बिहार में गंगा खतरे के निशान से 2 फीट ऊपर, 13 जिलों में बाढ़; यूपी, हिमाचल और MP में भी बारिश का अलर्ट

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Digital UP News Desk

देश के कई राज्यों में मानसून की सक्रियता के कारण बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बिहार में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब दो फीट ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते राज्य के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। वहीं, प्रदेश की आठ नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज किए गए हैं।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई नदियां उफान पर हैं। वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाओं से 175 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। मध्य प्रदेश में भी मानसूनी सिस्टम के सक्रिय होने के कारण कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार में गंगा का जलस्तर बढ़ा, 13 जिले बाढ़ की चपेट में

बिहार में बीते दो दिनों से कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। इसका असर नदियों के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। राजधानी पटना में गंगा नदी खतरे के निशान से करीब दो फीट ऊपर बह रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

राज्य में कुल 13 जिलों के बाढ़ प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा आठ प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही, निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

हालांकि, प्रशासन का प्रयास है कि संभावित स्थिति को देखते हुए समय रहते राहत एवं बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

वाराणसी में 407 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे रहने वाले 407 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। प्रशासन के अनुसार, अब तक करीब 2,910 लोग विस्थापित हो चुके हैं।

राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने 36 नावें तैनात की हैं। इन नावों के जरिए प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।

वाराणसी में बाढ़ जैसे हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिलाधिकारी और मेयर से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर सक्रियता और बढ़ गई है।

प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही, नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

हिमाचल प्रदेश में बारिश के बाद 175 से ज्यादा सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश में बुधवार रात कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। इसके बाद कुछ इलाकों में भूस्खलन के कारण 175 से अधिक सड़कें बंद हो गईं। सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही बाधित रही।

कालका-शिमला फोरलेन पर भी भारी मलबा गिरने की जानकारी सामने आई। इसके कारण कई वाहन रातभर रास्ते में फंसे रहे। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से सड़क मार्गों को बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

ओडिशा के 373 गांव बाढ़ से प्रभावित

ओडिशा के उत्तरी हिस्से में भी बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। यहां करीब 373 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था की है। इसके अलावा बचाव दलों को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

बालासोर जिले में सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक भोगराई, बालीपाल, बस्ता, रेमुना और जलेश्वर ब्लॉक के 214 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इसके चलते सुवर्णरेखा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

हालांकि, राहत की बात यह है कि नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घट रहा है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी जारी है, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश से राहत, यलो अलर्ट

पंजाब और चंडीगढ़ के कई हिस्सों में बारिश होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है। मौसम में बदलाव के चलते तापमान में भी कुछ कमी आने की संभावना है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने 5 सितंबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज और बिजली की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं।

वहीं चंडीगढ़ में आसमान में हल्के बादल छाए रहने की संभावना है। शहर में एक-दो बार बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट

मध्य प्रदेश में भी मानसूनी बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय है। इसके प्रभाव से गुरुवार को राज्य के करीब आधे हिस्से में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं छतरपुर, सागर, रायसेन, नरसिंहपुर, सिवनी और बैतूल में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है।

इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान चार इंच से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी की स्थिति बन सकती है।

प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को भी मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लेने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

कई राज्यों में मानसून का असर

कुल मिलाकर, देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। बिहार में गंगा समेत कई नदियों का बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय है। वहीं उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भी बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में बारिश के बाद भूस्खलन से सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी है, वहीं मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

ऐसे में अगले कुछ दिनों तक प्रभावित राज्यों में मौसम और नदियों के जलस्तर पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव की तैयारियां जारी हैं और लोगों से स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की जा रही है।

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