आजमगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 26.70 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार – जानिए किसको किया गया गिरफ्तार
रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार
आजमगढ़: साइबर अपराध के एक मामले में आजमगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कथित तौर पर 26.70 लाख की ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़ित को बैंक खाते में गलत लेन-देन और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने का भय दिखाया था। इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी की पहचान जहांगीर आलम पुत्र मो. रईस, निवासी मछली माहौल, लालकुर्ती, आमीनाबाद, लखनऊ, उम्र करीब 27 वर्ष के रूप में की है। पुलिस ने उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, 2,070 नकद और विभिन्न मोबाइल नंबरों से संबंधित सिम कार्ड बरामद किए हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई गई और इसके बाद आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली। फिलहाल पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
व्हाट्सऐप कॉल से शुरू हुआ मामला
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सऐप कॉल की गई थी। कॉल करने वाले लोगों ने खुद को कथित तौर पर सीआईओ अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ित से कहा कि उसके बैंक खाते से गलत तरीके से लेन-देन हुआ है और उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने वाला है।
इसके बाद साइबर अपराधियों ने पीड़ित पर दबाव बनाया। उसे गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए कहा गया कि यदि वह कार्रवाई से बचना चाहता है तो उनके निर्देशों का पालन करना होगा। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा गया और लगातार कॉल के जरिए उस पर निगरानी बनाए रखने का दावा किया गया।
साइबर अपराधियों की इस कथित रणनीति का उद्देश्य पीड़ित को मानसिक दबाव में लेकर उससे पैसे ट्रांसफर कराना था।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई रकम
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजने के लिए कहा। डर और दबाव के चलते पीड़ित ने उनके बताए खातों में कुल 26,70,000 ट्रांसफर कर दिए।
जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ तो उसने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम आजमगढ़ में मु0अ0सं0 32/2026 दर्ज किया गया।
पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 204 तथा आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों से आरोपी की पहचान
मामले की विवेचना के दौरान साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। पुलिस ने कॉलिंग से जुड़े नंबरों, डिजिटल गतिविधियों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर आरोपी जहांगीर आलम के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस की टीम लखनऊ पहुंची और आरोपी को उसकी सहमति से आजमगढ़ लेकर आई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घटना में आरोपी की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद 20 अगस्त 2026 को सुबह 11:35 बजे उसे पुलिस अभिरक्षा में लिया गया।
पुलिस के अनुसार इस तरह करते थे साइबर ठगी
पुलिस की जांच में सामने आए कथित तरीके के अनुसार, आरोपी अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लोगों को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सऐप कॉल करता था। कॉल के दौरान खुद को पुलिस या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराने की कोशिश की जाती थी। इसके लिए बैंक खाते से गलत लेन-देन, जांच, गिरफ्तारी और गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने जैसी बातें कही जाती थीं।
इसके बाद पीड़ित से कहा जाता था कि यदि वह गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई से बचना चाहता है तो उसे बताए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने होंगे।
पुलिस का आरोप है कि इसी तरीके से इस मामले में पीड़ित से 26.70 लाख की रकम ट्रांसफर कराई गई।
आरोपी के पास से मोबाइल और सिम बरामद
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और 2,070 नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संबंधित सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाया है। अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच से मामले से जुड़े अन्य लोगों और लेन-देन के संबंध में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है।
बरामदगी के आधार पर दर्ज मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था। उसके अन्य साथियों की भूमिका भी सामने आई है। इसलिए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।
जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पीड़ित को कॉल करने वाले अन्य लोग कौन थे और रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि बरामद सिम कार्ड और मोबाइल फोन का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया था।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्कता जरूरी
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर लोगों को कानून और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक दबाव में लेने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को इस तरह गिरफ्तार नहीं किया जाता।
यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी, सरकारी अधिकारी या किसी जांच एजेंसी का सदस्य बताकर पैसे की मांग करता है, तो बिना सत्यापन के रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय संबंधित विभाग या साइबर क्राइम पुलिस से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।
इसी तरह, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई
आजमगढ़ साइबर क्राइम पुलिस की यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में की गई। वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन और अपर पुलिस अधीक्षक यातायात पंकज श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम आस्था जायसवाल के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी से जुड़े मामलों में तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया।
आगे की जांच पर नजर
26.70 लाख की साइबर ठगी के इस मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच कर रही है।
इसके अलावा रकम के लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आजमगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में जहांगीर आलम को गिरफ्तार किया है और उसके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड तथा नकदी बरामद की है। पुलिस की जांच जारी है और आने वाले समय में इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।

