अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026: 88% पहुंची वैश्विक साक्षरता दर, फिर भी 739 मिलियन लोग बुनियादी शिक्षा से दूर
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: हर वर्ष 8 सितंबर को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता के महत्व को रेखांकित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, समान अवसर, सामाजिक भागीदारी और बेहतर भविष्य के निर्माण में साक्षरता की भूमिका को सामने लाने का अवसर भी देता है। वर्ष 2026 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस अपने 60वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। UNESCO के अनुसार, इस वर्ष का वैश्विक आयोजन 8 और 9 सितंबर को मेक्सिको के चियापास में आयोजित किया जा रहा है।
वैश्विक साक्षरता दर 88 प्रतिशत के करीब
दुनिया ने पिछले कई दशकों में साक्षरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। UNESCO के 2026 के शिक्षा आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में वयस्क साक्षरता दर करीब 88 प्रतिशत है। वहीं युवाओं में वैश्विक साक्षरता दर लगभग 93 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह उपलब्धि बताती है कि शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए किए गए वैश्विक प्रयासों का सकारात्मक असर हुआ है।
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू अभी भी चिंता पैदा करता है। UNESCO के मुताबिक, वर्ष 2024 के आंकड़ों के आधार पर दुनिया में कम से कम 739 मिलियन युवा और वयस्क ऐसे हैं, जिनके पास बुनियादी साक्षरता कौशल नहीं है। इनमें लगभग दो-तिहाई महिलाएं हैं। इसका अर्थ है कि करोड़ों लोग आज भी सामान्य पाठ पढ़ने, लिखने और रोजमर्रा की जरूरी जानकारी को समझने में कठिनाई का सामना करते हैं।
2026 में 60वीं वर्षगांठ, खास है इस बार का आयोजन
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुरुआत UNESCO की पहल के बाद हुई थी। वर्ष 1966 में UNESCO के 14वें महासम्मेलन में इस दिवस की घोषणा की गई थी और 1967 से 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इसलिए 2026 का वर्ष इस दिवस की 60वीं वर्षगांठ के कारण विशेष महत्व रखता है।
इस वर्ष UNESCO ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के लिए “Literacy for people, the planet and prosperity”, यानी “लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता” थीम निर्धारित की है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि साक्षरता केवल व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज, पर्यावरण और आर्थिक प्रगति से भी जुड़ी हुई है।
739 मिलियन लोगों के सामने बड़ी चुनौती
साक्षरता के क्षेत्र में हुई प्रगति के बावजूद दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाना है, जो अभी भी बुनियादी पढ़ने-लिखने के कौशल से दूर हैं। UNESCO के अनुसार, 739 मिलियन युवा और वयस्क अभी भी बुनियादी साक्षरता कौशल हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में 10 में से लगभग 4 बच्चे पढ़ने में न्यूनतम दक्षता स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। गरीबी, स्कूलों तक सीमित पहुंच, सामाजिक और लैंगिक असमानता, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों की कमी और बच्चों का समय से पहले पढ़ाई छोड़ देना इनमें प्रमुख हैं। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में बच्चों को ऐसी भाषा में शिक्षा नहीं मिलती, जिसे वे आसानी से समझ सकें। इसलिए अब केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।
महिलाओं की साक्षरता पर विशेष जोर
साक्षरता के क्षेत्र में लैंगिक असमानता भी एक बड़ी चुनौती है। UNESCO के अनुसार, बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित 739 मिलियन वयस्कों में करीब दो-तिहाई महिलाएं हैं। इसलिए महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा से जोड़ना वैश्विक साक्षरता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दरअसल, एक महिला के शिक्षित होने का प्रभाव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। शिक्षित महिलाएं अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े फैसलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। साथ ही, शिक्षा उन्हें रोजगार और आर्थिक अवसरों तक पहुंच बनाने में भी मदद करती है। इसीलिए महिला साक्षरता को गरीबी कम करने और सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जाता है।
डिजिटल युग में साक्षरता का बदलता अर्थ
आज के दौर में साक्षरता की परिभाषा भी लगातार बदल रही है। पहले पढ़ना, लिखना और सामान्य जानकारी समझना साक्षरता का मुख्य आधार माना जाता था। लेकिन डिजिटल युग में इंटरनेट, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के कारण डिजिटल साक्षरता भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
