इटावा सैफई ट्रामा सेंटर में सर्वर सुस्त, भर्ती और बिलिंग के लिए लंबी कतारों से मरीज परेशान
रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान
इटावा: उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के ट्रामा सेंटर में गुरुवार को सर्वर की धीमी गति ने मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ा दी। भर्ती फाइल तैयार कराने और बिलिंग के लिए बनाए गए काउंटरों पर काम की रफ्तार कम होने से लंबी कतारें लग गईं। कई तीमारदारों को अपनी बारी के लिए एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। ऐसे में मरीज को छोड़कर बिलिंग या भर्ती संबंधी प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ट्रामा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में तकनीकी व्यवस्था धीमी होने का सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ता है। गुरुवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब सुबह से ही सर्वर की गति धीमी रही और भर्ती तथा बिलिंग प्रक्रिया प्रभावित होती रही।
भर्ती और बिलिंग काउंटर पर बढ़ती गई कतार
ट्रामा सेंटर में भर्ती के लिए एक काउंटर और बिलिंग के लिए दो काउंटर संचालित होते हैं। हालांकि, सर्वर की धीमी गति के कारण इन काउंटरों पर काम सामान्य गति से नहीं हो सका। परिणामस्वरूप धीरे-धीरे मरीजों और तीमारदारों की कतार लंबी होती गई।
तीमारदारों का कहना था कि सर्वर की समस्या के कारण पर्चा बनाने और अन्य प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा था। कई लोगों को अपनी बारी आने के लिए काफी देर तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा।
एक तीमारदार ने बताया कि वह करीब दो घंटे से लाइन में खड़ा था। उसके मुताबिक, सर्वर इतना धीमा था कि पर्चा तैयार करने में भी 20 से 25 मिनट तक का समय लग रहा था। इसी तरह दूसरे तीमारदार ने भी भर्ती फाइल तैयार कराने में लंबा इंतजार होने की बात कही।
मरीज को छोड़कर बिलिंग के लिए जाना पड़ता है तीमारदार
इस व्यवस्था की एक बड़ी समस्या यह है कि भर्ती मरीज के साथ कई बार केवल एक ही तीमारदार मौजूद होता है। मरीज की देखभाल के साथ उसे भर्ती फाइल और बिलिंग से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती है।
ऐसे में जब तीमारदार मरीज को छोड़कर बिलिंग काउंटर पर पहुंचता है तो उसे लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है। यदि सर्वर की गति भी धीमी हो, तो यह प्रक्रिया और लंबी हो जाती है। इसके चलते तीमारदार काफी समय तक मरीज के पास वापस नहीं पहुंच पाता।
गंभीर मरीजों के उपचार वाले ट्रामा सेंटर में यह स्थिति मरीजों के परिजनों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बनती है। इसलिए भर्ती मरीजों के पास ही बिलिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
ओपीडी और अस्पताल में भी बड़ी संख्या में पहुंचे मरीज
गुरुवार को सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों की संख्या काफी रही। ओपीडी और 500 बेड वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को मिलाकर करीब 3300 मरीज पहुंचने की जानकारी सामने आई। वहीं, ट्रामा सेंटर में भी बड़ी संख्या में मरीजों के आने से वहां मौजूद काउंटरों पर दबाव बढ़ गया।
ओपीडी में पंजीकरण और पर्चा बनाने की प्रक्रिया चलती रही। हालांकि, ओपीडी की बिलिंग का समय समाप्त होने के बाद भर्ती मरीजों की बिलिंग का दबाव ट्रामा सेंटर के काउंटरों पर बढ़ गया।
इसके अलावा आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों की जीरो बिलिंग की प्रक्रिया भी यहीं होने के कारण काउंटरों पर काम का भार बढ़ता रहा। इस तरह दिन बढ़ने के साथ ही पहले से दबाव झेल रहे काउंटरों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई।
वार्ड में बिलिंग सुविधा शुरू करने के निर्देश
बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस समस्या से पहले से अवगत रहा है। कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने पूर्व में निरीक्षण के दौरान भर्ती मरीजों के बोर्ड के पास ही बिलिंग सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि भर्ती मरीज के साथ मौजूद तीमारदार को बिलिंग कराने के लिए मरीज को छोड़कर दूसरे काउंटर तक न जाना पड़े। इससे न केवल तीमारदार की परेशानी कम होती, बल्कि मरीज की देखभाल भी प्रभावित नहीं होती।
हालांकि, संबंधित निर्देश के बावजूद यह सुविधा अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप मरीजों और तीमारदारों को अभी भी पुराने तरीके से ही बिलिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है।
रात में भी बढ़ जाती है परेशानी
समस्या केवल दिन के समय तक सीमित नहीं है। रात में पुरानी बिल्डिंग में पर्चा और बिलिंग काउंटर संचालित नहीं होने के कारण भर्ती मरीजों के तीमारदारों को बिलिंग के लिए ट्रामा सेंटर की ओर जाना पड़ता है।
इस दौरान रास्ते में आने वाले कुछ गेट बंद मिलने से भी परेशानी बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे में रात के समय मरीज के साथ मौजूद व्यक्ति को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए दूसरी बिल्डिंग तक जाना पड़ता है।
चूंकि चिकित्सा विश्वविद्यालय में 24 घंटे मरीजों के आने और उपचार की व्यवस्था रहती है, इसलिए रात के समय भी आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच होना महत्वपूर्ण है।
सर्वर की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
चिकित्सा विश्वविद्यालय में भर्ती, बिलिंग और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हैं। ऐसे में सर्वर या नेटवर्क की गति प्रभावित होने का असर सीधे मरीजों की प्रक्रिया पर पड़ता है।
यदि किसी मरीज की भर्ती या बिलिंग प्रक्रिया तकनीकी कारणों से लंबी हो जाती है, तो उसका असर अस्पताल के दूसरे कामों पर भी पड़ सकता है। इसलिए सर्वर और नेटवर्क व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखना भी जरूरी है।
विश्वविद्यालय में नेटवर्क और सर्वर की धीमी गति से ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित होने की शिकायतें अलग-अलग अवसरों पर सामने आती रही हैं। ऐसे में स्थायी तकनीकी समाधान की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
10 से अधिक जिलों से आते हैं मरीज
सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में इटावा के अलावा मैनपुरी, औरैया, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, कन्नौज सहित 10 से अधिक जिलों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यहां मरीजों की संख्या सामान्य अस्पतालों की तुलना में अधिक रहती है।
इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के लिए भर्ती और बिलिंग व्यवस्था को तेज और सुचारु रखना जरूरी है। खासकर ट्रामा सेंटर में जहां मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है, वहां प्रशासनिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचना महत्वपूर्ण है।
गुरुवार की लंबी कतारों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के साथ तकनीकी व्यवस्था को भी मरीजों की संख्या के अनुरूप मजबूत करने की जरूरत है।
निर्देशों को जमीन पर उतारने की जरूरत
मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं। लेकिन इन निर्देशों का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
वार्ड या मरीज के पास बिलिंग सुविधा शुरू करने की योजना हो अथवा सर्वर की समस्या का स्थायी समाधान, दोनों ही मामलों में मरीजों को राहत मिलना जरूरी है। इससे तीमारदारों का समय बचेगा और मरीज की देखभाल भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।
कुल मिलाकर, सैफई ट्रामा सेंटर में गुरुवार को सामने आई स्थिति ने अस्पताल की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता को सामने रखा है। बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों को देखते हुए तेज सर्वर, पर्याप्त काउंटर, आसान बिलिंग और 24 घंटे जरूरी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। इससे मरीजों और तीमारदारों को अनावश्यक इंतजार और भागदौड़ से राहत मिल सकेगी।

