संजय सिंह ने पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर साधा निशाना, जानिए क्या किया खुलासा ,,,

13

रिपोर्ट- धर्मेंद्र पाण्डेय 

वाराणसी। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने वाराणसी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों, बड़े उद्योगपतियों को कथित तौर पर मिलने वाली राहत और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में आम नागरिकों, छोटे कारोबारियों और गरीब वर्ग की अपेक्षा बड़े उद्योगपतियों के हित अधिक महत्वपूर्ण दिखाई देते हैं।

संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, “पीएम मोदी अडानी के प्रधानमंत्री हैं, देश के प्रधानमंत्री नहीं।” उनका यह बयान वाराणसी में दिए गए राजनीतिक संबोधन के दौरान सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान अडानी समूह को कारोबारी लाभ मिलने की खबरें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने कजाकिस्तान दौरे का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से सवाल किए।

हालांकि, संजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया या स्वतंत्र पुष्टि को अलग से देखा जाना आवश्यक है।

निजी कंपनियों के कर्ज को लेकर सरकार पर सवाल

आप सांसद ने देश की निजी कंपनियों के कर्ज से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि 43 निजी कंपनियों के करीब 3 लाख 53 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए गए हैं।

संजय सिंह ने कहा कि एक तरफ बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को राहत दिए जाने की बात सामने आती है, वहीं दूसरी ओर गरीबों, छोटे दुकानदारों, पटरी व्यवसायियों, छात्रों और छोटे कारोबारियों को अपने कर्ज की अदायगी को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आर्थिक नीतियों का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से क्यों नहीं पहुंच रहा है। उनका कहना था कि यदि किसी छोटे कारोबारी पर कर्ज होता है तो उसकी वसूली के लिए सख्ती की जाती है, लेकिन बड़े कारोबारी समूहों के मामले में अलग रवैया अपनाया जाता है।

केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

संजय सिंह ने सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ कंपनियों पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बाद उन पर दबाव बनाया जाता है और इसके बाद उनके अडानी समूह के हाथों में जाने का रास्ता तैयार होता है।

उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से पारदर्शिता की मांग की। संजय सिंह का आरोप है कि सरकारी नीतियों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है, जिससे बड़े कारोबारी समूहों को लाभ पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है और सरकार को आर्थिक फैसलों तथा कारोबारी मामलों से जुड़े आरोपों पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

वाराणसी के कोनिया स्कूल का मुद्दा भी उठाया

प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला करने के साथ ही संजय सिंह ने वाराणसी के कोनिया क्षेत्र स्थित एक स्कूल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि करीब 30 हजार की आबादी वाले क्षेत्र में संचालित यह स्कूल लगभग तीन वर्ष पहले मरम्मत के नाम पर बंद कर दिया गया था।

संजय सिंह के मुताबिक, स्कूल बंद होने के कारण क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी डायस पोर्टल पर स्कूल अभी भी संचालित दिखाई देता है, जबकि जमीनी स्तर पर विद्यालय में पढ़ाई सुचारु रूप से नहीं हो रही है।

उन्होंने स्कूल की स्थिति को लेकर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि यदि किसी सरकारी स्कूल को मरम्मत के लिए बंद किया जाता है तो निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा होना चाहिए, ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो।

तीन साल से निर्माण पूरा नहीं होने पर तंज

स्कूल के निर्माण में कथित देरी को लेकर संजय सिंह ने सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि “तीन साल में तो ताजमहल बन जाता है”, लेकिन स्कूल की मरम्मत और निर्माण का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए कहा कि आखिर स्कूल के निर्माण में इतनी देरी क्यों हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए और बच्चों की पढ़ाई फिर से नियमित रूप से शुरू कराई जाए।

संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे की अनदेखी का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए सरकारी विद्यालयों की मरम्मत, भवन निर्माण और शिक्षण व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब की मांग

आप सांसद ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सरकारी स्कूल केवल भवन नहीं होता, बल्कि वह आसपास रहने वाले हजारों परिवारों के बच्चों की शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम होता है। ऐसे में लंबे समय तक स्कूल बंद रहने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन से स्कूल की स्थिति की जांच कराने तथा निर्माण कार्य की प्रगति सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण कार्य में किसी स्तर पर देरी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच उठे आर्थिक और स्थानीय मुद्दे

वाराणसी दौरे के दौरान संजय सिंह के बयान को आगामी राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। उन्होंने एक ओर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और बड़े उद्योगपतियों से जुड़े कथित लाभ का मुद्दा उठाया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर स्कूल की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए।

दरअसल, विपक्षी दल अक्सर सरकार की आर्थिक नीतियों, कर्ज माफी, निजीकरण और सरकारी संस्थानों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाते रहे हैं। ऐसे में संजय सिंह का बयान भी इसी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा माना जा सकता है।

वहीं, कोनिया स्कूल का मुद्दा स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी परियोजनाओं की समयबद्धता से जुड़ा है। यदि स्कूल लंबे समय से बंद है तो प्रशासन के लिए यह जरूरी होगा कि निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करे।

सरकार से जवाब की उम्मीद

संजय सिंह ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान लगाए गए आरोपों के आधार पर केंद्र और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े उद्योगपतियों को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कोनिया स्कूल के निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग दोहराई।

You may have missed