नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से तबाही, 105 भारतीयों समेत 384 यात्री लापता; बिहार पर भी खतरा

130

Digital UP News Desk

नेपाल। रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। तिब्बत की दिशा से अचानक आए तेज जलप्रवाह ने रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत आसपास के इलाकों में सड़क, पुल, मकान, वाहन और कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्रभावित किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार इस आपदा में कम से कम 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्र से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना है। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में कम से कम 105 भारतीय बताए जा रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा शुरुआती है और प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल होने के बाद स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

तिब्बत की दिशा से आया अचानक जलप्रवाह

भोटेकोशी नदी में पानी का स्तर बुधवार सुबह अचानक तेजी से बढ़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ का प्रवाह तिब्बत की दिशा से आया और कुछ ही समय में नदी के किनारे बसे इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार कई स्थानों पर संपर्क व्यवस्था बाधित हो गई है, जिससे नुकसान का पूरा आकलन करना मुश्किल हो रहा है।

भारी जलप्रवाह के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा वाहन, सामान और अन्य बुनियादी ढांचे भी बहने की खबरें सामने आई हैं। नेपाल सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और राहत दल भेजे हैं। सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से तलाशी एवं बचाव अभियान चला रही हैं।

384 यात्रियों के लापता होने से बढ़ी चिंता

इस आपदा का सबसे चिंताजनक पहलू बड़ी संख्या में यात्रियों और पर्यटकों का लापता होना है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार 384 यात्रियों के बारे में प्रारंभिक तौर पर जानकारी नहीं मिल पा रही है। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीयों के लापता होने की सूचना ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है।

हालांकि, लापता लोगों का आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा रहा है। प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण कई लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में राहत दलों के मौके पर पहुंचने और संचार व्यवस्था बहाल होने के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

नेपाल के अधिकारियों ने प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। साथ ही लोगों से नदी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा गया है।

नेपाल सेना ने तेज किया राहत और बचाव अभियान

बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है। सेना के अनुसार 25 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और खोज, बचाव तथा राहत कार्य के लिए कुल 14 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। इनमें नेपाल सेना के छह और निजी क्षेत्र के आठ हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इसके साथ ही 20 विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेडिकल टीम भी तैनात की गई है।

सड़क संपर्क बाधित होने के कारण हेलीकॉप्टर राहत अभियान का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं। वहीं, प्रशासन प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों की जानकारी जुटाने और सुरक्षित निकासी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं मौजूद हैं। अचानक आई बाढ़ से कई परियोजनाओं और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। नेपाल की ऊर्जा व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार कई प्रमुख हाइड्रोपावर और ट्रांसमिशन सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।

इसका असर केवल स्थानीय बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण सड़क और संचार नेटवर्क प्रभावित होने से राहत एवं बचाव कार्यों में भी मुश्किलें पैदा हुई हैं। इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की जान बचाने और प्रभावित इलाकों तक पहुंच बहाल करने की है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

नेपाल में भोटेकोशी नदी से शुरू हुआ जलप्रवाह आगे चलकर त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़ता है और फिर यह नदी प्रणाली भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है। इसी कारण नेपाल में अचानक आई इस बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती और निचले इलाकों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

विशेष रूप से बिहार के पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण तथा आसपास के इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेपाल से आने वाला पानी बिहार में बड़ी बाढ़ का रूप लेगा। जलस्तर, नदी की क्षमता, स्थानीय बारिश और अगले कुछ घंटों में पानी के प्रवाह जैसे कई कारक स्थिति को प्रभावित करेंगे।

इसलिए लोगों के बीच अनावश्यक भय फैलाने के बजाय प्रशासनिक निर्देशों और आधिकारिक जलस्तर संबंधी सूचनाओं पर ध्यान देना जरूरी है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता प्राकृतिक आपदा का जोखिम

भोटेकोशी क्षेत्र में इस तरह की अचानक बाढ़ पहले भी चिंता का कारण रही है। विशेषज्ञ हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर, बर्फ, भूस्खलन और ग्लेशियल झीलों से जुड़ी घटनाओं को अचानक बाढ़ के संभावित कारणों में गिनते हैं। हालांकि, मौजूदा घटना के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी जरूरी है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार इस बार बर्फ और चट्टान से जुड़ी एक बड़ी घटना के बाद फ्लैश फ्लड आने की जानकारी सामने आई है।

हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां थोड़े समय में जलप्रवाह में बड़ा बदलाव आ सकता है। यही वजह है कि नेपाल, भारत और अन्य हिमालयी देशों के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और सीमा-पार आपदा समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

राहत अभियान के बीच लोगों से सतर्क रहने की अपील

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने, लापता लोगों की तलाश करने और घायलों को उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। नेपाल सरकार ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, भारत के लिए भी अगले कुछ घंटों में नदी के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी होगा। विशेषकर गंडक नदी से जुड़े बिहार के इलाकों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को आधिकारिक अलर्ट पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अफवाहों पर भरोसा न किया जाए और केवल प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियों की ओर से जारी सूचनाओं को ही सही माना जाए।

You may have missed