वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम से सीमावर्ती गांवों को मिल रही नई पहचान, विकास के साथ मजबूत हो रही सीमा सुरक्षा
Digital UP News Desk
नई दिल्लीः भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े गांव अब केवल देश के अंतिम छोर पर स्थित बस्तियां नहीं रह गए हैं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास की रणनीति में महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य के साथ केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम (VVP) को आगे बढ़ाया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
दरअसल, लंबे समय से दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर संपर्क व्यवस्था और सीमित आर्थिक अवसरों के कारण कई सीमावर्ती गांवों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। इसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों से लोगों का पलायन भी हुआ। ऐसे में VVP का उद्देश्य इन गांवों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करना है।
सीमावर्ती गांवों को बनाया जा रहा ‘पहला गांव’
भारत सात पड़ोसी देशों के साथ 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा साझा करता है। इनमें बांग्लादेश के साथ 4,096.7 किलोमीटर, चीन के साथ 3,488 किलोमीटर और पाकिस्तान के साथ 3,323 किलोमीटर की सीमा शामिल है। इसके अलावा नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान के साथ भी भारत की स्थलीय सीमाएं हैं।
ऐसे व्यापक सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों की भूमिका केवल स्थानीय विकास तक सीमित नहीं है। वे सीमा सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सरकार ने सीमावर्ती गांवों को ‘देश के अंतिम गांव’ के बजाय ‘पहले गांव’ के रूप में विकसित करने की सोच अपनाई है।
इसी क्रम में वर्ष 2023 में वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम शुरू किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को बेहतर बुनियादी ढांचे, आवश्यक सेवाओं और आजीविका के साधनों से जोड़ना है। साथ ही, मजबूत और आत्मनिर्भर समुदायों के निर्माण के माध्यम से सीमा क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और विकसित बनाना भी इसका महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
दो चरणों में आगे बढ़ रहा VVP
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। VVP-I मुख्य रूप से उत्तरी सीमा से लगे गांवों पर केंद्रित है, जबकि VVP-II का विस्तार अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं तक किया गया है।
दोनों चरणों का संयुक्त परिव्यय 11,639 करोड़ रुपये है और इनके माध्यम से 2,616 से अधिक गांवों को व्यापक विकास के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि दोनों चरणों की प्रशासनिक संरचना अलग है, लेकिन उनका मूल उद्देश्य एक ही है—सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर जीवन, स्थानीय रोजगार और मजबूत सामुदायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना।
VVP-I से उत्तरी सीमा को मिल रही मजबूती
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम के पहले चरण की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी। इसे 10 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले के किबिथू में लॉन्च किया गया।
VVP-I के तहत अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के 19 जिलों में उत्तरी सीमा से लगे 46 ब्लॉकों के गांवों की पहचान की गई। इनमें लगभग 1.42 लाख आबादी वाले 662 रणनीतिक गांवों को व्यापक विकास के लिए प्राथमिकता दी गई।
इस चरण के लिए 2022-23 से 2026-27 तक 4,800 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया था। इसमें से 2,500 करोड़ रुपये सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए निर्धारित किए गए।
कार्यक्रम के तहत सभी मौसम में उपयोगी सड़कें, पेयजल, भरोसेमंद बिजली, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षा सुविधाएं तथा पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्र और स्थानीय आजीविका से जुड़ी गतिविधियां भी विकसित की जा रही हैं।
VVP-II से पूरे स्थलीय सीमा क्षेत्र तक विस्तार
VVP-II को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 अप्रैल 2025 को मंजूरी दी। यह चरण पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और गृह मंत्रालय के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसे 20 फरवरी 2026 को असम के कछार जिले के नाथनपुर गांव से औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया।
इस चरण के लिए 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है। इसके तहत 15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 334 ब्लॉकों में 1,954 गांवों को व्यापक विकास के लिए चिह्नित किया गया है।
VVP-II में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, दूरसंचार, स्मार्ट क्लासरूम, पर्यटन सर्किट, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सड़क और पुलों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
सीमावर्ती गांवों के विकास में सड़क संपर्क सबसे महत्वपूर्ण आधार है। VVP-I के तहत 2,481.93 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 111 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से 134 ऐसे गांवों को जोड़ने का लक्ष्य है, जहां पहले सड़क संपर्क उपलब्ध नहीं था।
इसके साथ ही 35 लंबे दूरी वाले पुलों को भी मंजूरी दी गई है। बेहतर सड़क और पुल व्यवस्था से ग्रामीणों को बाजार, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षण संस्थानों और अन्य सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर विशेष जोर
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम में पर्यटन को स्थानीय आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनाने पर भी जोर दिया गया है। VVP-I के तहत 145 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 327 पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं में व्यूप्वाइंट, साहसिक पर्यटन, इको-टूरिज्म, इको-रिसॉर्ट, ट्रेक रूट और पर्यटक केंद्र जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे स्थानीय युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
इसी तरह सामाजिक उद्यमिता, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण तथा ‘वन ब्लॉक-वन प्रोडक्ट’ जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जुलाई 2026 तक हजारों गतिविधियां
कार्यक्रम के जमीनी प्रभाव की बात करें तो जुलाई 2026 तक गृह मंत्रालय ने 3,020.32 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 1,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की ओर से 1,655 अतिरिक्त परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 953.47 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और 283 परियोजनाओं के पूरा होने की सूचना दी गई है।
वहीं, 31 जुलाई 2026 तक 8,800 से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा शिविर, सेवा वितरण कार्यक्रम और कौशल प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
अरुणाचल प्रदेश में 2,990, लद्दाख में 2,221, उत्तराखंड में 2,038, हिमाचल प्रदेश में 1,037 और सिक्किम में 530 गतिविधियां दर्ज की गईं।
विकास के साथ सुरक्षा को भी मजबूती
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम का प्रभाव केवल सड़क या भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत और आत्मनिर्भर समुदाय तैयार करना भी है।
जब गांवों में बेहतर सड़क, संचार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो लोगों के लिए अपने गांव में रहने के अवसर बढ़ते हैं। परिणामस्वरूप सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी को बनाए रखने और कुछ स्थानों पर रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।
इसके अलावा स्थानीय सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सीमा सुरक्षा बलों द्वारा स्थानीय स्तर पर दूध, सब्जियां, अंडे और अनाज जैसी वस्तुओं की खरीद से ग्रामीण उत्पादकों को स्थानीय बाजार भी मिल सकता है।
योजनाओं के अभिसरण से तेज होगा विकास
VVP के तहत गांव कार्य योजनाओं के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है। विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं को एक साथ लाकर पात्र परिवारों तक सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित अन्य सरकारी कार्यक्रमों के साथ समन्वय से सीमावर्ती गांवों में विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, गृह मंत्रालय राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और सीमा सुरक्षा बलों के साथ मिलकर योजना के क्रियान्वयन को आगे बढ़ा रहा है।

