बाँदा में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे का आरोप, विधायक के फोन से कार्रवाई रुकने का दावा
रिपोर्ट- शैलेन्द्र शानू वर्मा
बाँदा। उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के बिसंडा विकास खंड अंतर्गत ग्राम तेंदुरा में ग्राम समाज की बंजर भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के कारण चर्चा में है। ग्राम पंचायत प्रशासक रामलाल जयन ने इस संबंध में आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल और जिलाधिकारी बाँदा को शिकायत भेजकर राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राजस्व अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण ग्राम समाज की जमीन पर लंबे समय से कब्जा बना हुआ है।
शिकायत में क्षेत्रीय लेखपाल और कथित कब्जाधारियों के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गाटा संख्या 647 पर कब्जे की शिकायत
शिकायत के अनुसार, राजस्व ग्राम तेंदुरा में स्थित गाटा संख्या 647, जिसका रकबा करीब 0.105 हेक्टेयर बताया गया है, ग्राम समाज की बंजर भूमि है। आरोप है कि इस भूमि पर राजन् सिंह पुत्र कपूर सिंह का कब्जा है।
ग्राम पंचायत प्रशासक का कहना है कि इस मामले में पहले भी राजस्व स्तर पर शिकायत की जा चुकी है। इसके बाद क्षेत्रीय लेखपाल आलोक कुमार ने 13 जून 2025 को अपनी आख्या प्रस्तुत की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, लेखपाल की रिपोर्ट में कब्जे की पुष्टि की गई थी। इसके बाद कथित कब्जाधारी को सात दिन के भीतर भूमि खाली करने का नोटिस भी जारी किया गया था।
हालांकि, नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कथित कब्जा नहीं हटाया गया। इसके अलावा, शिकायतकर्ता का दावा है कि करीब एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद राजस्व विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
दोबारा शिकायत के बाद गठित हुई राजस्व टीम
मामला लंबा खिंचने के बाद ग्राम पंचायत प्रशासक ने 7 अगस्त 2026 को तहसीलदार अतर्रा के समक्ष दोबारा शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तहसीलदार ने 18 अगस्त 2026 को आदेश संख्या 2816 जारी किया।
इस आदेश के तहत नायब तहसीलदार शिवदीप के नेतृत्व में राजस्व टीम गठित की गई। टीम को ग्राम तेंदुरा में गाटा संख्या 645, 647, 1474 और 2328 से कथित अवैध कब्जा हटाने के लिए मौके पर जाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, कार्रवाई के लिए 20 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी। लेकिन निर्धारित दिन राजस्व टीम का कोई भी सदस्य मौके पर नहीं पहुंचा। इससे शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की।
विधायक के फोन से टीम लौटने का दावा
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत में सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें जानकारी दी कि राजस्व टीम ग्राम समाज की भूमि से कब्जा हटाने के लिए मौके पर पहुंचने वाली थी। इसी दौरान कथित तौर पर एक विधायक का फोन आया और उसके बाद टीम वापस लौट गई।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि क्षेत्रीय लेखपाल आलोक कुमार ने भी कथित तौर पर विधायक के फोन के कारण कार्रवाई नहीं होने की बात कही। हालांकि, विधायक की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी शिकायत में नहीं दी गई है।
ऐसे में यह दावा फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसकी वास्तविकता की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकती है।
जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज हुई शिकायत
ग्राम पंचायत प्रशासक ने मामले को जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज कराया है। शिकायत का संदर्भ संख्या 40017026020614 बताई गई है। शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रशासक का कहना है कि ग्राम समाज की भूमि सार्वजनिक संपत्ति की श्रेणी में आती है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित राजस्व अधिकारियों की होती है। इसलिए यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सामने आती है तो राजस्व विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
लेखपाल की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2025 में कब्जे की पुष्टि होने और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद जमीन को कब्जामुक्त नहीं कराया गया। इसके बाद दोबारा शिकायत होने पर राजस्व टीम गठित की गई, लेकिन कार्रवाई निर्धारित तिथि पर नहीं हो सकी।
इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि लेखपाल की कथित भूमिका की जांच किसी अन्य तहसील के अधिकारी से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे। इसके अलावा, यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फोन रिकॉर्ड और सीसीटीवी की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों के फोन रिकॉर्ड और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में टीम के मौके पर पहुंचने से पहले या कार्रवाई के दौरान किसी प्रभावशाली व्यक्ति का फोन आया था, तो संबंधित रिकॉर्ड से इसकी स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
हालांकि, फोन रिकॉर्ड या सीसीटीवी फुटेज के संबंध में अभी कोई सार्वजनिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
ग्राम समाज की जमीन की सुरक्षा पर सवाल
ग्राम समाज की भूमि का उपयोग आमतौर पर सार्वजनिक और सामुदायिक जरूरतों के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि किसी सार्वजनिक भूमि पर लंबे समय तक कब्जा बना रहता है, तो इससे प्रशासनिक निगरानी और राजस्व अभिलेखों के रखरखाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
तेंदुरा गांव का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतकर्ता के अनुसार, कब्जे की स्थिति की पुष्टि पहले ही राजस्व रिपोर्ट में की जा चुकी थी। इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया गया है। अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
प्रशासनिक जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामले में अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। वहीं, यदि राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
इसके अलावा, संबंधित गाटा संख्या की राजस्व अभिलेखों के आधार पर स्थिति, मौके का निरीक्षण, पूर्व में जारी नोटिस, लेखपाल की आख्या और तहसीलदार के आदेश की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और अब तक कार्रवाई क्यों लंबित रही।

