सावन पूर्णिमा पर अयोध्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ में कर रहे जलाभिषेक
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अयोध्या: सावन मास के अंतिम दिन सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र सरयू नदी के तट पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाकर स्नान और दान किया। इसके बाद श्रद्धालुओं का रुख प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर की ओर हुआ, जहां उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
सावन पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या में धार्मिक वातावरण देखने को मिला। सरयू घाटों से लेकर प्रमुख मंदिरों तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने सावन के अंतिम दिन अयोध्या पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ पहुंचे श्रद्धालु
सावन पूर्णिमा के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सरयू स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु सुबह से ही सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान किया और इसके बाद दान-पुण्य किया।
सरयू स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए थे।
श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण पुलिस प्रशासन ने उन्हें टोली बनाकर मंदिर की ओर भेजा। इस व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को क्रमबद्ध तरीके से नागेश्वरनाथ मंदिर तक पहुंचाया गया, जिससे मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से चलती रही।
पुलिस-प्रशासन ने संभाली व्यवस्था
सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पहले से ही सक्रिय रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया।
नागेश्वरनाथ मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। श्रद्धालुओं को समूहों में मंदिर की ओर भेजने से भीड़ को व्यवस्थित रखने में मदद मिली। इसके अलावा श्रद्धालुओं को सुविधापूर्वक जलाभिषेक कराने की व्यवस्था की गई।
प्रशासन की ओर से सावन मेले के दौरान भी लगातार श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा गया। प्रमुख धार्मिक स्थलों और श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी रही।
नागेश्वरनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व
अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में नागेश्वरनाथ मंदिर का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र महाराज कुश ने की थी। इसी वजह से नागेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
सावन मास में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए सावन के अंतिम दिन नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था का वातावरण बना रहा।
सावन मेले का भी हुआ समापन
सावन पूर्णिमा के साथ ही अयोध्या में चल रहे सावन मेले का भी समापन हो गया। पूरे सावन मास के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में आवाजाही रही। विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। सावन मेले को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। भीड़ वाले क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती के साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।
अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या अयोध्या पहुंची। हालांकि, प्रशासन की व्यवस्थाओं के चलते धार्मिक कार्यक्रमों और दर्शन-पूजन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया।
श्रद्धालुओं ने बताया सौभाग्य का अवसर
अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने सावन पूर्णिमा के अवसर पर सरयू स्नान और नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक को विशेष धार्मिक अनुभव बताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि अयोध्या पहुंचकर सरयू स्नान करना, भगवान शिव का जलाभिषेक करना और रामलला तथा हनुमानगढ़ी के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
कई श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन के अंतिम दिन अयोध्या आकर पूजा-अर्चना करने की उनकी लंबे समय से इच्छा थी। उन्होंने कहा कि सावन पूर्णिमा के दिन धार्मिक नगरी में पूजा करने से उन्हें आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उनका कहना था कि अधिक भीड़ होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था के कारण उन्हें मंदिर तक पहुंचने और जलाभिषेक करने में सुविधा हुई।
आस्था और परंपरा के साथ संपन्न हुआ सावन
सावन पूर्णिमा के साथ अयोध्या में सावन मास की धार्मिक गतिविधियों का समापन हुआ। सरयू स्नान, स्नान-दान और नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक के साथ श्रद्धालुओं ने सावन के अंतिम दिन को धार्मिक आस्था के साथ मनाया।
इस दौरान अयोध्या की धार्मिक परंपरा, श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासन की व्यवस्थाएं एक साथ दिखाई दीं। सावन मेले के अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण तरीके से पूजा-अर्चना की और धार्मिक स्थलों के दर्शन किए।
इस प्रकार सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर अयोध्या में दिनभर धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। सरयू स्नान से लेकर नागेश्वरनाथ में जलाभिषेक और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन तक श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ पर्व मनाया। वहीं, प्रशासन की व्यवस्थाओं के बीच सावन मेले का भी शांतिपूर्ण तरीके से समापन हुआ।

