कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: मुख्य आरोपी नौशाद मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार, 7 पुलिसकर्मी निलंबित

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Digital UP News Desk

कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के दौरान हुए हादसे के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 31 अगस्त को पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शाहबाजी गांव में स्थित अवैध पटाखा निर्माण एवं भंडारण केंद्र में हुए विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।

इसी क्रम में पुलिस ने मंगलवार तड़के मुख्य आरोपी और कथित फैक्ट्री संचालक नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान हुई जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल मंझनपुर भेजा गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा बरामद करने का भी दावा किया है।

तड़के चार बजे पुलिस ने की घेराबंदी

पुलिस के मुताबिक, विस्फोट के बाद मुख्य आरोपी नौशाद फरार चल रहा था। मंगलवार तड़के पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि वह शहर छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील-सैयद सरावां मार्ग पर घेराबंदी की।

सीओ शिवांक सिंह के अनुसार, पुलिस टीम ने संदिग्ध व्यक्ति को रोकने का प्रयास किया। पुलिस का कहना है कि खुद को घिरता देख आरोपी ने टीम पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे जिला अस्पताल भेजा गया।

पुलिस ने आरोपी की पहचान नौशाद पुत्र निजामुद्दीन, निवासी महमदपुर मनौरी के रूप में की है। गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि विस्फोट के बाद वह कहां-कहां रहा और फरारी के दौरान किन लोगों ने उसे मदद पहुंचाई।

11 लोगों की मौत के बाद जांच तेज

गौरतलब है कि 31 अगस्त की सुबह करीब 11:30 बजे पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शाहबाजी गांव में अवैध पटाखा निर्माण एवं भंडारण केंद्र में विस्फोट हुआ था। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। राहत और बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की।

इस घटना में 11 लोगों की मौत हुई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी और घटना से जुड़े आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में पिपरी थाने में कुल छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए भी पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

पहले भी दर्ज हुआ था मुकदमा

इस मामले में सबसे अहम पहलू यह सामने आया है कि कथित आरोपी के खिलाफ इससे पहले भी अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण को लेकर कार्रवाई हो चुकी थी। पुलिस के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी ने 9 अक्टूबर 2024 को पिपरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के बाद उसे जेल भेजा गया था। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर दोबारा अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण का काम शुरू कर दिया।

यही तथ्य अब पुलिस और प्रशासन की जांच के केंद्र में है। सवाल यह है कि पहले कार्रवाई होने और संबंधित गतिविधि पर रोक के बावजूद वहां दोबारा अवैध काम कैसे शुरू हुआ। इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

सात पुलिसकर्मियों पर गिरी कार्रवाई की गाज

अवैध पटाखा निर्माण दोबारा शुरू होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग ने सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र के निर्देश पर पिपरी थाना और चायल चौकी में तैनात रहे सात निरीक्षक एवं उपनिरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। निलंबित पुलिसकर्मियों में निरीक्षक शिवचरण राम, उपनिरीक्षक विकास सिंह, उपनिरीक्षक विनय सिंह, उपनिरीक्षक अजीत कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अभिषेक गुप्ता, उपनिरीक्षक मनीष पाल और उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी शामिल हैं।

इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण की गतिविधियों के संबंध में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। विभाग ने इस मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका और लापरवाही को गंभीरता से लिया है।

शिवचरण राम की भूमिका भी जांच के दायरे में

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में निरीक्षक शिवचरण राम भी शामिल हैं। वह वर्तमान में कौशांबी साइबर थाने में प्रभारी निरीक्षक के पद पर तैनात थे। इससे पहले वह पिपरी थाने के प्रभारी निरीक्षक रह चुके हैं।

विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें भी निलंबित किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूरे प्रकरण में यह जांच की जा रही है कि संबंधित अवधि के दौरान अवैध पटाखा निर्माण एवं भंडारण के संबंध में पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी और क्या कोई शिकायत या सूचना मिलने के बाद भी उसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला फोकस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों पर है। पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। साथ ही, आरोपी से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और फरारी के दौरान मदद करने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है।

इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण का नेटवर्क कितना बड़ा था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पटाखा निर्माण के लिए सामग्री कहां से लाई जाती थी और तैयार माल को कहां-कहां भेजा जाता था।

प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती

कौशांबी की इस घटना ने अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। इसलिए प्रशासन और पुलिस के सामने अब अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों की पहचान कर उन पर प्रभावी कार्रवाई करना बड़ी चुनौती है।

फिलहाल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और सात पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद मामले में कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अवैध पटाखा गतिविधि दोबारा कैसे शुरू हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को सक्रिय किया गया है।

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