आजमगढ़ में निशुल्क नेत्र शिविर, 225 से अधिक मरीजों की जांच; डॉ. अमित सिंह बोले- जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म

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रिपोर्ट- पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़। सगड़ी विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाने की पहल के तहत रविवार को आराजी देवारा नैनिजोर नई बस्ती स्थित महुला गढ़वल बांध पर निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। पूर्व प्रधान सूर्यदेव यादव के यहां आयोजित इस शिविर में रमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर, नरौली आजमगढ़ के समाजसेवी डॉ. अमित सिंह के सौजन्य से क्षेत्र के 225 से अधिक लोगों की आंखों की जांच की गई।

शिविर में दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। इस दौरान नेत्र रोग विशेषज्ञों ने मरीजों की आंखों की जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया। जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क दवाएं वितरित की गईं, जबकि चश्मे की आवश्यकता वाले लोगों को चश्मे भी उपलब्ध कराए गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधा मिलने से काफी राहत मिली।

225 से अधिक लोगों की हुई नेत्र जांच

शिविर में नई बस्ती, रौनापार, आराजी देवारा नैनिजोर, अजगरा, आरजी अजगरा, सोनौरा, देवारा खास राजा, माधव का पूरा, अजगरा मसरकी, अचल नगर और इस्माइलपुर समेत आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचे। 225 से अधिक मरीजों का नेत्र परीक्षण किया गया।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज सिंह ने बताया कि जांच के दौरान कई मरीजों में नजदीक की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई न देने की समस्या सामने आई। इसके अलावा आंख में माड़ा, पुरानी चोट और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज भी शिविर में पहुंचे। वहीं, कुछ लोगों ने आंखों में खुजली, जलन और कीचड़ आने जैसी शिकायतें भी बताईं।

विशेषज्ञों ने मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार आवश्यक सलाह दी और दवाएं उपलब्ध कराईं। गंभीर अथवा आगे की जांच की आवश्यकता वाले मरीजों को उचित उपचार के लिए चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया।

मोबाइल और टीवी के अत्यधिक इस्तेमाल से आंखों पर असर

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन और टीवी का अत्यधिक इस्तेमाल आंखों की सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेष रूप से बच्चों में लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने की आदत के कारण कम उम्र में ही आंखों से संबंधित परेशानियां सामने आ रही हैं।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को अनावश्यक रूप से मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने दें। इसके साथ ही बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि किसी बच्चे को लगातार आंखों में दर्द, जलन, पानी आना या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्या हो तो समय रहते चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंखों की नियमित जांच और दैनिक जीवन में स्क्रीन के संतुलित इस्तेमाल से कई समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर मिली सुविधा

महुला गढ़वल बांध के आसपास का क्षेत्र घाघरा नदी के किनारे बसा हुआ है और यहां के कई गांव बाढ़ की स्थिति से प्रभावित होते रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। आजमगढ़ मुख्यालय की दूरी कई ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 50 से 60 किलोमीटर या उससे अधिक बताई जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार, मुख्यालय तक आने-जाने में ही काफी खर्च हो जाता है। आने-जाने का किराया करीब 200 रुपये तक पहुंच सकता है। इसके अलावा अस्पताल में जांच, दवा और अन्य उपचार पर होने वाला खर्च भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनता है।

ऐसे में गांव के नजदीक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित होने से लोगों को काफी सुविधा मिली। ग्रामीणों ने शिविर के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बिना अतिरिक्त खर्च के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने का अवसर मिलता है।

लगातार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर

शिविर के आयोजक और समाजसेवी डॉ. अमित सिंह ने कहा कि सगड़ी विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए व्यापक स्तर पर नेत्र परीक्षण और उचित उपचार की मुहिम शुरू की गई है। उनका कहना है कि यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की जरूरत के अनुसार आगे भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि घाघरा नदी के किनारे बसे बाढ़ प्रभावित उत्तरी क्षेत्र के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना उनके मिशन का हिस्सा है। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को कई बार सामान्य स्वास्थ्य जांच के लिए भी दूर जाना पड़ता है। इसलिए प्रयास है कि जरूरतमंद लोगों को उनके क्षेत्र के आसपास ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

डॉ. अमित सिंह ने कहा, “जनता की सेवा और सहयोग ही सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर आंखों से जुड़ी सामान्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के लिए ऐसे शिविर उपयोगी साबित हो सकते हैं।

मोतियाबिंद और अन्य समस्याओं की जांच पर फोकस

शिविर में मोतियाबिंद, आंख में माड़ा, कम दिखाई देना, आंखों में जलन और खुजली जैसी समस्याओं की जांच की गई। चिकित्सकों ने मरीजों को समस्या के अनुरूप दवाएं और आवश्यक सलाह दी।

इसके अलावा पुरानी चोट के कारण आंखों से संबंधित परेशानी झेल रहे लोगों की भी जांच की गई। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी कि आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच होने से बीमारी की स्थिति को समझने और उचित उपचार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

निशुल्क चश्मे और दवाओं के वितरण से उन लोगों को भी राहत मिली, जो आर्थिक कारणों से नियमित रूप से आंखों की जांच या चश्मा नहीं बनवा पाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे शिविरों की जरूरत

ग्रामीण और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए नियमित स्वास्थ्य शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध होना उपयोगी रहता है।

रविवार को आयोजित इस नेत्र शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी से भी यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में आंखों की जांच और उपचार को लेकर जरूरत मौजूद है। वहीं, चिकित्सकों द्वारा मोबाइल और टीवी के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर दी गई सलाह ने बच्चों की आंखों की देखभाल के प्रति अभिभावकों का ध्यान भी आकर्षित किया।

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