दिल्ली हॉस्टल हादसे में दिबियापुर के पवन की मौत, घर पहुंचा शव तो मचा कोहराम – राखी लेकर बिखर पड़ी चारों बहनें

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रिपोर्ट – अंजुमन तिवारी 

औरैया: रक्षाबंधन पर जिस इकलौते भाई की कलाई पर चार बहनों ने राखी बांधी थी, कुछ ही दिनों बाद उसी भाई का शव जब घर पहुंचा तो परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। दिबियापुर के कैलाश बाग, बाबू दयाराम नगर निवासी पवन कुमार की दिल्ली में हुए हॉस्टल हादसे में मौत हो गई। सोमवार देर रात पोस्टमार्टम के बाद पवन का शव जब घर पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। चारों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, वहीं मां बेटे का चेहरा देखकर बार-बार बेसुध होती रहीं।

पवन कुमार रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह के इकलौते बेटे थे। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे थे। बेहतर शिक्षा और भविष्य का सपना लेकर पवन करीब दो महीने पहले ही दिल्ली गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अच्छी नौकरी हासिल कर अपने भविष्य को बेहतर बनाएंगे। हालांकि, दिल्ली में हुए हादसे ने परिवार के इन सपनों को गहरे दुख में बदल दिया।

चार बहनों के इकलौते भाई थे पवन

पवन अपने परिवार में चार बहनों के इकलौते भाई थे। रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी थी। उस समय परिवार में खुशी का माहौल था। किसी ने नहीं सोचा था कि यह मुलाकात आने वाले दिनों में उनकी आखिरी याद बन जाएगी।

परिवार के साथ जन्माष्टमी मनाने के बाद पवन शनिवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। इसके अगले दिन रविवार को सत्य निकेतन इलाके में स्थित पांच मंजिला भवन हादसे का शिकार हो गया। बताया गया कि पवन भी उसी भवन में रह रहे थे और हादसे के दौरान मलबे में दब गए। घटना के बाद परिवार को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उनकी चिंता बढ़ गई।

बहन प्रियांशी ने मौके पर पहुंचकर भाई को तलाशा

पवन की बहन प्रियांशी भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं और गर्ल्स हॉस्टल में रहती हैं। हादसे की जानकारी मिलने के बाद वह तत्काल मौके पर पहुंचीं। उन्होंने काफी देर तक अपने भाई की तलाश की। परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन रहा।

बाद में पवन की मौत की जानकारी परिवार को मिली। सूचना मिलते ही पिता विशंभर सिंह अपनी बेटी के साथ दिल्ली पहुंचे। वहां आवश्यक कार्रवाई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद सोमवार देर रात पवन का शव दिबियापुर स्थित उनके घर लाया गया।

शव पहुंचते ही घर में पसरा मातम

पवन का शव घर पहुंचते ही परिवार में मातम छा गया। चारों बहनें अपने भाई को याद कर फूट-फूटकर रोने लगीं। कोई भाई के चेहरे को निहारती रही तो कोई शव से लिपटकर उसे पुकारती रही। मां बेटे का चेहरा देखकर बार-बार बेसुध होती रहीं। वहीं पिता अपने इकलौते बेटे को खोने के सदमे में टूट गए।

घर पर मौजूद आसपास के लोगों ने परिवार को संभालने की कोशिश की। इस दौरान पूरे इलाके में शोक का माहौल रहा। जिस घर में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की खुशियां थीं, वहां अब पवन की यादें और परिवार का दुख दिखाई दे रहा था।

20 जुलाई को हुआ था दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला

परिजनों के अनुसार पवन ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दिबियापुर से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया। बीते 20 जुलाई को ही उनका दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम में दाखिला हुआ था।

पवन पढ़ाई में आगे बढ़कर अपना करियर बनाने का सपना देख रहे थे। परिवार को भी उनसे काफी उम्मीदें थीं। दिल्ली जाने के बाद वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहे थे। लेकिन महज दो महीने के भीतर हुए हादसे ने उनके भविष्य की सभी योजनाओं को रोक दिया।

हादसे के कारणों की जांच पर भी नजर

बताया गया है कि पवन सत्य निकेतन इलाके में जिस पांच मंजिला भवन में रह रहे थे, वहां कथित तौर पर अवैध बेसमेंट से जुड़ी स्थिति को हादसे के कारणों में बताया जा रहा है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित स्तर पर जांच महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में भवन की संरचना, निर्माण संबंधी अनुमति और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाती है।

हादसे ने कई परिवारों को प्रभावित किया है। इनमें दिबियापुर के पवन कुमार का परिवार भी शामिल है, जिसने अपना इकलौता बेटा खो दिया। परिवार के लिए यह नुकसान इसलिए भी गहरा है क्योंकि पवन अपने करियर की शुरुआत ही कर रहे थे।

दिल्ली से जुड़ी याद अब बनी परिवार के लिए दर्द

पवन की बड़ी बहन प्रियांशी भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं। इसी वजह से परिवार का दिल्ली से पहले से जुड़ाव था। पवन भी उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि दोनों भाई-बहन अपने सपनों को पूरा करेंगे और भविष्य में परिवार का नाम रोशन करेंगे।

लेकिन अब दिल्ली से जुड़ी सबसे बड़ी याद पवन की मौत बन गई है। रक्षाबंधन पर जिस भाई की कलाई पर बहनों ने प्यार और विश्वास के साथ राखी बांधी थी, आज उसी भाई की तस्वीर के सामने बैठकर वे आंसू बहा रही हैं।

पवन के निधन से परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया है, जबकि चार बहनों ने अपना भाई हमेशा के लिए खो दिया। यह हादसा परिवार के लिए ऐसा दुख छोड़ गया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। अब परिजन पवन की यादों के सहारे आगे का जीवन बिताने को मजबूर हैं।

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