कानपुर देहात में बारिश के बीच गिरी कच्ची दीवार, मलबे में दबे परिवार के दो मासूम बच्चों की मौत

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रिपोर्ट-विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। मूसानगर थाना क्षेत्र के जसरेन गांव में एक कच्चे मकान की दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। हादसे के समय परिवार के सभी सदस्य घर में सो रहे थे। दीवार गिरने से पूरा परिवार मलबे में दब गया। आसपास के लोगों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव शुरू किया और परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला। हालांकि, इस हादसे में सात वर्षीय बेटी पलक और तीन वर्षीय बेटे लविश की मौत हो गई। वहीं बच्चों के पिता मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार के दो मासूम बच्चों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं घायल मुकेश को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।

बारिश के दौरान अचानक गिरी कच्ची दीवार

जानकारी के मुताबिक, जसरेन गांव निवासी मुकेश मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके परिवार में पत्नी संगीता, सात वर्षीय बेटी पलक और तीन वर्षीय बेटा लविश थे। बताया गया कि हादसे से कुछ समय पहले तक परिवार में सब कुछ सामान्य था।

परिजनों के अनुसार, रात में परिवार के सभी सदस्यों ने साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद मिठाई भी खाई और फिर सोने के लिए चारपाइयों पर चले गए। इसी दौरान बारिश के बीच मकान की कच्ची दीवार अचानक गिर गई। दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए मलबा हटाना शुरू किया। काफी प्रयास के बाद परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक दोनों बच्चों की जान जा चुकी थी। हादसे में मुकेश भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

बच्चों की मौत से परिवार में पसरा मातम

दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। हादसे के बाद मां संगीता का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों से जुड़ी चीजें देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही हैं। परिवार के लिए यह हादसा किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।

ग्रामीणों के मुताबिक, मुकेश का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाता था। ऐसे में कच्चे मकान में परिवार का रहना पहले से ही चिंता का विषय बना हुआ था। बारिश के दौरान कच्ची दीवार के गिरने से यह चिंता आखिरकार एक बड़े हादसे में बदल गई।

पक्का मकान बनवाने की चल रही थी तैयारी

परिवार के अनुसार, घर की स्थिति को देखते हुए पक्का मकान बनवाने की चर्चा काफी समय से चल रही थी। मृतक बच्ची पलक भी बारिश के दौरान कच्चे घर को लेकर डर जाहिर करती थी। बताया गया कि उसने अपने पिता से घर के लिए ईंटें लाने की बात कही थी।

परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही पक्का मकान बन जाएगा और बच्चों को बारिश के दौरान कच्चे घर में रहने की परेशानी से राहत मिलेगी। लेकिन इससे पहले ही दीवार गिरने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

ग्राम प्रधान पर परिवार ने लगाए आरोप

हादसे के बाद पीड़ित परिवार ने ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि पक्का मकान दिलाने के लिए वे लंबे समय से ग्राम प्रधान और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे।

परिजनों ने आरोप लगाया कि पक्का मकान दिलाने के नाम पर उनसे कथित तौर पर 10 से 20 हजार रुपये तक की मांग की जाती थी। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें पक्का मकान मिल गया होता तो शायद यह हादसा टल सकता था।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में प्रशासन की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में आरोपों को जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही देखा जाना उचित होगा।

प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश

हादसे की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है। जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी के मुताबिक, पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और आवास की व्यवस्था को लेकर भी विचार किया जा रहा है।

प्रशासन की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि परिवार को सरकारी आवास योजना का लाभ मिला था या नहीं। यदि परिवार पात्र है और योजना का लाभ नहीं मिला है, तो संबंधित स्तर पर इसकी जांच की जाएगी।

ग्रामीणों की तत्परता से शुरू हुआ राहत कार्य

दीवार गिरने के बाद ग्रामीणों ने जिस तत्परता से राहत और बचाव कार्य शुरू किया, वह भी महत्वपूर्ण रहा। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। किसी औपचारिक सहायता का इंतजार किए बिना ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मलबा हटाना शुरू किया।

ग्रामीणों ने परिवार के सदस्यों को बाहर निकालने के लिए काफी प्रयास किया। इसके बाद घायल मुकेश को अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में कमजोर और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है।

बारिश के मौसम में कच्चे मकानों की सुरक्षा अहम

कानपुर देहात की इस घटना के बाद ग्रामीण इलाकों में कच्चे और जर्जर मकानों की स्थिति की जांच की जरूरत भी सामने आई है। बारिश के दौरान मिट्टी और कच्ची दीवारों में नमी बढ़ने से उनकी मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि संवेदनशील मकानों की पहचान कर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं।

विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी आवास योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित हादसे को रोका जा सके।

दो बच्चों की मौत ने खड़े किए कई सवाल

जसरेन गांव में हुए इस हादसे ने परिवार के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था के सामने भी कई सवाल खड़े किए हैं। एक ओर जहां बारिश के दौरान कच्चे मकानों की सुरक्षा चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद परिवारों को समय पर पक्का आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि परिवार को सरकारी आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

इस हादसे में दो मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि परिवार का एक सदस्य घायल है। ऐसे में सबसे बड़ी प्राथमिकता अब घायल मुकेश के बेहतर इलाज, परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की होनी चाहिए। साथ ही प्रशासन को बारिश के दौरान ऐसे कमजोर मकानों का सर्वे कराकर संभावित खतरे वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित करने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाने होंगे।

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