मेरठ जेल में सुरक्षा और रोजगार की नई पहल, एक्स-रे स्कैनर के साथ 20 लाख की लागत से बनेगी बेकरी यूनिट
Digital UP News Desk
मेरठ: चौधरी चरण सिंह जिला कारागार मेरठ में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ बंदियों को रोजगारपरक हुनर से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। जेल प्रशासन की ओर से एक तरफ आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर लगाने की तैयारी की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ करीब 20 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक बेकरी यूनिट स्थापित की जा रही है। इन दोनों पहलों का उद्देश्य जेल की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने के साथ बंदियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
जेल प्रशासन के अनुसार, एक्स-रे बैगेज स्कैनर को जेल के मुख्य प्रवेश क्षेत्र के बाहर स्थापित किया जा रहा है। इसके जरिए जेल में आने वाले मुलाकातियों और उनके सामान की जांच को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। अभी सामान की जांच मुख्य रूप से मैनुअल तरीके से की जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामान को पहले एक्स-रे मशीन से गुजारा जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसके बाद मैनुअल जांच भी की जाएगी।
एक्स-रे स्कैनर से सामान की जांच होगी आसान
नई मल्टीलेयर एक्स-रे बैगेज स्कैनिंग मशीन आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। यह सामान के भीतर मौजूद वस्तुओं की 2डी और 3डी तस्वीर प्रदर्शित करने में सक्षम होगी। ऐसे में बैग, डिब्बे, कपड़े या अन्य सामान के अंदर छिपाई गई संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करना सुरक्षा कर्मियों के लिए आसान हो सकता है।
इसके अलावा, मशीन के जरिए सामान में मौजूद अलग-अलग प्रकार की वस्तुओं को पहचानने में भी मदद मिलेगी। इससे सुरक्षा कर्मियों को किसी संदिग्ध सामान की जांच के दौरान अतिरिक्त सहायता मिल सकेगी। हालांकि, किसी वस्तु को संदिग्ध पाए जाने पर आवश्यकतानुसार मैनुअल जांच और अन्य निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाएं भी अपनाई जाएंगी।
मोबाइल और प्रतिबंधित सामान पर बढ़ेगी निगरानी
जेल प्रशासन का मानना है कि तकनीकी जांच व्यवस्था लागू होने से प्रतिबंधित सामान को जेल परिसर में पहुंचने से रोकने में मदद मिलेगी। एक्स-रे स्कैनिंग के जरिए मोबाइल फोन, सिम कार्ड, कारतूस, चाकू, हथियार या मादक पदार्थ जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं को पहचानने में सुरक्षा कर्मियों को अतिरिक्त सहायता मिल सकती है।
दरअसल, जेलों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रवेश द्वार पर सामान की जांच सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होती है। ऐसे में आधुनिक स्कैनिंग तकनीक के इस्तेमाल से जांच प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकता है।
मेरठ जेल को संवेदनशील जेलों में शामिल बताया जाता है। इसी वजह से यहां सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश की संवेदनशील जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक पदार्थों की पहचान में मिलेगी मदद
जेल प्रशासन के मुताबिक, एक्स-रे स्कैनिंग तकनीक सामान में मौजूद ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक पदार्थों को अलग-अलग पहचानने में सहायता करती है। इसका फायदा यह होगा कि खाद्य सामग्री या अन्य सामान के भीतर छिपाई गई संदिग्ध वस्तुओं की जांच अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
इसके परिणामस्वरूप सुरक्षा कर्मियों को सामान की स्क्रीनिंग के दौरान एक अतिरिक्त तकनीकी सहायता मिलेगी। वहीं, संदिग्ध वस्तु सामने आने पर आगे की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद जेल में प्रवेश करने वाले सामान की जांच का पूरा सिस्टम अधिक तकनीकी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। इससे सुरक्षा कर्मियों पर भी मैनुअल जांच का दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है।
20 लाख रुपये से तैयार हो रही अत्याधुनिक बेकरी यूनिट
