इमरान मसूद बेटी के सवाल पर हुए भावुक, बोले- सियासत सबकुछ नहीं; शायान मसूद के सपा में जाने से बढ़ी हलचल
Digital UP News Desk
लखनऊ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मसूद परिवार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बेटी से जुड़े सवाल पर भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि सियासत ही सबकुछ नहीं होती। इस दौरान उन्होंने पिता और बेटी के रिश्ते का जिक्र करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
दरअसल, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यहां उनसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मौजूदा सियासत और आगामी चुनावी समीकरणों से जुड़े सवाल पूछे गए। बातचीत के दौरान जब उनसे परिवार से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर सवाल किया गया तो वह भावुक हो गए।
इमरान मसूद ने कहा, “उस बाप की स्थिति क्या होगी, जिसकी बेटी अपने ही घर बैठ जाए। मेरी बेटी मेरे अपने घर पर है।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान परिवार से जुड़े घटनाक्रम की ओर गया।
अखिलेश यादव को लेकर सवाल पर चुप रहे इमरान मसूद
कार्यक्रम के दौरान इमरान मसूद से पूछा गया कि क्या वह अपनी बेटी से जुड़े घटनाक्रम के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जिम्मेदार मानते हैं। इस सवाल पर इमरान मसूद ने सीधे तौर पर किसी का नाम लेकर जवाब नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि वह किसको दोषी ठहराएं, वह तो वक्त को दोषी ठहरा रहे हैं। उनके इस जवाब को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इमरान मसूद ने इस मामले में किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया।
यही वजह है कि उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मसूद परिवार के भीतर सामने आए घटनाक्रम ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है।
शायान मसूद के सपा में शामिल होने के बाद बढ़ी हलचल
मसूद परिवार से जुड़े इस घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की खबर सामने आई। इसके बाद परिवार के भीतर मतभेद की चर्चाएं तेज हो गईं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शायान मसूद की पत्नी फिलहाल अपने पिता इमरान मसूद के घर पर हैं। इसी पारिवारिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए इमरान मसूद ने कार्यक्रम में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
हालांकि, इस पूरे मामले को केवल पारिवारिक घटनाक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसकी राजनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि शायान मसूद का सपा में जाना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
सहारनपुर दौरे पर अखिलेश यादव के साथ नजर आए शायान मसूद
बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहारनपुर पहुंचे थे। उनके कार्यक्रम के दौरान शायान मसूद भी उनके साथ दिखाई दिए। खास बात यह रही कि अखिलेश यादव और शायान मसूद की साथ मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।
बताया गया कि अखिलेश यादव ने शायान मसूद को अपनी कार की पिछली सीट पर साथ बैठाया। इस दृश्य के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसे महज मुलाकात से आगे जोड़कर देखा जाने लगा।
वहीं, अखिलेश यादव के सहारनपुर कार्यक्रम में इमरान मसूद की गैरमौजूदगी ने भी कई सवाल खड़े किए। हालांकि, किसी कार्यक्रम में किसी नेता की मौजूदगी या गैरमौजूदगी को अपने आप में किसी राजनीतिक फैसले का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मौजूदा सियासी परिस्थितियों में इस घटनाक्रम की चर्चा होना स्वाभाविक है।
मसूद परिवार की राजनीतिक विरासत पर चर्चा
मसूद परिवार लंबे समय से सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले परिवारों में शामिल रहा है। परिवार की राजनीतिक विरासत का इतिहास कई दशक पुराना बताया जाता है।
आपकी दी गई जानकारी के मुताबिक, इस राजनीतिक विरासत की शुरुआत काजी मसूद से जुड़ी रही है। बताया जाता है कि काजी मसूद करीब 1970 के आसपास गंगोह से विधायक बने थे। इसके बाद परिवार की अलग-अलग पीढ़ियां राजनीति में सक्रिय रहीं।
मसूद परिवार की राजनीति में काजी राशिद मसूद का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा। परिवार की अगली पीढ़ी में इमरान मसूद समेत कई लोग राजनीति में सक्रिय हुए। इसके साथ ही परिवार की दूसरी शाखाओं से जुड़े सदस्य भी सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।
यही वजह है कि जब परिवार के अलग-अलग सदस्यों के राजनीतिक रास्ते अलग-अलग दिशा में जाते दिखाई देते हैं तो उसका असर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ता है।
राजनीतिक विरासत को लेकर बढ़ी चर्चा
मसूद परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर अब नई चर्चाएं सामने आ रही हैं। इमरान मसूद सहारनपुर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और वर्तमान में कांग्रेस के सांसद हैं। दूसरी ओर, शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद परिवार की नई पीढ़ी की राजनीतिक सक्रियता भी चर्चा में आ गई है।
ऐसे में सवाल यह है कि आने वाले समय में मसूद परिवार के राजनीतिक संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। क्या परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहते हुए अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान बनाएंगे या भविष्य में कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा, यह देखने वाली बात होगी।
पश्चिमी यूपी में सियासी समीकरण पर नजर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। सहारनपुर समेत आसपास के जिलों में विभिन्न राजनीतिक दल सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करते हैं।
ऐसे समय में किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े व्यक्ति का दल बदलना या किसी बड़े नेता के साथ दिखाई देना चर्चा का विषय बन जाता है। शायान मसूद के सपा में शामिल होने और इसके बाद अखिलेश यादव के साथ उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, इन घटनाक्रमों के आधार पर भविष्य की राजनीति को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आगामी समय में नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां ही यह स्पष्ट करेंगी कि इन घटनाओं का व्यापक राजनीतिक असर कितना पड़ता है।
बेटी के सवाल पर इमरान मसूद का भावुक बयान चर्चा में
पूरे घटनाक्रम के बीच इमरान मसूद का बेटी को लेकर दिया गया बयान सबसे अधिक चर्चा में है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सियासत सबकुछ नहीं होती। उनके बयान में राजनीतिक परिस्थितियों के साथ-साथ एक पिता की भावनाएं भी दिखाई दीं।
वहीं, जब उनसे किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने किसी पर सीधा आरोप लगाने के बजाय कहा कि वह वक्त को दोषी मानते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहते।
फिलहाल मसूद परिवार से जुड़ा यह घटनाक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर इमरान मसूद कांग्रेस में अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं, दूसरी ओर शायान मसूद का सपा से जुड़ना नए राजनीतिक समीकरणों की ओर संकेत कर रहा है। आने वाले दिनों में परिवार के सदस्यों के राजनीतिक कदम और उनके सार्वजनिक बयानों पर सभी की नजर रहेगी।

