गोंडा मदरसा मामले में सहायक शिक्षक गिरफ्तार, जांच में छात्राओं के आरोप सही पे गए, पॉक्सो ऐक्ट मे रिपोर्ट दर्ज

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Digital UP News Desk

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित एक अनुदानित मदरसे में कक्षा पांच की नाबालिग छात्राओं की शिकायत के बाद सहायक शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई का मामला सामने आया है। छात्राओं ने शिक्षक पर अनुचित व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए थे।

शिकायत सामने आने के बाद मदरसा प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छात्राओं के बयान दर्ज किए और इसकी जानकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दी।

छात्राओं की शिकायतों को सही

मामले की जांच के लिए चार अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के दौरान छात्राओं, आरोपी शिक्षक, प्रधानाचार्य और मदरसा प्रबंधन से बातचीत की गई। अधिकारियों की रिपोर्ट में छात्राओं की शिकायतों को सही पाए जाने के बाद आरोपी शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सहायक शिक्षक खालिद हुसैन को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

15 जुलाई को सामने आई शिकायत

मामले की शुरुआत 15 जुलाई को हुई, जब कक्षा पांच में पढ़ने वाली कई छात्राओं ने मदरसे के प्रधानाचार्य के कार्यालय पहुंचकर सहायक शिक्षक के खिलाफ शिकायत की। छात्राओं ने शिक्षक पर कक्षा के दौरान अनुचित तरीके से व्यवहार करने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए।

शिकायत मिलने के बाद प्रधानाचार्य ने इसे गंभीरता से लिया। छात्राओं के बयान दर्ज किए गए और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। इसके साथ ही आरोपी शिक्षक को तत्काल कक्षा चार और पांच की पढ़ाई से अलग कर दिया गया। प्रधानाचार्य ने शिक्षक से पूरे मामले में लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा।

इसके बाद मामले की जानकारी मदरसे के प्रबंधक को दी गई। प्रबंधन ने भी शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने का निर्णय लिया।

शिक्षक ने आरोपों को बताया गलत

शिकायत के बाद आरोपी सहायक शिक्षक खालिद हुसैन ने अपने लिखित जवाब में छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया। शिक्षक ने कहा कि वह बच्चों को मेहनत और स्नेह के साथ पढ़ाता है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।

हालांकि, शिक्षक के स्पष्टीकरण के बावजूद प्रबंधन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने का फैसला किया। इसके लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चार अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित की गई। इस टीम में खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय/नगर, खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और नायब तहसीलदार सदर को शामिल किया गया।

चार अधिकारियों की टीम ने की जांच

जांच टीम ने मदरसे में पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी जुटाई। अधिकारियों ने शिकायत करने वाली छात्राओं से बातचीत की। इसके अलावा आरोपी शिक्षक, प्रधानाचार्य और मदरसा प्रबंधक के भी बयान लिए गए।

जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायत से जुड़े तथ्यों को भी देखा गया। अधिकारियों ने अलग-अलग पक्षों से जानकारी लेने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोपों को सही पाए जाने की बात सामने आई।

जांच रिपोर्ट के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय ने मदरसा प्रधानाचार्य को आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रधानाचार्य ने नगर कोतवाली में लिखित तहरीर दी।

21 अगस्त को दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस के अनुसार, 21 अगस्त की देर शाम आरोपी सहायक शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। तहरीर में नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पोक्सो एक्ट समेत संबंधित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया।

नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, मुकदमा दर्ज होने के करीब 24 घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई। इसके बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस मामले की आगे की विवेचना कर रही है। जांच में छात्राओं के बयानों, मदरसा प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी और संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

चूंकि मामला नाबालिग छात्राओं से जुड़ा है, इसलिए पुलिस और संबंधित विभागों के सामने पीड़ित छात्राओं की पहचान और उनकी निजता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में कानून के तहत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बच्चों की सुरक्षा तथा गोपनीयता को प्राथमिकता दी जाती है।

पुलिस की जांच जारी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि शिकायत से संबंधित सभी परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया जा सके।

वहीं, गिरफ्तारी के बाद पुलिस की ओर से आरोपी की तस्वीर या विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी मीडिया में जारी नहीं की गई। इसको लेकर कुछ सवाल भी सामने आए हैं, हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल, इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की विवेचना और न्यायालय की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल

गोंडा का यह मामला शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई के महत्व को भी सामने लाता है। किसी भी शिक्षण संस्थान में यदि बच्चों की ओर से गंभीर शिकायत सामने आती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करना जरूरी है।

इस मामले में शिकायत सामने आने के बाद आरोपी शिक्षक को संबंधित कक्षाओं से अलग किया गया, छात्राओं के बयान दर्ज किए गए और फिर उच्चस्तरीय जांच कराई गई। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया।

हालांकि, मामले की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल आरोपी न्यायालय के आदेश के बाद जेल भेजा जा चुका है और पुलिस पूरे प्रकरण की विवेचना में जुटी है।

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