बिजनौर में तेज आवाज पर कार्रवाई, मस्जिद से लाउडस्पीकर उतरवाए गए, जारी की गाइड लाइन
रिपोर्ट- ताबिश मिर्ज़ा
बिजनौर: धार्मिक स्थलों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शासन और न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर बिजनौर पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। इसी क्रम में बिजनौर के पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई ने एक मस्जिद में तेज आवाज में अजान होने की सूचना पर मौके पर पहुंचकर लाउडस्पीकर उतरवाने की कार्रवाई कराई। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब एसपी जेल के निरीक्षण के लिए गए हुए थे।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद धार्मिक स्थलों पर ध्वनि की निर्धारित सीमा और नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन का उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि निर्धारित ध्वनि सीमा और सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
तेज आवाज को लेकर पुलिस ने लिया संज्ञान
जानकारी के अनुसार, बिजनौर के एसपी केके बिश्नोई बीती शाम जेल का निरीक्षण करने गए थे। इसी दौरान जेल के आसपास स्थित एक मस्जिद से तेज आवाज में अजान सुनाई देने की बात सामने आई। मामले का संज्ञान लेते हुए एसपी मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसके बाद मस्जिद की मीनार पर लगाए गए लाउडस्पीकरों को उतरवा दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई को धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
हालांकि, इस कार्रवाई के संबंध में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मुख्य जोर तेज आवाज और ध्वनि सीमा से जुड़े नियमों के अनुपालन पर है। ऐसे मामलों में प्रशासन की ओर से सभी धार्मिक स्थलों के लिए समान नियम लागू किए जाने की बात कही जाती रही है।
धार्मिक स्थलों पर ध्वनि सीमा का पालन जरूरी
धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर उत्तर प्रदेश में समय-समय पर प्रशासनिक स्तर पर अभियान चलाए जाते रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक गतिविधियों के दौरान उत्पन्न होने वाली आवाज आसपास के लोगों के लिए परेशानी या ध्वनि प्रदूषण का कारण न बने।
मंदिरों में भजन-कीर्तन हो या मस्जिदों में अजान और नमाज से जुड़ी घोषणाएं, सार्वजनिक रूप से ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक माना जाता है। इसी वजह से पुलिस और प्रशासन समय-समय पर धार्मिक स्थलों का निरीक्षण कर ध्वनि स्तर की निगरानी करते हैं।
बिजनौर में भी नए पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई के कार्यभार संभालने के बाद धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों के अनुपालन को लेकर सक्रियता दिखाई दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी दिया जाता है हवाला
ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पर्यावरणीय नियमों का अक्सर हवाला दिया जाता है। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए ध्वनि सीमा निर्धारित की गई है। इन नियमों का उद्देश्य लोगों को अत्यधिक शोर से होने वाली परेशानी से बचाना है।
रिहायशी क्षेत्रों में दिन के समय ध्वनि सीमा 55 डेसिबल और रात के समय 45 डेसिबल निर्धारित है। वहीं, व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए दिन में 65 डेसिबल और रात में 55 डेसिबल की सीमा बताई जाती है। हालांकि, अलग-अलग परिस्थितियों और क्षेत्रों के वर्गीकरण के अनुसार लागू नियमों की पुष्टि संबंधित प्रशासनिक एवं पर्यावरणीय प्रावधानों से की जानी चाहिए।
ध्वनि सीमा से जुड़े नियम केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य स्थानों पर भी ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियम लागू होते हैं।
सभी धार्मिक स्थलों पर समान नियम लागू करने पर जोर
ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन की ओर से आमतौर पर यह स्पष्ट किया जाता है कि नियम किसी एक धर्म या धार्मिक स्थल के लिए नहीं हैं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या अन्य धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल के दौरान निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है।
इसी वजह से बिजनौर में हुई कार्रवाई को भी ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन के सामने चुनौती यह रहती है कि धार्मिक गतिविधियों और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए नियमों का पालन कराया जाए।
इस दिशा में पुलिस द्वारा धार्मिक स्थलों के प्रतिनिधियों से संवाद और निर्धारित ध्वनि सीमा के बारे में जागरूक करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे बिना किसी विवाद के नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
जेल निरीक्षण के दौरान सामने आया मामला
बताया जा रहा है कि एसपी केके बिश्नोई जेल का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान आसपास के क्षेत्र में तेज आवाज सुनाई देने पर उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद संबंधित स्थान पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया गया और लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई की गई।
पुलिस अधीक्षक द्वारा मौके पर पहुंचकर कार्रवाई किए जाने से यह संदेश भी गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायतों या नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इस तरह की कार्रवाई के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और लागू नियमों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों को अनावश्यक शोर से राहत दिलाना होता है।
ध्वनि प्रदूषण से लोगों को राहत देने की कोशिश
ध्वनि प्रदूषण शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण नागरिक समस्या बन सकता है। लगातार तेज आवाज होने से आसपास रहने वाले लोगों को असुविधा हो सकती है। खासतौर पर रात के समय तेज आवाज को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसी को देखते हुए प्रशासन द्वारा निर्धारित समय और ध्वनि सीमा का पालन कराने पर जोर दिया जाता है। धार्मिक आयोजनों के अलावा शादी समारोह, सार्वजनिक कार्यक्रम और अन्य अवसरों पर भी ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है।
बिजनौर पुलिस की हालिया कार्रवाई इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन की ओर से अन्य धार्मिक स्थलों तथा सार्वजनिक स्थानों पर भी ध्वनि स्तर की निगरानी की जा सकती है।
नियमों का पालन ही समाधान
धार्मिक आस्था और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से होना जरूरी है। यदि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है, तो निर्धारित ध्वनि सीमा और अन्य कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बिजनौर में मस्जिद से लाउडस्पीकर उतरवाने की कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि पुलिस ध्वनि प्रदूषण से जुड़े मामलों को लेकर सक्रिय है। हालांकि, इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस या प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना उचित होगा।
फिलहाल, एसपी केके बिश्नोई की इस कार्रवाई के बाद बिजनौर में धार्मिक स्थलों पर ध्वनि सीमा और नियमों के अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन की कोशिश यही है कि कानून के दायरे में रहते हुए धार्मिक गतिविधियां संचालित हों और साथ ही आम नागरिकों को अत्यधिक शोर से होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।