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ मेरठ जेल प्रशासन बंदियों को रोजगार से जोड़ने पर भी ध्यान दे रहा है। इसी उद्देश्य से करीब 20 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक बेकरी यूनिट स्थापित की जा रही है।
बेकरी यूनिट के शुरू होने के बाद बंदियों को खाद्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें ब्रेड, बिस्कुट, पाव, बर्गर बन और कुकीज जैसे उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को उत्पादन से जुड़ी व्यावहारिक प्रक्रिया समझने का अवसर मिलेगा।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जेल से बाहर निकलने के बाद किसी व्यावहारिक कौशल का उपयोग रोजगार हासिल करने में किया जा सकता है। इस तरह बेकरी यूनिट केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बंदियों के कौशल विकास का माध्यम भी बनेगी।
जेल के बाहर खुलेगा उत्पादों का आउटलेट
बेकरी में तैयार होने वाले उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचाने की भी योजना बनाई जा रही है। इसके लिए जेल परिसर के बाहर एक आउटलेट शुरू करने की तैयारी है। इसके माध्यम से जेल में तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री की जा सकेगी।
इसके अलावा, आसपास की अन्य जेलों में भी इन उत्पादों की आपूर्ति किए जाने की योजना है। इससे बेकरी यूनिट के उत्पादन को एक व्यापक बाजार मिल सकता है और बंदियों को नियमित काम का अवसर भी उपलब्ध हो सकता है।
जेल प्रशासन के अनुसार, तैयार उत्पादों की बिक्री से प्राप्त रकम का एक हिस्सा बंदियों को उनकी मेहनत के अनुरूप मजदूरी के रूप में दिया जाएगा। वहीं, शेष राशि जेल सोसाइटी के खाते में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग जेल में संचालित विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों में किया जा सकेगा।
हुनर सीखकर रोजगार की दिशा में बढ़ेंगे बंदी
बेकरी यूनिट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बंदियों का कौशल विकास है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बेकरी उद्योग से जुड़े अलग-अलग काम सिखाए जाएंगे। इससे वे उत्पादन, पैकेजिंग और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं का अनुभव हासिल कर सकेंगे।
जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह की रोजगारपरक गतिविधियां बंदियों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। साथ ही, जेल से बाहर निकलने के बाद उनके लिए स्वरोजगार या नौकरी के विकल्प तलाशना आसान हो सकता है।
इस पहल के जरिए जेल प्रशासन का फोकस केवल सुधारात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
सांसद और जिलाधिकारी के प्रयास से आगे बढ़ी पहल
जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, बेकरी मशीन लगाने की पहल को आगे बढ़ाने में सांसद अरुण गोविल और जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आधुनिक मशीनरी स्थापित होने के बाद बेकरी यूनिट में बड़े स्तर पर खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
जेल प्रशासन की योजना है कि यूनिट के संचालन के साथ उत्पादन और बिक्री की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।
जल्द होगा दोनों परियोजनाओं का उद्घाटन
जेल अधीक्षक के अनुसार, बेकरी यूनिट और एक्स-रे बैगेज स्कैनर का उद्घाटन जल्द किया जाएगा। इसके बाद दोनों व्यवस्थाएं औपचारिक रूप से काम करना शुरू कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, मेरठ जिला कारागार में शुरू की जा रही ये दोनों पहल अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती हैं। एक ओर जहां एक्स-रे बैगेज स्कैनर के जरिए जेल की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर बेकरी यूनिट के माध्यम से बंदियों को हुनर और मेहनत की कमाई से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
यदि यह व्यवस्था निर्धारित योजना के अनुसार सफलतापूर्वक संचालित होती है, तो इससे जेल प्रशासन को सुरक्षा प्रबंधन में तकनीकी सहायता मिलने के साथ-साथ बंदियों के कौशल विकास और पुनर्वास की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

