बसपा यूपी-उत्तराखंड और पंजाब में अकेले लड़ेगी यूपी विधानसभा चुनाव 2027, मायावती ने गठबंधन से किया किनारा

WhatsApp Image 2026-08-25 at 3.08.01 PM

Digital UP News Desk

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर अपनी चुनावी रणनीति स्पष्ट कर दी है। बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित पार्टी की बैठक में साफ कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और उत्तराखंड में भी किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन या चुनावी समझौता नहीं करेगी। इन तीनों राज्यों में बसपा अपने संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के भरोसे अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी।

मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह जुट जाने के निर्देश दिए। उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ-साथ ऐसे लोगों को उम्मीदवार बनाने पर विशेष जोर दिया, जो कर्मठ, ईमानदार और जनता के बीच सक्रिय हों। उनका कहना है कि मजबूत संगठन और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं के दम पर ही चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

यूपी चुनाव 2027 को लेकर बसपा की रणनीति स्पष्ट

लखनऊ में हुई बैठक के दौरान मायावती ने पार्टी संगठन की मौजूदा स्थिति और आगामी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में पंजाब में बसपा के जनाधार और संगठनात्मक स्थिति पर भी चर्चा हुई। मायावती ने पदाधिकारियों से कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भी स्तर पर तैयारी अधूरी नहीं रहनी चाहिए।

बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति को बूथ स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता का आधार है। इसलिए पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहना होगा और पार्टी की नीतियों तथा विचारधारा को जनता तक पहुंचाना होगा।

मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा अब चुनावी गठबंधनों के बजाय अपने संगठन और अपने सामाजिक आधार पर भरोसा करेगी। उनके मुताबिक, पिछले अनुभवों में गठबंधन की राजनीति से पार्टी को सीटों और वोट प्रतिशत, दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ा है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में बसपा अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

गठबंधन से दूरी, अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला

बसपा प्रमुख के इस फैसले को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से पार्टी की महत्वपूर्ण रणनीतिक घोषणा माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में जहां विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं बसपा ने भी संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।

मायावती ने बैठक में कहा कि पार्टी को चुनाव के दौरान आने वाली राजनीतिक चुनौतियों का सामना मजबूती के साथ करना होगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं को अभी से बूथ स्तर पर संपर्क बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि पार्टी की गतिविधियां केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों तक भी लगातार पहुंच बनाई जाए।

इसके अलावा, उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी बसपा प्रमुख ने स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कर्मठ और ईमानदार लोगों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। पार्टी की कोशिश ऐसे चेहरों को मैदान में उतारने की होगी, जो जनता के बीच अपनी सक्रियता और विश्वसनीयता के लिए पहचाने जाते हों।

कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़े कार्यक्रम की तैयारी

बैठक में बसपा के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि को लेकर भी चर्चा हुई। मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आगामी 9 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां समय से पूरी करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि कार्यक्रम की तैयारियां पिछले वर्ष दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएं।

बसपा के लिए कांशीराम की पुण्यतिथि का कार्यक्रम संगठनात्मक और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पार्टी इस आयोजन के जरिए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और अपने आंदोलन की विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।

मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी के संस्थापक कांशीराम के विचारों और बहुजन आंदोलन की मूल भावना को जनता तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाए। इसके लिए संगठन के विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों को प्रभावी तरीके से संचालित करने पर जोर दिया गया।

‘जनकल्याणकारी दिवस’ पर आर्थिक सहयोग बढ़ाने का निर्देश

बैठक में 15 जनवरी 2027 को ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि इस अवसर पर बसपा की ओर से किया जाने वाला आर्थिक सहयोग पिछली बार की तुलना में बेहतर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम पार्टी की विचारधारा और सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, इनके माध्यम से कार्यकर्ताओं के बीच संगठनात्मक एकजुटता भी बढ़ती है।

मायावती ने अंबेडकरवादी विचारधारा और बसपा आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य समाज के गरीब, बेरोजगार और वंचित वर्गों के हितों को प्राथमिकता देना है। बसपा ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाना चाहती है, जिनसे लोगों को गरीबी और बेरोजगारी से राहत मिले तथा उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सके।

कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी में जुटने का संदेश

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधियों की राजनीतिक रणनीतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाए रखने और चुनाव तक लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए।

बसपा प्रमुख ने कहा कि चुनावी सफलता के लिए केवल शीर्ष नेतृत्व की रणनीति पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं की मेहनत जरूरी है। इसलिए पार्टी पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में लगातार बैठकें करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने पर ध्यान देना होगा।

दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बसपा का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला राज्य की राजनीतिक तस्वीर पर असर डाल सकता है। हालांकि चुनाव अभी दूर है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक गतिविधियों और रणनीतिक तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है।

गरीब और वंचित वर्गों पर फोकस

बसपा की चुनावी रणनीति में गरीब, बेरोजगार और वंचित वर्गों को प्रमुख मुद्दा बनाए रखने के संकेत भी बैठक से मिले हैं। मायावती ने कहा कि पार्टी इन वर्गों को गरीबी और बेरोजगारी से बाहर निकालने तथा सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने वाली नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगी।

इस तरह बसपा की आगामी रणनीति में संगठन विस्तार, बूथ स्तर की मजबूती, उम्मीदवारों के चयन और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता मिलने की संभावना है। साथ ही, कांशीराम की पुण्यतिथि और ‘जनकल्याणकारी दिवस’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की कोशिश करेगी।

कुल मिलाकर, मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 के लिए बसपा की दिशा स्पष्ट कर दी है। पार्टी गठबंधन से दूरी बनाकर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। अब आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बसपा अपने संगठन को बूथ स्तर तक कितनी मजबूती देती है और अपने स्वतंत्र चुनावी अभियान को किस तरह आगे बढ़ाती है।

You may have missed