रक्षाबंधन से पहले यूपी में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, हाईवे पर 16.3 कुंतल संदिग्ध खाद्य पदार्थ नष्ट
Digital UP News Desk
लखनऊ। रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। त्योहार के दौरान मिठाइयों, दूध से बने उत्पादों और अन्य खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने के बीच विभाग ने हाईवे, टोल प्लाजा और उनसे जुड़ी सड़कों पर विशेष जांच अभियान चलाया। इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रदेश में बाहर से आने वाले संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच करना और लोगों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना है।
अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने अलग-अलग मार्गों पर 97 वाहनों की जांच की। जांच में 28 वाहनों में अनियमितताएं पाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा संदिग्ध खाद्य पदार्थों के 35 नमूने जांच के लिए लिए गए। जांच के दौरान ऐसे खाद्य पदार्थ भी मिले जिन्हें मौके पर ही असुरक्षित मानते हुए नष्ट कराया गया।
विभाग के अनुसार, प्रदेशभर में करीब 16.3 कुंतल असुरक्षित खाद्य पदार्थ मौके पर नष्ट कराया गया। नष्ट किए गए खाद्य पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है। कार्रवाई मुख्य रूप से पनीर, खोया, दूध, नमकीन और मिल्क केक जैसे खाद्य पदार्थों पर केंद्रित रही।
हाईवे और टोल नाकों पर विशेष निगरानी
रक्षाबंधन से पहले खाद्य पदार्थों की आवाजाही बढ़ जाती है। खासकर दूध, खोया, पनीर और मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उत्पाद बड़ी मात्रा में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग ने हाईवे और टोल नाकों को जांच के लिए प्रमुख स्थान बनाया।
अभियान के दौरान टीमों ने वाहनों में रखे खाद्य पदार्थों की स्थिति, पैकिंग और अन्य जरूरी मानकों की जांच की। जहां खाद्य सामग्री संदिग्ध मिली, वहां उसके नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए गए। वहीं, ऐसे पदार्थ जिन्हें तत्काल उपयोग के लिए असुरक्षित पाया गया, उन्हें नियमानुसार नष्ट कराया गया।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि त्योहार के समय खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर विभाग निगरानी बढ़ा रहा है। साथ ही, कारोबारियों और खाद्य सामग्री की ढुलाई करने वाले लोगों को भी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने का संदेश दिया गया है।
मथुरा में 1200 किलो पनीर नष्ट
अभियान के तहत मथुरा में बड़ी कार्रवाई सामने आई। यहां करीब 1200 किलोग्राम पनीर नष्ट कराया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई गई है। त्योहार से पहले बड़ी मात्रा में पनीर की आवाजाही को देखते हुए विभाग की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पनीर का इस्तेमाल मिठाइयों और विभिन्न व्यंजनों में बड़े स्तर पर किया जाता है। इसलिए त्योहार के दौरान इसकी मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पनीर की गुणवत्ता की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया।
मेरठ में 10 कुंतल खोया नष्ट
मेरठ में भी खाद्य सुरक्षा टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब 10 कुंतल खोया नष्ट कराया। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 3.30 लाख रुपये बताई गई है।
रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के दौरान खोया मिठाई कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी वजह से त्योहार से पहले खोया की जांच को लेकर खाद्य विभाग सक्रिय नजर आया। संदिग्ध खोया मिलने पर उसे आगे बिक्री या उपयोग से रोकते हुए नष्ट कराया गया।
अयोध्या-गोरखपुर हाईवे पर नमकीन की जांच
अयोध्या-गोरखपुर हाईवे पर भी खाद्य सुरक्षा टीमों ने अभियान चलाया। यहां करीब 3416 किलोग्राम नमकीन की जांच की गई। हाईवे पर खाद्य सामग्री की बड़ी मात्रा में आवाजाही को देखते हुए टीमों ने वाहनों को रोककर खाद्य पदार्थों की जांच की।
नमकीन भी त्योहार के दौरान घरों और दुकानों पर बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होती है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पिलखुआ-हापुड़ हाईवे पर खोया पर कार्रवाई
पिलखुआ-हापुड़ हाईवे पर भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान चलाया। यहां करीब 1670 किलोग्राम खोया नष्ट कराया गया। यह कार्रवाई त्योहार से पहले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के अभियान का हिस्सा रही।
इसके अलावा अलग-अलग जिलों में दूध और दुग्ध उत्पादों की भी जांच की गई। विभाग ने संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा है।
अलीगढ़ में 7000 लीटर संदिग्ध दूध नष्ट
अलीगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने करीब 7000 लीटर संदिग्ध दूध नष्ट कराया। इतनी बड़ी मात्रा में दूध की कार्रवाई अभियान के प्रमुख मामलों में शामिल रही।
दूध से बनने वाले खोया, पनीर और मिठाइयों की गुणवत्ता सीधे तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले दूध पर निर्भर करती है। इसलिए त्योहार के दौरान दूध की जांच को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे खाद्य पदार्थों को बाजार तक पहुंचने से रोकना है जिनकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।
कानपुर और नोएडा में भी कार्रवाई
कानपुर में खाद्य सुरक्षा टीम ने करीब 500 किलोग्राम अस्वास्थ्यकर खोया नष्ट कराया। वहीं, नोएडा-दिल्ली मार्ग पर करीब 185 किलोग्राम संदिग्ध पनीर नष्ट कराया गया।
इससे साफ है कि अभियान केवल लखनऊ या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग प्रमुख मार्गों पर एक साथ कार्रवाई की गई। खासतौर पर उन रास्तों पर निगरानी रखी गई जहां से खाद्य पदार्थों की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है।
त्योहार से पहले बढ़ी खाद्य सुरक्षा की चुनौती
रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर मिठाइयों और दूध से बने उत्पादों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति भी तेजी से बढ़ती है। इसी दौरान गुणवत्ता से जुड़े जोखिमों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
इसी क्रम में विभाग ने हाईवे और टोल नाकों पर जांच का फैसला किया। वाहनों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कहीं संदिग्ध या असुरक्षित खाद्य सामग्री बड़े पैमाने पर बाजार तक तो नहीं पहुंच रही है।
अभियान के दौरान लिए गए 35 नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही उनकी गुणवत्ता को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। यदि किसी नमूने में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की जरूरत
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बीच उपभोक्ताओं के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। त्योहार के दौरान खरीदारी करते समय खाद्य पदार्थों की पैकिंग, गुणवत्ता, निर्माण और उपयोग की तिथि जैसी जरूरी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। खुले में रखे खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उनकी स्थिति भी देखनी चाहिए।
वहीं, दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों के लिए भी जरूरी है कि वे निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें। साफ-सफाई, सुरक्षित भंडारण और गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का इस्तेमाल उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

