ECLGS 5.0: MSME को मिलेगा 2.55 लाख करोड़ तक अतिरिक्त कर्ज, जानिए योजना की पूरी जानकारी
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: बाहरी आर्थिक झटकों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कारोबार को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को लागू किया है। इस योजना का उद्देश्य पात्र कारोबारियों, MSME और चुनिंदा गैर-MSME व्यवसायों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी कारोबारी गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रख सकें।
सरकार के अनुसार, ECLGS 5.0 के तहत पात्र ऋणदाताओं को सरकार समर्थित क्रेडिट गारंटी दी जाती है। इसके माध्यम से बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए ऋण देने का जोखिम कम होता है और कारोबारियों तक अतिरिक्त फंड पहुंचाना आसान बनता है। योजना का लक्ष्य 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सुगम बनाना है।
5 मई 2026 को मिली योजना को मंजूरी
सरकार ने भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और उनसे पैदा होने वाले संभावित आर्थिक दबावों को देखते हुए 5 मई 2026 को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी। आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी और कार्यशील पूंजी पर दबाव जैसी चुनौतियों के बीच यह योजना कारोबारियों के लिए वित्तीय सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
योजना का क्रियान्वयन नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) द्वारा किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पात्र उधारकर्ताओं को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है। इससे कारोबारियों को अल्पकालिक वित्तीय जरूरतें पूरी करने, कर्मचारियों के रोजगार को बनाए रखने और उत्पादन गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिल सकती है।
कोविड काल से शुरू हुई ECLGS की यात्रा
ECLGS की शुरुआत वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत हुई थी। उस समय कोविड-19 महामारी के कारण बड़ी संख्या में कारोबारियों के सामने नकदी और ऋण संबंधी चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। ऐसे समय में सरकार ने बैंकों को 100 प्रतिशत सरकार समर्थित गारंटी के आधार पर अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की।
इसके बाद अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार योजना के कई चरण लागू किए गए।
ECLGS 1.0 में MSME, कारोबारी उद्यम, मुद्रा ऋण लेने वाले और व्यक्तिगत कारोबारी ऋण लेने वाले शामिल थे।
इसके बाद ECLGS 2.0 का दायरा बढ़ाकर कामथ समिति द्वारा पहचाने गए 26 संकटग्रस्त क्षेत्रों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को शामिल किया गया।
वहीं, ECLGS 3.0 के तहत हॉस्पिटैलिटी, यात्रा एवं पर्यटन, अवकाश एवं खेल तथा नागरिक उड्डयन क्षेत्रों को सहायता दी गई।
इसके बाद ECLGS 4.0 का मुख्य फोकस कोविड काल में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने पर रहा। अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, मेडिकल कॉलेज और ऑक्सीजन से जुड़े उपकरणों के निर्माता इसके दायरे में आए।
कुल मिलाकर ECLGS 1.0 से 4.0 के तहत 3.68 लाख करोड़ रुपये की 1.19 करोड़ गारंटियां जारी की गईं। इन चरणों की योजना अवधि 31 मार्च 2023 को समाप्त हो गई।
ECLGS 5.0 कब तक लागू रहेगी?
ECLGS 5.0 31 मार्च 2027 तक या 2.55 लाख करोड़ रुपये की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगी।
योजना में MSME, पात्र गैर-MSME कारोबारी उधारकर्ता और अनुसूचित यात्री एयरलाइंस को शामिल किया गया है। हालांकि, सभी आवेदकों को NCGTC की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।
ऋण सहायता अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पात्र NBFC के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
MSME को कितना अतिरिक्त ऋण मिलेगा?
ECLGS 5.0 के तहत पात्र MSME और गैर-MSME कारोबारियों को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। यह ऋण वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के दौरान सबसे अधिक फंड आधारित कार्यशील पूंजी बकाया के 20 प्रतिशत तक हो सकता है।
प्रति उधारकर्ता इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
इसके अलावा, पात्र MSME को दिए जाने वाले ऋण पर 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध है। पात्र गैर-MSME के लिए गारंटी कवरेज 90 प्रतिशत है।
खास बात यह है कि इस योजना के तहत MSME को कोई गारंटी शुल्क नहीं देना होगा।
किन कारोबारियों को मिलेगा लाभ?
