हमीरपुर में साइबर ठगी का खुलासा, 48 ब्लैंक सिम और मोबाइल के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

20

रिपोर्ट: मोहम्मद अकरम

हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े दो मामलों का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 48 ब्लैंक सिम कार्ड, दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी अलग-अलग कंपनियों और सेवाओं से जुड़े काम करते थे और इसी दौरान लोगों की व्यक्तिगत जानकारी तक उनकी पहुंच बनती थी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में एक आरोपी पीओएस एजेंट के रूप में काम करता था, जबकि दूसरा माइक्रो फाइनेंस कंपनी में फील्ड ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि दोनों केवाईसी प्रक्रिया के नाम पर लोगों से जरूरी दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद कथित तौर पर इस जानकारी का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था।

दो साइबर ठगी के मामलों की जांच के बाद कार्रवाई

हमीरपुर साइबर क्राइम थाना पुलिस के मुताबिक, जिले में 21 अगस्त और 25 अगस्त को साइबर ठगी से संबंधित दो मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की।

इसी क्रम में पुलिस को आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन कर आरोपियों की तलाश तेज की गई।

जांच के दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कोतवाली नगर क्षेत्र में सिटी फॉरेस्ट के पास निर्माणाधीन पुल के नजदीक कार्रवाई की। यहां से पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।

दोनों आरोपियों की हुई पहचान

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान दीपक कुमार और विक्रांत सिंह के रूप में हुई है। दीपक कुमार की उम्र करीब 22 वर्ष बताई गई है और वह हमीरपुर जिले के थाना सुमेरपुर क्षेत्र के ग्राम भौरा डांडा का निवासी है।

वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान करीब 26 वर्षीय विक्रांत सिंह के रूप में हुई है। वह जालौन जिले के कालपी थाना क्षेत्र के ग्राम देवपुरा का रहने वाला बताया गया है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद उनके कब्जे से साइबर अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण सामान की बरामदगी की गई।

48 ब्लैंक सिम कार्ड और दो मोबाइल बरामद

पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से कुल 48 ब्लैंक सिम कार्ड बरामद हुए। इसके अलावा नथिंग कंपनी के दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

इतनी संख्या में सिम कार्ड बरामद होने के बाद पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इनका इस्तेमाल किन लोगों के नाम पर या किन उद्देश्यों के लिए किया जाना था। साथ ही, बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, बरामदगी के आधार पर दोनों मामलों में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई है। जांच एजेंसी अब बरामद सामान के इस्तेमाल और उससे जुड़े संभावित साइबर नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।

KYC के नाम पर जुटाते थे लोगों की जानकारी

पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपियों की कार्यप्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, दीपक कुमार पीओएस एजेंट के तौर पर काम करता था। वहीं विक्रांत सिंह माइक्रो फाइनेंस कंपनी में फील्ड ऑफिसर के रूप में कार्यरत था।

अपने काम के दौरान दोनों को लोगों से संपर्क करने का अवसर मिलता था। आरोप है कि इसी संपर्क का फायदा उठाकर वे लोगों को केवाईसी कराने के नाम पर उनके जरूरी दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे।

केवाईसी प्रक्रिया में आम तौर पर पहचान और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ली जाती है। साइबर अपराध के मामलों में ऐसी संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की आशंका रहती है। इसलिए पुलिस इस मामले में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने कितने लोगों की जानकारी हासिल की थी।

खातों से रकम निकालने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि लोगों से हासिल की गई जानकारी का कथित तौर पर इस्तेमाल उनके बैंक खातों से रकम निकालने के लिए किया जाता था। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और कितने लोगों को इसका शिकार बनाया गया, इसकी विस्तृत जांच अभी जारी है।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उन लोगों की जानकारी जुटा रही है, जिनके साथ इस तरीके से संपर्क किया गया था। इसके साथ ही बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और डिजिटल लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।

अन्य लोगों की भूमिका की भी होगी जांच

दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला फोकस इस कथित साइबर नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने पर है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि बरामद 48 सिम कार्ड कहां से हासिल किए गए थे और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।

इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों की व्यक्तिगत जानकारी जुटाई और इस जानकारी को किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह के साथ साझा किया गया था या नहीं।

यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो पुलिस उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस लगातार लोगों को अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखने की सलाह देती रही है। खासतौर पर केवाईसी, बैंक अपडेट, सिम कार्ड या किसी अन्य सेवा के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में संबंधित बैंक या सेवा प्रदाता से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना जरूरी है। इसी तरह किसी दस्तावेज की जानकारी साझा करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति या संस्था अधिकृत है।

न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू

हमीरपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, दोनों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया की जा रही है।

फिलहाल पुलिस बरामद 48 सिम कार्ड, दोनों मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही, 21 और 25 अगस्त को दर्ज मामलों से जुड़े डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक के अनुसार, साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। जांच के दौरान यदि इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

You may have missed