मथुरा में भक्ति, संगीत और रास के रंग में रंगा मथुरा, श्रीकृष्णोत्सव-2026 का भव्य आगाज

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

मथुरा। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा भक्ति, संगीत, नृत्य और रास की मनोहारी प्रस्तुतियों से सराबोर हो उठी। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से आयोजित श्रीकृष्णोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ डैम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में हुआ। तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन के पहले दिन भजन-कीर्तन, रासलीला, लीलागायन और नृत्य की ऐसी प्रस्तुतियां हुईं कि पूरा प्रेक्षागृह कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, विधायक पूरन प्रकाश, परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन और हार्टफुलनेस संस्था के निशांत शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ सांस्कृतिक उत्सव

श्रीकृष्णोत्सव-2026 के शुभारंभ अवसर पर अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।

इस दौरान विधायक पूरन प्रकाश, गोकुल चेयरमैन संजय दीक्षित और नाथद्वारा मंदिर ट्रस्ट से आए विशाल बाबा को परिषद के एसीईओ राजीव पाण्डेय और डिप्टी सीईओ सतीश ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान ब्रज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े लोगों के योगदान को भी रेखांकित किया गया।

आरती और बधाई गायन से गूंजा पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह

शुभारंभ के बाद कान्हा अकादमी के श्याम सुंदर लाल की आरती के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विधिवत आगाज हुआ। इसके बाद ‘लाला के जन्म की बधाई’ का गायन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में प्रस्तुत किए गए इस पारंपरिक गायन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इसके साथ ही एक के बाद एक कृष्ण लीलाओं और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां होती रहीं। कभी मधुर भजनों की धुनों ने दर्शकों को भावविभोर किया तो कभी नृत्य और लीलागायन के माध्यम से बालकृष्ण की मनोहारी छवि मंच पर जीवंत होती दिखाई दी।

विशेष रूप से कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने ब्रज की लोक एवं धार्मिक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दर्शकों के सामने रखा। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु और कला प्रेमी देर तक प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।

नाथद्वारा के वेद विद्यालय के विद्यार्थियों ने बांधा समा

श्रीकृष्णोत्सव-2026 के पहले दिन नाथद्वारा से आए वेद विद्यालय के विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। विद्यालय के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भजन, कीर्तन, सामूहिक नृत्य और काव्यपाठ के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

विद्यार्थियों ने श्रीनाथजी के चरित्र और उनकी विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उनकी सामूहिक प्रस्तुतियों में भक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। जैसे-जैसे विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां आगे बढ़ीं, वैसे-वैसे प्रेक्षागृह का वातावरण भी कृष्ण भक्ति के रंग में गहराता गया।

दर्शकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। उनके भजन और कीर्तन ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। वहीं, सामूहिक नृत्य और काव्यपाठ ने सांस्कृतिक कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

‘मुदरिया प्रेम’ रासलीला ने मोहा दर्शकों का मन

इसके बाद पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन की ओर से ‘मुदरिया प्रेम’ रासलीला और नन्दोत्सव की झांकी प्रस्तुत की गई। पारंपरिक ब्रज रास शैली में तैयार की गई इस प्रस्तुति में कलाकारों ने अभिनय, नृत्य और संवाद के माध्यम से श्रीराधा और श्रीकृष्ण की प्रेममयी लीलाओं को मंच पर साकार किया।

‘मुदरिया प्रेम’ की कथा श्रीराधा की स्वर्ण मुदरिया यानी अंगूठी के गुम होने से आगे बढ़ती है। इसके बाद कथा में मान-मनुहार, हास्य-विनोद और प्रेम के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय और आकर्षक मंचन ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा।

रासलीला के दौरान ब्रज की पारंपरिक भाषा, संगीत और नृत्य की झलक भी देखने को मिली। यही कारण रहा कि प्रेक्षागृह में मौजूद दर्शक पूरी प्रस्तुति के दौरान भाव-विभोर नजर आए।

नन्दोत्सव की झांकी ने बढ़ाई आयोजन की शोभा

रासलीला के साथ प्रस्तुत की गई नन्दोत्सव की झांकी ने भी दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद नंद बाबा के घर उत्सव और बधाइयों के पारंपरिक प्रसंग को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

मंच पर सजे पारंपरिक परिधान, संगीत और नृत्य ने ब्रज की लोक संस्कृति का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत किया। वहीं, कलाकारों के अभिनय ने नन्दोत्सव की पारंपरिक खुशी और उल्लास को मंच पर साकार कर दिया।

इस दौरान प्रेक्षागृह में ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ब्रज की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का भी माध्यम बना।

ब्रज की संस्कृति और परंपरा को मंच देने का प्रयास

श्रीकृष्णोत्सव-2026 का आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। मथुरा-वृंदावन की पहचान सदियों से कृष्ण भक्ति, रासलीला, लोक संगीत और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी रही है।

ऐसे में इस तरह के आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को ब्रज की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। खास तौर पर नाथद्वारा के वेद विद्यालय के विद्यार्थियों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक सांस्कृतिक स्वरूप दिया।

इसके अलावा रासलीला अकादमी और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने ब्रज की पारंपरिक कला को मंच पर जीवंत बनाए रखा। इस प्रकार श्रीकृष्णोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ कला, संगीत और संस्कृति का भी उत्सव बनकर सामने आया।

पहले दिन ही दिखी उत्सव की भव्यता

श्रीकृष्णोत्सव-2026 के पहले दिन पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि मथुरा में कृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। यहां भक्ति के साथ संगीत, नृत्य, रास और लोक परंपराएं भी उत्सव का अभिन्न हिस्सा हैं।

कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने कलाकारों और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को खूब सराहा। वहीं, आयोजकों ने भी ब्रज की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों और संस्थाओं की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।

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