अब लोगों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी में सही और गलत का अंतर कैसे पहचाना जाए। इसी वजह से डिजिटल और मीडिया साक्षरता को शिक्षा के व्यापक एजेंडे में शामिल करने पर जोर बढ़ रहा है। UNESCO भी बदलती तकनीकी दुनिया में साक्षरता की नई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसके दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
बच्चों की पढ़ने की क्षमता भी बड़ी चिंता
वयस्क साक्षरता के साथ-साथ बच्चों में पढ़ने की बुनियादी क्षमता भी वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है। UNESCO के अनुसार, दुनिया भर में चार में से एक नहीं बल्कि लगभग 10 में से 4 बच्चे न्यूनतम पढ़ने की दक्षता हासिल नहीं कर पा रहे हैं, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
इसलिए शिक्षा व्यवस्था में शुरुआती कक्षाओं से ही पढ़ने की मजबूत नींव तैयार करना जरूरी है। बच्चे यदि शुरुआती वर्षों में पढ़ने और समझने की क्षमता विकसित नहीं कर पाते, तो आगे चलकर अन्य विषयों को सीखने में भी कठिनाई हो सकती है। ऐसे में शिक्षकों का प्रशिक्षण, स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण सामग्री और परिवार की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
साक्षरता से बढ़ते हैं रोजगार के अवसर
साक्षरता का सीधा संबंध व्यक्ति की आर्थिक स्थिति से भी है। पढ़ने-लिखने की क्षमता बेहतर होने पर व्यक्ति नौकरी, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य आर्थिक अवसरों का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से उठा सकता है। UNESCO भी साक्षरता को रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ता है।
इसके अलावा, डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ बैंकिंग, ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए भी न्यूनतम डिजिटल समझ जरूरी हो गई है। इसलिए भविष्य में साक्षरता अभियान को पारंपरिक शिक्षा के साथ डिजिटल कौशल से जोड़ना और भी महत्वपूर्ण होगा।
मेक्सिको में हो रहा वैश्विक आयोजन
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026 का वैश्विक समारोह UNESCO और मेक्सिको सरकार के सहयोग से 8 और 9 सितंबर को मेक्सिको के चियापास में आयोजित किया जा रहा है। इसमें शिक्षा मंत्री, विशेषज्ञ, शिक्षक, विद्यार्थी और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में UNESCO International Literacy Prizes भी प्रदान किए जाएंगे, जिनके जरिए दुनिया भर के उल्लेखनीय साक्षरता कार्यक्रमों को सम्मानित किया जाएगा।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल उपलब्धियों को गिनाना नहीं है। बल्कि इसके जरिए उन चुनौतियों पर भी चर्चा की जा रही है, जो आने वाले वर्षों में साक्षरता के क्षेत्र में सामने आएंगी। साथ ही, बेहतर नीतियों, प्रभावी कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए साक्षरता को सभी तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
भारत के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश
भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में साक्षरता का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। देश में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि बच्चों और वयस्कों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और शिक्षा से वंचित समुदायों तक सीखने के अवसर पहुंचाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
इसके साथ ही, बदलते डिजिटल दौर में बच्चों और वयस्कों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सिखाना भी जरूरी है। इस प्रकार साक्षरता को पढ़ने-लिखने से आगे बढ़ाकर जीवन कौशल, डिजिटल समझ और रोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता बन गया है।
साक्षरता सिर्फ शिक्षा नहीं, बेहतर समाज की नींव
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2026 यह याद दिलाता है कि दुनिया ने साक्षरता के क्षेत्र में लंबी यात्रा तय की है, लेकिन मंजिल अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुई है। 88 प्रतिशत वयस्क साक्षरता दर एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन 739 मिलियन लोगों का अभी भी बुनियादी साक्षरता कौशल से दूर होना बताता है कि प्रयासों को और तेज करने की जरूरत है।
अंततः, साक्षरता केवल अक्षरों को पहचानने या शब्द लिखने की क्षमता नहीं है। यह व्यक्ति को अपने अधिकार समझने, अवसरों का लाभ उठाने और समाज में सक्रिय भागीदारी करने का आत्मविश्वास देती है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का संदेश स्पष्ट है। ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया जाए, जिसमें कोई भी व्यक्ति पढ़ने, सीखने और आगे बढ़ने के अवसर से वंचित न रहे।

