के जिलाध्यक्ष और अधिवक्ता विमल पांडे ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि UGC के प्रस्तावित प्रावधानों के विरोध में संगठन लगातार अपनी आवाज उठा रहा है। उन्होंने कहा कि औरैया से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
विमल पांडे के मुताबिक, संगठन की मांग है कि प्रस्तावित प्रावधानों को जल्द से जल्द वापस लिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों के जरिए समाज में शोषित और शोषक जैसे वर्गों की धारणा बनाई जा रही है, जिसे सामान्य वर्ग स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि संगठन आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने SC-ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग भी रखी। उनके अनुसार, यदि संगठन की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
मंडी गेट से सदर तहसील तक निकला विरोध मार्च
प्रदर्शन के दौरान शहर में विरोध मार्च निकाला गया। मंडी गेट से शुरू हुए इस मार्च में संगठन के पदाधिकारी और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शनकारी हाथों में विभिन्न संदेशों वाली तख्तियां लिए हुए थे। इनमें “UGC रोलबैक” और “काला कानून वापस लो” जैसे नारे प्रमुख रहे।
जेसीबी चौराहे से गुजरते हुए प्रदर्शनकारी सदर तहसील पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना है।
इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि शिक्षा, आरक्षण और सामाजिक अवसरों से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी नीति या प्रावधान को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।
महिला प्रदर्शनकारी ने भी उठाई समान अवसर की मांग
प्रदर्शन में महिलाओं की भी भागीदारी रही। प्रदर्शनकारी प्रीति त्रिपाठी ने सरकार से UGC के प्रस्तावित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के लोगों को भी न्याय और समान अवसर मिलना चाहिए।
प्रीति त्रिपाठी का कहना था कि सामान्य वर्ग को शोषक मानना उचित नहीं है। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके मुताबिक, समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें लोगों को समान अवसर प्राप्त हो सकें।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए और संबंधित पक्षों की चिंताओं को सुना जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा भी शामिल रही। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर समय-समय पर समीक्षा और व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
उनका तर्क है कि बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी वर्गों के लिए अवसरों और अधिकारों को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस विषय पर पारदर्शी संवाद की मांग की।
हालांकि, आरक्षण व्यवस्था देश में लंबे समय से सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व से जुड़ा संवेदनशील विषय रही है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी बदलाव पर व्यापक संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक विमर्श आवश्यक होता है।
आंदोलन को व्यापक करने की चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किए जाने की स्थिति में आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। संगठन ने संकेत दिया कि आने वाले समय में अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शन किए जा सकते हैं।

