नेपाल बाढ़ में अब तक 919 मौतें, 4200 से ज्यादा लोग लापता, अज्ञात शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती-अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू
Digital UP News Desk
काठमांडू: नेपाल और तिब्बत में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 919 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इनमें अकेले नेपाल में 903 और तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है। वहीं, 4,200 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लगातार जारी राहत और बचाव कार्यों के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरामद शवों की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित रखने की है।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से बड़ी संख्या में घर, सड़कें, पुल और दूसरी जरूरी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा नेपाल और चीन के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्गों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में राहत कार्यों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क और आपूर्ति व्यवस्था बहाल करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
चितवन में अज्ञात शवों के लिए तैयार की गईं सैकड़ों कब्रें
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने से उनकी पहचान को लेकर गंभीर चुनौती सामने आई है। चितवन के देवघाट जंगल क्षेत्र में अज्ञात शवों को दफनाने के लिए सैकड़ों कब्रें तैयार की गई हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों में 196 शवों को दफनाया जा चुका है।
लंबे समय तक पानी में रहने के कारण कुछ शवों की स्थिति खराब हो गई है। ऐसे में उनकी तत्काल पहचान करना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन अब प्रत्येक शव का रिकॉर्ड तैयार कर रहा है, ताकि भविष्य में वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से उनकी पहचान की जा सके।
इसके लिए प्रत्येक शव को एक अलग पहचान संख्या दी जा रही है। साथ ही उससे जुड़ी उपलब्ध जानकारी को रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है। बाद में DNA जांच के माध्यम से पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके जरिए संबंधित शवों को उनके परिवारों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं। ऐसे में किसी परिवार के सदस्य के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने से उन्हें स्थिति समझने और आगे की कानूनी एवं पारिवारिक प्रक्रियाएं पूरी करने में मदद मिल सकती है।
हजारों लोगों की तलाश जारी
बाढ़ के बाद नेपाल के विभिन्न प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन लापता लोगों से जुड़ी सूचनाओं को एकत्र करने और बरामद शवों का रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दे रहा है।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण आने वाले दिनों में पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रशासन के सामने एक ओर जहां राहत एवं बचाव कार्य जारी रखने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
सद्गुरु ने नेपाल के लिए 1 करोड़ रुपये की मदद का किया ऐलान
इस प्राकृतिक आपदा के बीच आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है।
उन्होंने रविवार को काठमांडू में आयोजित ‘इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल’ कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। सद्गुरु ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा से निपटने की जिम्मेदारी केवल नेपाल की नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग की जरूरत है।
इसके साथ ही उन्होंने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान के बीच एक साझा हिमालयी बोर्ड बनाने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव कार्यों को बेहतर तरीके से समन्वित करना बताया गया।
उनका सुझाव ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र के कई हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं का असर देखने को मिल रहा है। ऐसे में विभिन्न देशों के बीच आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
नेपाल-चीन व्यापारिक मार्ग को भी भारी नुकसान
बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक संपर्क पर भी पड़ा है। रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर को बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ के कारण सीमा चौकी, नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। इसके चलते इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग से होने वाली आवाजाही बाधित हुई है।
रासुवागढ़ी-केरुंग मार्ग नेपाल के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। चीन से नेपाल आने वाले सामान की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से पहुंचती है। इसलिए मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से व्यापारियों और आयात-निर्यात से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने के कारण सामान की आवाजाही प्रभावित होना स्वाभाविक है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने राहत कार्यों के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने की चुनौती भी है।
राहत कार्यों के साथ पुनर्वास पर भी रहेगा जोर
नेपाल में बाढ़ से पैदा हुए हालात को देखते हुए आने वाले समय में राहत और पुनर्वास दोनों पर ध्यान देना जरूरी होगा। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान, भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत भी महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा लापता लोगों की तलाश और बरामद शवों की पहचान की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। DNA जांच और रिकॉर्ड के आधार पर पहचान की प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन इससे प्रभावित परिवारों को अपने परिजनों के बारे में प्रमाणित जानकारी मिलने की संभावना बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ ने मानवीय संकट के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और व्यापारिक व्यवस्था के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। 919 मौतों और 4,200 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी के बीच राहत, बचाव, पहचान और पुनर्वास का काम आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं, नेपाल-चीन व्यापारिक मार्ग की बहाली और हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय सहयोग पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