योजना के तहत वे उधारकर्ता पात्र हो सकते हैं, जिनके पास 31 मार्च 2026 तक सदस्य ऋणदाता संस्थानों के साथ मौजूदा कार्यशील पूंजी सुविधाएं थीं। इसके साथ ही उनके ऋण खाते में 60 दिनों से अधिक का बकाया नहीं होना चाहिए।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों को गैर-MSME श्रेणी में योजना से बाहर रखा गया है। इनमें NBFC, बिजली उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, दूरसंचार सेवा प्रदाता, चीनी और एथेनॉल, IT कंपनियां, कागज एवं कागज उत्पाद, शैक्षणिक संस्थान, कुछ पेय पदार्थ और तंबाकू क्षेत्र शामिल हैं।
यदि कोई कारोबारी पात्र और गैर-पात्र दोनों क्षेत्रों में काम करता है, तो उसकी पात्रता वित्त वर्ष 2025-26 में पात्र क्षेत्रों से प्राप्त टर्नओवर के अनुपात के आधार पर निर्धारित की जा सकती है।
ब्याज दर और ऋण अवधि क्या है?
ECLGS 5.0 के तहत ऋण निर्धारित बेंचमार्क से जुड़ी ब्याज दरों पर उपलब्ध होगा। MSME के लिए ब्याज दर EBLR से जुड़ी होगी, जबकि पात्र गैर-MSME के लिए MCLR आधारित व्यवस्था लागू होगी।
ऋणदाता संस्थान बेंचमार्क से अधिकतम 0.75 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क ले सकते हैं। हालांकि, कुल ब्याज दर 9 प्रतिशत सालाना की सीमा के अधीन होगी। पात्र NBFC द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर 13 प्रतिशत सालाना से अधिक नहीं होगी।
ऋण की अवधि पहले वितरण की तारीख से 5 वर्ष होगी। इसमें एक वर्ष की मोरेटोरियम अवधि भी शामिल होगी।
एयरलाइंस के लिए अलग प्रावधान
ECLGS 5.0 में अनुसूचित यात्री एयरलाइंस को भी शामिल किया गया है। पात्र एयरलाइंस को अतिरिक्त ऋण पर 90 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध है।
ऐसी एयरलाइंस को पात्रता शर्तों के अनुसार अपने मौजूदा ऋण के आधार पर अतिरिक्त ऋण मिल सकता है। इसकी अधिकतम सीमा 1,500 करोड़ रुपये प्रति उधारकर्ता रखी गई है।
हालांकि, 1,000 करोड़ रुपये से अधिक और 1,500 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त राशि के लिए प्रमोटरों या मालिकों का आनुपातिक इक्विटी योगदान आवश्यक होगा।
एयरलाइंस के लिए ऋण अवधि पहले वितरण की तारीख से 7 वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की मोरेटोरियम अवधि शामिल है।
20 अगस्त तक 6.73 लाख से अधिक गारंटियां जारी
ECLGS 5.0 के तहत शुरुआती महीनों में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त 2026 तक 6,73,979 गारंटियां जारी की जा चुकी थीं। इन गारंटियों के तहत कुल राशि 2,50,024 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कुल गारंटियों की संख्या के आधार पर MSME की हिस्सेदारी 97.3 प्रतिशत रही। वहीं, कुल गारंटीशुदा राशि में MSME की हिस्सेदारी 80.79 प्रतिशत रही।
इसके साथ ही योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर आउटरीच अभियान भी चलाए गए हैं। पहले चरण में 20 मई से 6 जून 2026 के बीच नौ स्थानों पर अभियान आयोजित किए गए। इनमें राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों, NCGTC, PSB Alliance, बैंकों, उद्योग संगठनों और कारोबारियों ने भाग लिया।
इसके बाद दूसरे चरण में 10 अतिरिक्त स्थानों पर आउटरीच अभियान जारी रखा गया, जिनमें से चार अभियान पूरे हो चुके थे।
कारोबार और रोजगार को मिल सकता है सहारा
ECLGS 5.0 का व्यापक उद्देश्य केवल ऋण उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि बाहरी आर्थिक दबावों के दौरान कारोबार की निरंतरता बनाए रखना भी है। अतिरिक्त कार्यशील पूंजी मिलने से पात्र कारोबारी अपने रोजमर्रा के खर्च, आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान और अन्य वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकते हैं।
इसके अलावा, पर्याप्त तरलता से उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही, कारोबार के संचालन में निरंतरता रहने से रोजगार पर पड़ने वाले संभावित दबाव को कम किया जा सकता है।
इस तरह ECLGS 5.0 सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत बाहरी आर्थिक चुनौतियों के बीच MSME और अन्य पात्र कारोबारियों को संस्थागत ऋण तक बेहतर पहुंच देने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में योजना का प्रभाव ऋण प्रवाह, कारोबारी गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता पर महत्वपूर्ण हो सकता है।

