कानपुर के स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, शक्ति संवाद में साझा किए सफलता के अनुभव

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी 

कानपुर । महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार को कानपुर नगर स्थित सर्किट हाउस में राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान की अध्यक्षता में शक्ति संवाद एवं कन्या जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपने संघर्ष, अनुभव तथा सफलता की कहानियां साझा कीं।

कार्यक्रम में उन्नति स्वयं सहायता समूह, जयशंकर, मां विंध्यवासिनी, शंकर, जय मां लक्ष्मी और विकास महिला स्वयं सहायता समूह समेत विभिन्न समूहों से जुड़ी महिलाएं उपस्थित रहीं। इसके अलावा परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, जिला प्रोबेशन अधिकारी, प्रमुख अधीक्षिका डफरिन चिकित्सालय, वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

महिलाओं ने साझा किए आत्मनिर्भर बनने के अनुभव

शक्ति संवाद कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष महिलाओं और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के बीच सीधा संवाद रहा। इस दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं। पहले जहां वे घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वहीं अब वे स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।

कल्याणपुर विकासखंड की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सीआईएफ और सीसीएल के माध्यम से आर्थिक सहायता मिली। इस सहायता का उपयोग उन्होंने स्वरोजगार शुरू करने के लिए किया।

महिलाओं ने बताया कि आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने दोना-पत्तल बनाने की मशीन और दो भैंस खरीदीं। इसके माध्यम से उन्होंने अपनी आय का साधन विकसित किया और धीरे-धीरे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ीं। वर्तमान में वे प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

इसके परिणामस्वरूप अब वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी सहयोग कर रही हैं। इतना ही नहीं, उनकी आय का सकारात्मक असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है। महिलाओं ने बताया कि उनके एक बच्चे द्वारा एमबीए और दूसरे बच्चे द्वारा फार्मेसी की शिक्षा प्राप्त की जा रही है।

घर की चारदीवारी से स्वरोजगार तक का सफर

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने संवाद के दौरान कहा कि समूह में शामिल होने से पहले उनका जीवन मुख्य रूप से घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित था। वे किसी नियमित आर्थिक गतिविधि से नहीं जुड़ी थीं। हालांकि, आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर मिला।

धीरे-धीरे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपनी क्षमता को पहचानना शुरू किया। परिणामस्वरूप अब वे अपने हुनर और मेहनत के आधार पर स्वरोजगार कर रही हैं।

महिलाओं के अनुसार, स्वयं सहायता समूह ने उन्हें केवल आय का माध्यम ही नहीं दिया, बल्कि समाज में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी दिया है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के कारण अब वे परिवार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में अपनी भूमिका निभा रही हैं।

इस तरह स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन रहे हैं।

पूनम, ज्योति और नेहा ने भी बताए अनुभव

कार्यक्रम में पूनम, ज्योति और नेहा सहित अन्य महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

महिलाओं ने कहा कि स्वरोजगार से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। साथ ही समाज में उनके प्रति सम्मान और पहचान भी बढ़ी है। अब वे स्वयं अपने कार्यों को लेकर निर्णय लेने में अधिक सक्षम महसूस करती हैं।

वहीं, संवाद के दौरान यह भी सामने आया कि जब महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण का अवसर मिलता है तो वे अपनी मेहनत से परिवार और समाज दोनों के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

16 लाभार्थियों को वितरित की गईं बेबी किट

कार्यक्रम के दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत 16 लाभार्थी महिलाओं को बेबी किट उपलब्ध कराई गईं। उर्सला अस्पताल की विंग द्वारा उपलब्ध कराई गई इन बेबी किट का वितरण राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने किया।

इस अवसर पर बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और उनके सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया।

कन्या जन्मोत्सव के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि बेटियां परिवार और समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इसलिए उनके जन्म से लेकर शिक्षा और भविष्य निर्माण तक उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।

डॉ. बबिता सिंह चौहान ने महिलाओं का बढ़ाया उत्साह

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों और उनकी सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे सरकार की विभिन्न योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। साथ ही अपने हुनर को पहचानकर उसे रोजगार और आय के साधन में बदलने के लिए निरंतर प्रयास करें।

डॉ. चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं में केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता ही नहीं आती, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास, स्वावलंबन और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है।

उन्होंने कहा कि जब महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है तो परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उसकी भागीदारी भी बढ़ती है। इसके साथ ही समाज में उसकी सम्मानजनक और सशक्त पहचान स्थापित होती है।

बच्चों की शिक्षा में भी निभा रही हैं महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में सामने आई महिलाओं की सफलता की कहानियां यह बताती हैं कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा अर्जित आय से जहां घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं, वहीं बच्चों की शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। एमबीए और फार्मेसी जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों का उदाहरण इस बदलाव को दर्शाता है।

इसलिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर उपलब्ध कराना आने वाली पीढ़ी के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक पहल

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करना रहा। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

शक्ति संवाद में महिलाओं की भागीदारी और उनकी सफलता की कहानियों ने यह स्पष्ट किया कि अवसर मिलने पर महिलाएं अपनी मेहनत और क्षमता के दम पर नए रास्ते बना सकती हैं।

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