कानपुरः बिधनू के दिव्य गीता ज्ञान आश्रम में श्रावण मास पर शिव आराधना और गीता ज्ञान यज्ञ

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Digital UP News Desk 

कानपुरः बिधनू-जगदीशपुर में श्रावण मास के पावन अवसर पर बिधनू के जगदीशपुर स्थित दिव्य गीता ज्ञान आश्रम में भगवान शिव शंकर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं के साथ आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान भगवान शिव की आराधना के साथ श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक संदेश पर विस्तार से चर्चा की गई।

श्रावण मास को भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए आश्रम परिसर में भगवान शंकर की मूर्ति को विधि-विधान और श्रद्धा के साथ सजाया गया। इसके बाद वैदिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।

गीता ज्ञान योग में 13वें अध्याय की व्याख्या

आश्रम में प्रत्येक सप्ताह की तरह इस सप्ताह भी गीता ज्ञान योग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गीता ज्ञान प्रसारक अशोक जी ने श्रीमद्भगवद्गीता के 13वें अध्याय ‘क्षेत्र-क्षेत्रज्ञयोग’ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को गीता के माध्यम से जीवन, संसार और आत्मा के स्वरूप को समझने का मार्ग बताया।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत है। गीता में मनुष्य के जीवन, उसके कर्म, आत्मा और संसार के संबंध में गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। इसलिए यदि व्यक्ति इसके संदेश को समझकर अपने जीवन में अपनाता है, तो उसे आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन की दिशा मिल सकती है।

अशोक जी ने क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाते हुए बताया कि शरीर को ‘क्षेत्र’ और उसे जानने वाले चेतन तत्व को ‘क्षेत्रज्ञ’ कहा गया है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अपने वास्तविक स्वरूप को समझने का प्रयास करता है, तब उसके भीतर आत्मज्ञान की भावना विकसित होती है। यही ज्ञान उसे जीवन के उद्देश्य को समझने में सहायता करता है।

आत्मज्ञान और मोक्ष के मार्ग पर चर्चा

गीता ज्ञान सत्र के दौरान वक्ता ने बताया कि मनुष्य के लिए बाहरी संसार को समझने के साथ-साथ अपने भीतर झांकना भी आवश्यक है। जीवन में आने वाली परिस्थितियों, सुख-दुख और उतार-चढ़ाव के बीच व्यक्ति यदि आत्मज्ञान और विवेक को महत्व देता है, तो वह मानसिक रूप से अधिक संतुलित रह सकता है।

उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति जागरूक करता है। साथ ही, यह जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार, आत्मा और शरीर के बीच अंतर को समझना आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस ज्ञान के माध्यम से व्यक्ति मोक्ष के मार्ग को समझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

इसके अलावा, कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को नियमित रूप से धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने, सत्संग में शामिल होने और अपने जीवन में सकारात्मक विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ता ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान का उद्देश्य केवल सुनना नहीं, बल्कि उसके सार को व्यवहार में उतारना भी है।

श्रद्धालुओं ने लिया शिव आराधना और गीता ज्ञान का लाभ

कार्यक्रम में आश्रम के संचालक ज्ञानेंद्र तिवारी, बृजकिशोर, राधे श्याम कुशवाहा और आश्रम संरक्षक अशोक तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना में श्रद्धापूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही गीता ज्ञान योग के दौरान प्रस्तुत किए गए आध्यात्मिक विचारों को भी ध्यानपूर्वक सुना।

श्रद्धालुओं ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के साथ गीता के ज्ञान का श्रवण आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष अनुभव रहा। धार्मिक आयोजन के माध्यम से जहां लोगों को पूजा-अर्चना का अवसर मिला, वहीं गीता के संदेशों को समझने और जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी मिली।

आश्रम परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय और शांत वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में सहभागिता की।

सनातन ज्ञान के प्रचार-प्रसार की दिशा में पहल

दिव्य गीता ज्ञान आश्रम द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम आध्यात्मिक जागरूकता और सनातन ज्ञान के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। आश्रम की ओर से नियमित रूप से गीता ज्ञान, योग और सत्संग जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य लोगों को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक ग्रंथों के संदेश से जोड़ना है।

विशेष रूप से युवाओं और नई पीढ़ी के बीच भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चिंतन और गीता के जीवनोपयोगी संदेशों को पहुंचाने की दिशा में ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, श्रावण जैसे धार्मिक अवसरों पर सामूहिक पूजा और सत्संग लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

आश्रम प्रबंधन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी भक्तों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, भविष्य में भी इसी प्रकार के ज्ञान यज्ञ, सत्संग और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई। आश्रम प्रबंधन के अनुसार, ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास जारी रहेगा।

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